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निगम का यूडी टेक्स डंडा सख्ती या ‘पिक एंड चूज कार्रवाई? पारदर्शिता का ताला क्यों नहीं खोलते???

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24 News Udpate उदयपुर। उदयपुर में नगर निगम की ओर से नगरीय विकास कर या यूडी टैक्स की वसूली को लेकर दिखाई जा रही सख्ती पहली नजर में तो प्रशासनिक मुस्तैदी लगती है, लेकिन जैसे-जैसे परतें खुलती हैं, वैसे-वैसे सवालों की संख्या भी बढ़ती जाती है। छह संपत्तियों को सीज करने की ताज़ा कार्रवाई ने यह बहस फिर हवा दे दी है कि क्या नगर निगम वास्तव में निष्पक्ष कर-वसूली कर रहा है या फिर यह सब पिक एंड चूज़ की नीति के तहत हो रहा है।
सबसे बड़ा और बुनियादी सवाल यह है कि नगर निगम आज तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर यह सार्वजनिक सूची क्यों जारी नहीं कर पाया कि किन-किन लोगों पर कितना नगरीय विकास कर बकाया है? अगर निगम वाकई पारदर्शिता के साथ काम करना चाहता है, तो वर्षवार बकायादारों की सूची, अधिकतम कर बकाया (टॉप डिफॉल्टर्स) की जानकारी और उन पर प्रस्तावित कार्रवाई की स्पष्ट टाइमलाइन सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
आज यहां पर सीज की संपत्तियां
निगम की ओर से शनिवार को छह संपत्तियों को सीज किया गया, जिनमें सुंदरवास, सज्जन नगर, गोवर्धन विलास, हिरण मगरी और मधुबन जैसे इलाके शामिल हैं। कार्रवाई के बाद दो संपत्ति मालिकों ने तत्काल टैक्स जमा करवा दिया और उनकी संपत्तियों से ताले भी खुल गए। यहीं से यह शंका और गहरी हो जाती है कि क्या यह कार्रवाई वसूली का दबाव है या सिर्फ दिखावटी सख्ती? यदि भुगतान करते ही सीज हट जाता है, तो फिर बड़े और प्रभावशाली बकायादारों पर कार्रवाई कब होगी? शहर में यह चर्चा आम है कि कई ऐसी व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियां हैं, जिन पर लाखों-करोड़ों का कर वर्षों से बकाया है, लेकिन उनके नाम कभी भी सीज सूची में नहीं आते। सवाल यह भी है कि क्या प्रभावशाली लोग इस पूरी प्रक्रिया से सुरक्षित दूरी बनाए हुए हैं? यदि निगम के पास पूरा डेटा मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक करने में संकोच क्यों? इन प्रश्नों का सार्वजनिक जवाब देने में दिक्कत क्या है??
नगर निगम आयुक्त की ओर से बार-बार यह कहा जा रहा है कि कर वसूली लगातार जारी रहेगी और 31 मार्च तक छूट का लाभ दिया जा रहा है। लेकिन असली मुद्दा छूट का नहीं, विश्वास का है। जब तक निगम यह स्पष्ट नहीं करता कि कार्रवाई का आधार क्या है और किन मानकों पर संपत्तियों को सीज किया जा रहा है, तब तक हर कार्रवाई पर सवाल उठते रहेंगे।
शहर का नागरिक यह जानना चाहता है कि क्या कर-वसूली सभी के लिए समान टाइम लाइन पर है? बड़े बकायादारों की सूची सबको बता कर दूध का दूध और पानी का पानी क्यों नहीं किया जाता। क्या नगर निगम खुद पारदर्शिता के उसी पैमाने पर खड़ा है, जिसकी अपेक्षा वह नागरिकों से करता है? जब तक इन सवालों के जवाब सार्वजनिक मंच पर नहीं दिए जाते, तब तक हर सीज कार्रवाई सख्ती नहीं, बल्कि संदेह पैदा करती रहेगी। निगम को चाहिए कि सूची सार्वजनिक करें कि किसका कितना पैसा कितने समय से बकाया है और उस पर कार्रवाई की भी टाइम लाइन बता दें। ऐसे में सबको पता होगा कि अब रडार पर कौन हैं? किसका नंबर आने वाला है। इससे कार्रवाइयों की माथा पच्ची से भी छुटकारा मिल जाएगा।

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