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60 लाख में डमी बिठाकर पास कर हथिया ली जोधपुर एम्स की सीट

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24 News Update जयपुर. देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल परीक्षा NEET में भारी फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें 60 लाख रुपए की डील के तहत एक फर्जी उम्मीदवार को असली कैंडिडेट की जगह बैठाकर MBBS सीट हासिल कर ली गई। हैरान करने वाले इस मामले में दो डॉक्टर और एक मेडिकल स्टूडेंट को गिरफ्तार किया गया है। जयपुर जिले के चौमूं थाना क्षेत्र में दर्ज मामले की जांच के दौरान पुलिस ने डॉक्टर सुभाष सैनी (33), मेडिकल छात्र सचिन गोरा (22) और डॉक्टर अजीत गोरा (30) को गिरफ्तार किया। यह गिरफ़्तारी ACP अशोक चौहान की निगरानी में हुई।

AIIMS में दाखिले तक पहुंचा फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि वर्ष 2020 में नीट परीक्षा में सचिन गोरा की जगह डॉक्टर अजीत गोरा ने परीक्षा दी थी। फोटो, पहचान-पत्र और बायोमेट्रिक की जगह-जगह पर हेरफेर की गई। अजीत ने परीक्षा में 667 अंक हासिल किए और इस फर्जीवाड़े के दम पर सचिन का AIIMS जोधपुर में MBBS में दाखिला हो गया।

60 लाख में तय हुआ ‘सपना बेचने’ का सौदा
पुलिस के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र का सूत्रधार डॉक्टर सुभाष सैनी था, जिसने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के लिए 60 लाख रुपए की डील कराई। यह सौदा सचिन गोरा और उसके परिजनों की सहमति से हुआ। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सचिन गोरा ने नीट परीक्षा कभी दी ही नहीं थी, फिर भी वो AIIMS का छात्र बना रहा।

पुलिस की सटीक पड़ताल से टूटा जाल
15 मई को एक स्थानीय निवासी द्वारा दर्ज रिपोर्ट के बाद चौमूं थाना पुलिस ने मामले की बारीकी से जांच शुरू की। एनटीए से परीक्षा रिकॉर्ड, प्रवेश पत्र और अन्य दस्तावेज मंगवाए गए। तस्वीरों और साक्ष्यों के मिलान से साफ हो गया कि परीक्षा में बैठे उम्मीदवार की असली पहचान अजीत गोरा थी। इस ऑपरेशन में भरतपुर और जोधपुर पुलिस की संयुक्त भागीदारी रही। भरतपुर के जगन्नाथ पहाड़िया मेडिकल कॉलेज और जोधपुर AIIMS से भी जरूरी रिकॉर्ड जुटाए गए।
जांच जारी, और खुल सकते हैं राज
फिलहाल तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। यह आशंका भी जताई जा रही है कि इस प्रकार के और कई मामले सामने आ सकते हैं, जिसमें मेडिकल कॉलेज की सीटों की दलाली की जा रही हो।

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