वर्ष 2020 से अब तक 8.5 लाख पौधरोपण, जिनमें वित्त वर्ष 2026 में 1.14 लाख पौधे शामिल 24 News Update. उदयपुर, 26 सितंबर 2026। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक और प्रमुख चांदी उत्पादकों में से एक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने अब तक 1,105 हेक्टेयर भूमि का सफलतापूर्वक रिस्टोर किया है। यह क्षेत्रफल 1,500 से अधिक फुटबॉल मैदानों के बराबर है। यह उपलब्धि पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार खनन को साथ लेकर चलने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी खनन और परिचालन क्षेत्रों में भूमि सुधार, पौधरोपण, जैव विविधता संरक्षण और टिकाऊ भूमि उपयोग जैसी गतिविधियों के माध्यम से प्राकृतिक वातावरण को पुनर्जीवित कर रही है। यह प्रयास हिंदुस्तान जिंक के सस्टेनेबिलिटी गोल्स 2030 का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस उपलब्धि पर हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि, भविष्य का खनन केवल उत्पादन से नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन से भी पहचाना जाएगा। हिंदुस्तान जिंक में भूमि पुनर्वास, जल संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी हमारी कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा हैं। हमारा लक्ष्य विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को साथ लेकर आगे बढ़ना है। भूमि पुनर्वास के साथ-साथ हिंदुस्तान जिंक ने वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 तक 8.5 लाख पौधे लगाए हैं, जिनमें केवल वित्त वर्ष 2026 में 1.14 लाख पौधे लगाए गए। कंपनी ने राजपुरा दरीबा, चंदेरिया, देबारी और कायड़ में मियावाकी पद्धति से पौधरोपण किया है। वहीं ग्रीन जावर पहल के माध्यम से आसपास के समुदायों में हरित विकास और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। कंपनी ने टेरी के साथ साझेदारी कर चंदेरिया स्थित स्मेल्टर परिसर में 250 हेक्टेयर के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन परियोजना पर भी काम शुरू किया है। इसमें जारोफिक्स यार्ड का पुनर्वास और प्राकृतिक वन विकास शामिल है। जल संरक्षण के क्षेत्र में भी हिंदुस्तान जिंक लगातार प्रगति कर रहा है। कंपनी 3.32 गुना वॉटर पॉजिटिव संगठन के रूप में प्रमाणित है, जो पहले 2.41 गुना था। राजस्थान जैसे जल संकट वाले क्षेत्र में संचालन के बावजूद कंपनी अपनी कुल जल आवश्यकता का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रिसाइकल सीवेज जल से पूरा करती है। कंपनी सभी इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली का पालन करती है। सस्टेनेबिलिटी गोल्स 2030 के तहत हिंदुस्तान जिंक ने वर्ष 2020 के आधार स्तर की तुलना में शुद्ध जल की खपत में 50 प्रतिशत कमी लाने और स्मेल्टर संचालन के लिए 100 प्रतिशत निम्न गुणवत्ता वाले जल के उपयोग का लक्ष्य रखा है। कार्बन उत्सर्जन में कमी की दिशा में भी कंपनी तेजी से आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल ऊर्जा खपत में लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का रहा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 तक इसे 70 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए 530 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी एमओयू किया गया है। हिंदुस्तान जिंक ने वर्ष 2030 तक अपने स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 50 प्रतिशत तथा स्कोप-3 उत्सर्जन में 25 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी 2050 या उससे पहले नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने की दिशा में कार्य कर रही है। कंपनी ने हाल ही में एशिया का पहला लो-कार्बन जिंक इकोजेन भी लॉन्च किया है, जिसका कार्बन फुटप्रिंट वैश्विक औसत की तुलना में 75 प्रतिशत कम है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation एशिया पैसिफिक लैक्रोज ओलंपिक क्वालीफायर के लिए राजस्थान के खिलाड़ी आगरा रवाना, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने दी शुभकामनाएं देबारी-अंबेरी हाईवे पर भीषण हादसा: डिवाइडर से टकराकर रॉन्ग साइड पहुंची कार, सामने से आ रहे ट्रेलर में घुसी; दो मेडिकल स्टूडेंट्स की मौत