रिपोर्ट : जयवंत भैरविया
24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। आरटीआई को कई विभागों में मजाक समझा जाता है और आवेदकों को सूचनाओं के लिए तरसाते हुए उन्हें फुटबॉल बना कर रख दिया जाता है। एक महीने में सूचना सशुल्क देने का नियम है मगर खास तौर पर बिजली निगम के कार्यालयों में देखा जा रहा है कि आरटीआई के लोक सूचना अधिकारी सूचनाओं पर कुंडली मार कर बैठ जाते हैं। 30 दिन बार जब अपील हो जाती है तब सुध बंधती है और फिर पूरी की पूरी सूचना बिना शुल्क के देनी पड़ती है। इससे विभाग पर भार पड़ता है। आवेदक और निगम दोनों का टाइम खोटी होता है। इस पर नकेल के लिए अब उपर से अफसरों ने करंट वाली चिट्ठी चलाई है। इसमें उच्चाधिकारियों ने पाबंद किया है कि सूचना हर हाल में एक महीने में ही दे दी जाए। एक परिपत्र जारी किया गया है जिसमें बताया गया है कि श्रीमान् प्रबंध निदेशक एवीवीएनएल अजमेर के आदेश क्र. अविविनिलि/प्र.नि. / सचिव (प्रशा.) / कार्मिक/फ. 565/प्रे. 5765 दिनांक 14.02.2006 एवं आदेश क्र. अविविनिनि / प्र.नि. / सचिव (प्रशा.)/ प्रे. 3105 दिनांक 04.08.2011 व पश्चात् जारी आदेशों के द्वारा पदासीन लोक सूचना अधिकारी, सहायक लोक सूचना अधिकारीगण उक्त अधिनियम की धारा 6 (1) के अंतर्गत प्राप्त आवेदन पत्रों का निर्धारित समय-सीमा 30 दिन में निस्तारण किये जाने है। जबकि यह ध्यान में लाया गया है कि आवेदक द्वारा प्रथम अपील प्रस्तुत करने के पश्चात् निःशुल्क सूचना उपलब्ध करवाई जाती है जिस कारण निगम को आर्थिक हानि होती है एवं प्रथम अपील की सुनवाई में अधोहस्ताक्षरकर्ता के साथ-2 संबंधित अधिकारी/कर्मचारियों का समय बर्बाद होता है जिसका निगम के आवश्यक कार्यों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
अतः एतद् द्वारा सभी संबंधित लोक सूचना अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि सूचना का अधिकार अधिनियम-05 के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों का निस्तारण नियत समय-सीमा 30 दिन में निर्धारित शुल्क प्राप्त करते हुए करें। साथ ही अपील प्रकरणों में अधोहस्ताक्षकर्ता के समक्ष नियत सुनवाई दिनांक से 3 दिवस पूर्व जरिये ई-मेल द्वारा अपीलोत्तर प्रस्तुत करते हुए आप स्वयं लोक सूचना अधिकारी एवम् संबंधित सहायक लोक सूचना अधिकारी (सहायक अभियंता) ही सुनवाई शुरू होने के नियत समय से पूर्व अपीलोत्तर मय दस्तावेज के साथ प्रथम अपीलीय अधिकारी अर्थात् अधोहस्ताक्षरकर्ता के समक्ष आवश्यक रूप से उपस्थिति हो। किसी कारणो से लोक सूचना अधिकारी उपस्थित नही होते है तो उक्त स्थिति में सहायक लोक सूचना अधिकारी आवश्यकरूप से उपस्थित होकर निगम का पक्ष प्रस्तुत करेगे। उक्त निर्देशों की कठोरता से पालना की जावें। इस आदेश के बाद ग्राउंड जीरो पर हालात सुधरने की उम्मीद की जा रही है। हालांकि यह भी सच है कि कई बार अफसरों के कहने पर ही पूरा सिस्टम ही आरटीआई लगाने वालों के खिलाफ हो जाता है क्योंकि बड़ी पोल और घोटाले सामने आने का डर रहता है।
Discover more from 24 News Update
Subscribe to get the latest posts sent to your email.