उदयपुर। बिजली कनेक्शन देने के नाम पर एवीवीएनएल का नया कारनामा काफी चर्चा में है। हाथीपोल स्थित अरवाना मॉल के बाहर टेलीफोन के खंभे पर मीटर लगाने के बाद अब विभागीय अफसरों की मॉल प्रशासन से मिलीभगत साफ दिखाई दे रही है। उपभोक्ता को यह जवाब दिया जा रहा है कि मीटर लगा दिया है, कनेक्शन आप खुद जोड़ लो। इस संबंध में एक बयान सामने आया है, जिसमें अधिकारी की ओर से कनेक्शन स्वयं जोड़ने की बात कही जा रही है। सवाल यह है कि कनेक्शन विभाग ने टेलीफोन के खंभे पर दे दिया है, उपभोक्ता के प्रतिष्ठान तक नहीं। मीटर व सर्विस लाइन खतरनाक हालात में चालू है और उपभोक्ता से कहा जा रहा है कि खुद सर्विस लाइन से तार जुड़वा ले। यह कानून व्यवस्था का मजाक है, पद का दुरूपयोग है सरकारी तंत्र की बेइज्जती है। जिले के आला अफसर शिकायत के बावजूद कुछ नहीं कर पा रहे हैं इससे साफ हो रहा है कि मिलीभगत उच्च स्तरीय है। या तो किसी नेता का प्रभाव काम कर रहा है या फिर कोई सिंडिकेट काम कर रहा है।मामला मदीना अली के स्वतंत्र बिजली कनेक्शन का हैं आरोप है कि करीब आठ महीने से स्वतंत्र कनेक्शन नहीं मिलने के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। मामला उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम तक पहुंचा और वैकल्पिक व्यवस्था से कनेक्शन देने के निर्देशों के बाद एवीवीएनएल की टीम मौके पर पहुंची। मॉल परिसर में दबाव—विरोध के चलते विभाग ने सड़क किनारे टेलीफोन के खंभे पर मीटर लगा कर अपनी कार्मिक अक्षमता और महामूर्खता परिचय दे दिया। इसके मायने ये हुए कि ये किसी भी उपभोक्ता के साथ कभी भी ऐसा तानाशाहीपूर्ण बर्ताव कर सकते हैं। ये कहीं भी मीटर लगा कर उपभोक्ता से कह देंगे कि आपका कनेक्शन हो गया। हो सकता है जिला कलेक्टर, विधायक और सांसद के साथ भी ऐसा ही हो जाए। सड़क किनारे इतने नीचे मीटर और सर्विस लाइन क्यों छोड़ी गई? कनेक्शन देना भी विभाग की जिम्मेदारी नहीं है क्या? सामने आए बयान में अधिकारी की ओर से कहा जा रहा है कि कनेक्शन खुद जोड़ लिया जाए। यहां सवाल तकनीकी सुरक्षा का भी है और जिम्मेदारी का भी। कनेक्शन में मीटर लगाने के बाद सर्विस लाइन को आगे घर या प्रतिष्ठान में आगे बढ़ाया जाता है। उपभोक्ता अपने स्तर पर यह काम करता है मगर अगर विभाग ही खुद षड़यंत्र करके खंभे पर मीटर लगा दे तो जिम्मेदारी किसकी। अधिकारी खुद भ्रष्टाचार करते दिखे तो उन पर कार्रवाई कौन करेगा।अधिकारी की ओर से यह भी कहा गया कि कनेक्शन नहीं जोड़ा गया है तो कोर्ट में लिखकर दे दीजिए। ये तो सरासर कोर्ट के आदेशों की भी मनमानी व्याख्या करने जैसी बात हो रही है। कोर्ट को लिखकर उपभोक्ता को नहीं, विभाग को देना है। मीटर विभाग ने सही जगह नहीं लगाया है। इसमें उपभोक्ता की क्या गलती है। कामचोरी और सीनाजोरी का नया फॉर्मूला? इस मामले में एवीवीएनएल के नाकारा अफसरों की कामचोरी व सीनाजोरी दिख रही है। मदीना अली का कहना है कि उन्होंने स्वतंत्र कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। कनेक्शन स्वतंत्र रूप से उनके नाम पर दिया जा रहा है तो सवाल यह भी है कि कनेक्शन को सुरक्षित तरीके से दुकान तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उपभोक्ता पर क्यों। मॉल मालिक ने परिसर में काम करने की अनुमति नहीं दी तो विभाग ने बाहर खंभे पर मीटर लगा दिया—लेकिन उसके बाद सुरक्षित सर्विस लाइन की व्यवस्था कौन करेगा?? सबसे गंभीर बात यह कि जिस खंभे पर मीटर लगाया गया है, वहां सर्विस लाइन को लपेटकर छोड़ दिया गया है। आम राहगीरों की पहुंच से बहुत नीचे है। अगर किसी बच्चे, राहगीर या कर्मचारी ने अनजाने में इसे छू लिया और कोई भयंकर हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी? उपभोक्ता की या कामचोर अफसरों की जिन्होंने सार्वजनिक स्थान पर विद्युत व्यवस्था स्थापित की है? अब इस मामले में कलेक्टर साहब, विधायक जी और सांसद जी—सवाल आपके सामने है। अगर आम उपभोक्ता को बिजली का कनेक्शन इस तरह दिया जा सकता है कि मीटर खंभे पर बांधो, करंट छोड़ो और कह दो कि आगे की लाइन खुद जोड़ लेना, तो क्या यही व्यवस्था सरकारी अफसरों और रसूखदारों के घरों पर भी लागू होगी? या आम आदमी के हिस्से में ही ऐसे प्रयोग किए जाते रहेंगे? एवीवीएनएल को स्पष्ट करना चाहिए कि किस नियम के तहत उपभोक्ता को स्वयं कनेक्शन जोड़ने के लिए कहा गया? अगर यह गलत है तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation पंडित दीनदयाल उपाध्याय को भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया नमन, उपमहापौर दिनेश भट्ट बोले—अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना था उनका लक्ष्य 72 घंटे में पेयजल आपूर्ति के फैसले पर कांग्रेस का विरोध, कलेक्टर को ज्ञापन; 24 घंटे नियमित जलापूर्ति की मांग, फतह सिंह राठौड़ बोले-जनता को तीन दिन इंतजार करवाना स्वीकार नहीं