24 न्यूज अपडेट भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में सूदखोरों की प्रताड़ना से परेशान होकर एक पूर्व भाजपा नेता लादूलाल तेली ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने 24 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन लिखकर एसडीएम को सौंपा और उसी शाम गांव के मंदिर में जाकर कीटनाशक पी लिया। परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर गए, लेकिन 27 मई की रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने 8 जून को जब लादूलाल का कमरा खंगाला तो वहां से एक सुसाइड नोट मिला। इसमें लादूलाल ने ब्याज पर ब्याज वसूलने वाले सूदखोरों के नाम और उनसे लेनदेन का पूरा ब्यौरा लिखा था। इसके बाद 14 जून को परिजनों ने आसींद थाने में मामला दर्ज करवाया।
लादूलाल तेली 1995 से 1998 तक भाजपा इकाई अध्यक्ष और 1998 से 2005 तक ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष रह चुके थे। सुसाइड नोट और प्रधानमंत्री को लिखे ज्ञापन में लादूलाल ने बताया कि उन्होंने 50 लाख रुपए उधार लिए थे, जिसके एवज में वह अब तक 3 करोड़ रुपए चुका चुके थे। इसके बावजूद सूदखोर ब्याज पर ब्याज वसूलते रहे और उनकी प्रॉपर्टी, स्टांप पेपर और साइन किए चेक तक हड़प लिए।
ज्ञापन में लादूलाल ने लिखा कृ “हर किसी ने मुझे धोखा दिया। मैं 50 लाख के बदले 3 करोड़ चुका चुका हूं। फिर भी स्टांप, चेक और दस्तावेज लौटाने के बजाय जान से मारने की धमकी दी जा रही है।“ उन्होंने चांदमल और उसके बेटों पर 50 लाख उधार देने के बदले 3 करोड़ वसूलने और फिर भी स्टांप-चेक नहीं लौटाने का आरोप लगाया।
इसी तरह देवीलाल मेवाड़ा से 6 लाख रुपए उधार लेकर 30 लाख चुकाने और ताराचंद मेवाड़ा से 8 लाख लेकर 20 लाख चुकाने के बाद भी दस्तावेज न लौटाने का जिक्र किया। साथ ही धापू देवी पर 2 लाख के बदले 15 लाख वसूलने और खाली चेक में 10 लाख भरकर बैंक में लगाने का भी आरोप लगाया।
लादूलाल ने हरिशंकर शर्मा नामक अपने फैक्ट्री पार्टनर पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने दो मकान और 4 बीघा जमीन अपने नाम रजिस्ट्री कराने के बाद प्रॉपर्टी हड़प ली और 22 लाख की डिमांड भी कर डाली। उन्होंने बताया कि 10 अन्य सरकारी टीचर्स से भी 50 लाख रुपए उधार लिए थे, जिसके बदले 3 करोड़ रुपए चुका चुके, लेकिन अब भी सूदखोर अवैध वसूली कर रहे हैं।
लादूलाल के बेटे कन्हैयालाल ने कहा कि पिताजी कई दिनों से परेशान थे। उन्होंने सूदखोरों की शिकायतें प्रशासन से की थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 24 मई को ज्ञापन देने के बाद मंदिर में जाकर जहर पी लिया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। 8 जून को जब पिताजी के कमरे में दस्तावेज देखे तो सुसाइड नोट मिला, जिसमें सभी सूदखोरों के नाम लिखे थे।
14 जून को इस आधार पर आसींद थाने में मामला दर्ज हुआ। लेकिन तीसरे दिन तक भी पुलिस कोई गिरफ्तारी या ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है। परिजनों ने पुलिस प्रशासन से आरोपियों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग की है। भीलवाड़ा की यह घटना राजस्थान में बढ़ती सूदखोरी की समस्या को उजागर करती है। यह मामला बताता है कि ब्याज पर ब्याज वसूलने वाले किस तरह आम आदमी से लेकर राजनीतिक लोगों तक को आत्महत्या के लिए मजबूर कर रहे हैं।
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