जयपुर, 31 अक्टूबर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिखर अग्रवाल से जुड़े विला खरीद प्रकरण को लेकर राज्य सरकार पर एक बार फिर से तीखा हमला बोला। शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने विला की कीमतों, कथित रियायतों और एसीबी की कार्रवाई पर सवाल उठाए। गहलोत ने कहा कि जब मुख्यमंत्री पत्रकारों को 75 लाख रुपए में फ्लैट देने की बात करते हैं, तो शिखर अग्रवाल के मामले में 15 लाख रुपए में विला देने की चर्चा क्यों हो रही है? सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। गहलोत ने कहा कि प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। केवल अधिकारी को एपीओ करना और एसीबी में प्रारंभिक जांच दर्ज कर लेना किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और यदि एफआईआर दर्ज करने तथा विस्तृत जांच की जरूरत है, तो उसमें देरी नहीं होनी चाहिए।‘एक करोड़ के विला 15 लाख में मिल रहे हैं तो हमें भी दिलवा दीजिए’गहलोत ने विला की कीमतों को लेकर तंज कसते हुए कहा कि यदि एक करोड़ रुपए कीमत वाले विला 15 लाख रुपए में उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है, तो उनके कुछ लोगों को भी ऐसी संपत्ति दिलवाई जाए। उन्होंने कथित सौदे की शर्तों पर सवाल उठाते हुए कहा कि संपत्ति खरीदने के बाद उसे फिर लीज पर देकर पैसा वसूलने जैसी व्यवस्था आम लोगों को भी मिले, तो इससे कई लोगों को फायदा हो सकता है। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी योजना केवल शिखर अग्रवाल के लिए बनाई गई थी? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में मुख्यमंत्री की भूमिका और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि शिखर अग्रवाल मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारियों में शामिल रहे हैं और इस पूरे प्रकरण के तथ्यों को स्पष्ट करने की जिम्मेदारी सरकार की है। गहलोत ने कहा कि घटना के समय मौजूद लोगों को सामने आकर वास्तविक स्थिति बतानी चाहिए।‘ACB पर दबाव, निष्पक्ष जांच जरूरी’गहलोत ने एसीबी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव में काम करने की आशंका से जनता का भरोसा प्रभावित होता है। महेश जोशी से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि वहां जांच अधिकारी ने गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त आधार नहीं होने की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद दबाव में कार्रवाई हुई। गहलोत ने एसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों को दबाव से मुक्त होकर कानून के अनुसार काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों। लेकिन यदि कोई निर्दोष है, तो उसे दबाव में फंसाया जाना भी उतना ही गलत है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे आईपीएस की शपथ के अनुरूप निष्पक्षता से काम करें। गहलोत ने कहा कि उनकी मांग किसी को बचाने की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की है। यदि भ्रष्टाचार साबित होता है, तो दोषियों को अधिकतम सजा मिलनी चाहिए। वहीं, जांच में दबाव या पक्षपात की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation प्लेसमेंट हुआ, जिंदगी की नई शुरुआत से पहले मौत की छलांग: पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में MBA छात्रा की छठी मंजिल से गिरने से मौत