24 News Update उदयपुर। नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) की वसूली को लेकर नगर निगम उदयपुर की सख्ती लगातार चर्चा में है, लेकिन इसी के साथ कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कभी तीन संपत्तियां, कभी चार और कभी एक साथ इससे अधिक जगहों पर सीज की कार्रवाई की जा रही है, परंतु निगम यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा कि कार्रवाई के लिए संबंधित संपत्तियों का चयन आखिर किस आधार पर किया गया।
शहरवासियों के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि नगरीय विकास कर नहीं जमा कराने वालों की एक समग्र, ऑनलाइन और टाइमलाइन आधारित सूची आखिर कब जारी की जाएगी? ऐसी सूची जिसमें यह स्पष्ट हो कि किस श्रेणी में कितनी राशि बकाया है, किस क्रम में कार्रवाई प्रस्तावित है और अगला नंबर किसका आने वाला हैकृताकि आम जनता भी वस्तुस्थिति समझ सके।
वर्तमान में निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना की ओर से यह तो बार-बार कहा जा रहा है कि यूडी टैक्स को लेकर कोई रियायत नहीं दी जाएगी, लेकिन यह नहीं बताया जा रहा कि क्या जिन संपत्तियों पर ताला लगाया गया, उसी श्रेणी और उतनी ही बकाया राशि वाली अन्य संपत्तियां शहर में मौजूद नहीं हैं? यदि हैं, तो उन पर अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या कार्रवाई केवल बकाया राशि के आधार पर हो रही है या किसी अन्य मानदंड पर? इन्हीं सवालों के चलते शहर में यह परसेप्शन गहराता जा रहा है कि निगम की कार्रवाई ‘पिक एंड चूज’ की श्रेणी में आती है। यानी कुछ चुनिंदा नामों पर ही सख्ती, जबकि प्रभावशाली या रसूखदार बकायेदारों के नाम सूची में आने से पहले ही बाहर रह जाते हैं। चाहे यह धारणा सही हो या गलत, लेकिन जब तक निगम पारदर्शिता के साथ तथ्य सामने नहीं रखेगा, तब तक यह अविश्वास बना रहेगा।
शहर के जानकारों का मानना है कि यदि निगम वास्तव में निष्पक्ष है, तो उसे कार्मिक शुचिता और प्रशासनिक ईमानदारी का प्रमाण देने में देर नहीं करनी चाहिए। समाधान साफ है कि सभी यूडी टैक्स बकायेदारों की वार्डवार और केटेगरीवार सूची निगम की वेबसाइट पर डाली जाए। उसमें बकाया राशि, नोटिस की तिथि और प्रस्तावित कार्रवाई की समय-सीमा स्पष्ट हो। यह भी बताया जाए कि कार्रवाई किस क्रम में और किन मानकों पर होगी। जब सूची सार्वजनिक होगी, तो न केवल जनता को यह पता चलेगा कि “अब किसका नंबर आने वाला है”, बल्कि निगम की कार्रवाई पर लग रहा चुनिंदा सख्ती का दाग भी स्वतः धुल जाएगा। वरना यूडी टैक्स वसूली की हर अगली कार्रवाई, चाहे वह कितनी ही कानूनी क्यों न हो, जनता की नजर में सवालों के घेरे में ही खड़ी रहेगी।
आयुक्त अभिषेक खन्ना के अनुसार शुक्रवार को बापू बाजार स्थित आनंद राम जी भगवान दास (अजंता पिक्चर हाउस) जिसका नगरीय विकास कर कुल 6,06,443/- बकाया था जिसे सीज किया गया। बी. एन. कॉलेज रोड, सेवाश्रम, स्थित गुडविल एंटरप्राइजेज की संपत्ति जिसका नगरीय विकास कर कुल 4,65,760/- रूपये बकाया था जिसे भी सीज किया गया। डोरे नगर, सेवाश्रम स्थित पॉपुलर गैस संपत्ति जिसका कुल 3,62,730 /- रुपया नगरीय विकास कर बकाया चल रहा था उसको भी सीज किया गया। प्रतापनगर मेन रोड स्थित अब्दुल रफीक, अब्दुल काशिफ (G.K. Disposal) जिसका कुल 1,72,269/- रुपया नगरीय विकास कर बकाया चल रहा था उसको भी सीज किया गया। सीज करने के पश्चात बी. एन. कॉलेज रोड, सेवाश्रम, स्थित गुडविल एंटरप्राइजेज की संपत्ति जिसका नगरीय विकास कर कुल 4,65,760/- रूपये बकाया था, ने निगम आकर अपनी राशि जमा करवाई।
यूडी टैक्स वसूली पर सवालः नगर निगम ऑनलाइन सूची कब करेगा सार्वजनिक? बिना टाइमलाइन और मापदंड बताए कार्रवाई, ‘पिक एंड चूज’ की धारणा क्यों गहराई

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