उदयपुर। बुझड़ा के रिसॉर्ट में खरीदे गए 20 कॉटेज अब राजस्थान के वरिष्ठ नौकरशाह शिखर अग्रवाल और उनके परिवार से जुड़े संपत्ति प्रकरण का ऐसा अहम हिस्सा बन गए हैं, जिस पर उठे सवाल प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से होते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गए हैं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। पत्र में केवल संपत्ति खरीद का हिसाब मांगने की बात नहीं है, बल्कि धन के स्रोत, खरीद के बाद उसी कंपनी को संपत्तियां लीज पर देने की व्यवस्था, संभावित हितों के टकराव और संबंधित अधिकारी के प्रशासनिक कार्यकाल में लिए गए फैसलों की जांच का आग्रह भी किया गया है।

40 विला-कॉटेज के सौदे में 20 कॉटेज उदयपुर जिले के बुझड़ा क्षेत्र में स्थित हैं। शेष 20 विला अलवर जिले के अजबगढ़ में हैं। शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस अधिकारी पत्नी प्रशाखा माथुर, उनके दोनों पुत्रों और सास-ससुर के नाम पर एक ही निजी कंपनी से लगभग ढाई वर्ष के दौरान ये संपत्तियां खरीदी गईं। कुल खरीद मूल्य करीब 6.15 करोड़ रुपये और इन्हें वापस उसी कंपनी को लीज पर देने से लगभग 1.80 करोड़ रुपये सालाना मिलने की बात कही गई है।

हनुमान बेनीवाल ने शिखर अग्रवाल, पत्नी, बेटों और ससुराल पक्ष की संपत्तियों के लेनदेन की जांच सीबीआई से कराने की मांग की

उदयपुर। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल, उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर, उनके दोनों बेटों और ससुराल पक्ष के सदस्यों की संपत्तियों की खरीद, वित्तीय लेनदेन और संबंधित प्रशासनिक निर्णयों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। पत्र में उदयपुर के बुझाड़ा स्थित 20 कॉटेज और अलवर के अजाबगढ़ स्थित 20 विला की खरीद का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।

बेनीवाल ने पत्र में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों ने करीब ढाई साल के दौरान एक ही निजी कंपनी से 40 संपत्तियां खरीदीं। इन संपत्तियों की कुल खरीद कीमत करीब 6.15 करोड़ रुपए बताई गई है। इनमें बुझाड़ा, उदयपुर के 20 कॉटेज और अजाबगढ़, अलवर के 20 विला शामिल हैं। पत्र के अनुसार, इन संपत्तियों को खरीदने के बाद उसी कंपनी को करीब 1.80 करोड़ रुपए सालाना की दर से लीज पर दिए जाने की बात सामने आई है।

सांसद ने इस पूरे लेनदेन की जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया, भुगतान किस माध्यम से हुआ, खरीद के लिए किसी प्रकार का ऋण लिया गया या नहीं और संपत्तियों को लीज पर देने की शर्तें क्या थीं, इन सभी पहलुओं की पड़ताल होनी चाहिए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों के वास्तविक लाभार्थी कौन हैं।

एपीओ करना पर्याप्त नहीं, स्वतंत्र जांच हो

पत्र में बेनीवाल ने कहा है कि शिखर अग्रवाल को राजस्थान सरकार द्वारा एपीओ किए जाने से मामले की जांच की आवश्यकता समाप्त नहीं होती। उन्होंने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार से अनुशंसा करवाकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से प्रारंभिक जांच कराई जाए। जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर पद या प्रभाव के कारण तथ्य सामने आने में बाधा न हो।

बेनीवाल ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) से भी अधिकारी की सेवा संबंधी जानकारी, संपत्ति घोषणाओं और प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा कराने की मांग की है। आयकर विभाग तथा बेनामी संपत्ति से संबंधित सक्षम प्राधिकारियों से भी संपत्तियों के स्रोत, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और वास्तविक स्वामित्व की जांच कराने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री कार्यालय और विभागीय फैसलों की जांच की मांग

पत्र में शिखर अग्रवाल के मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्य करने का उल्लेख करते हुए उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए प्रशासनिक निर्णयों की जांच की मांग की गई है। बेनीवाल ने कहा है कि जांच का दायरा मुख्यमंत्री कार्यालय तक सीमित न रहकर उद्योग विभाग, रीको और निवेश प्रोत्साहन से जुड़े विभागों में लिए गए निर्णयों तक बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग की है कि संबंधित निजी कंपनी को किसी सरकारी योजना, प्रशासनिक निर्णय, निवेश प्रोत्साहन या अन्य सरकारी प्रक्रिया के तहत विशेष लाभ दिए जाने की स्थिति में उसकी जांच की जाए। यह पता लगाया जाए कि कहीं किसी निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने या प्रशासनिक संरक्षण देने के लिए पद का दुरुपयोग तो नहीं किया गया।

बुझाड़ा के कॉटेज और भूमि संबंधी रिकॉर्ड खंगालने की मांग

उदयपुर के बुझाड़ा स्थित 20 कॉटेज के संदर्भ में सांसद ने संपत्तियों की रजिस्ट्री, खरीद के दस्तावेज, भुगतान के रिकॉर्ड, लीज समझौतों और संबंधित वित्तीय विवरणों की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि संपत्तियों से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच के दौरान दस्तावेजों में बदलाव या उनके नष्ट होने की आशंका नहीं रहे।

पत्र में शिखर अग्रवाल के उदयपुर कलेक्टर रहते हुए लिए गए प्रशासनिक निर्णयों की भी समीक्षा कराने की मांग की गई है। इसमें भूमि उपयोग परिवर्तन, पर्यटन इकाइयों से जुड़े निर्णयों, भूमि आवंटन, लाइसेंस, अनुमतियों और सरकारी रियायतों से संबंधित मामलों की जांच शामिल है। बेनीवाल ने इन निर्णयों और संबंधित संपत्तियों या कंपनियों के बीच किसी संभावित संबंध की तथ्यात्मक पड़ताल कराने की मांग की है।

आयकर और बेनामी लेनदेन के पहलुओं की जांच हो

बेनीवाल ने पत्र में संपत्तियों की खरीद में प्रयुक्त धन के स्रोत, संबंधित व्यक्तियों के बैंक खातों, आयकर रिटर्न, ऋण और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां खरीदे जाने की स्थिति में उनके वास्तविक लाभार्थियों की पहचान की जाए और यह जांचा जाए कि संपत्तियों के स्वामित्व तथा उनसे प्राप्त होने वाली लीज राशि का वास्तविक नियंत्रण किसके पास है।

पत्र के अनुसार, जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि संपत्तियों की खरीद कीमत और उनसे प्राप्त होने वाली लीज राशि के बीच क्या संबंध है तथा संबंधित समझौतों की शर्तें सामान्य व्यावसायिक परिस्थितियों के अनुरूप थीं या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, बेनामी लेनदेन या पद के दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए।

अन्य मामलों का भी पत्र में उल्लेख

बेनीवाल ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से जुड़े कथित कमीशन के आरोपों और इस संबंध में सामने आए वीडियो का भी उल्लेख किया है। पत्र में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ से जुड़ी सार्वजनिक चर्चाओं तथा मुख्यमंत्री के रिश्तेदार पर जमीन पर अवैध कब्जे के आरोपों का भी जिक्र किया गया है। सांसद ने इन मामलों में भी तथ्यों के आधार पर जांच और उचित कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए और जांच के दायरे में संबंधित वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, सरकारी निर्णयों और संभावित प्रशासनिक अनियमितताओं को शामिल किया जाए। बेनीवाल ने कहा है कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।


Discover more from 24 News Update

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Discover more from 24 News Update

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading