24 न्यूज अपडेट उदयपुर। फिल्म ‘दृश्यम’ और ‘क्राइम पेट्रोल’ से प्रभावित होकर एक दिल दहला देने वाली योजना रचते हुए वृद्ध महिला की हत्या, लूट और शव को जलाकर टुकड़े-टुकड़े कर बहा देने के सनसनीखेज मामले का उदयपुर पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने बताया कि हत्या न केवल सुनियोजित थी,, बल्कि अभियुक्त ने डिजिटल साक्ष्य मिटाकर पुलिस को गुमराह करने का भी प्रयास किया, परंतु फॉरेंसिक और तकनीकी दक्षता के आगे अपराधी की सारी चालाकियो का पर्दाफाश होने में देर नहीं लगी। गुमशुदगी से शुरू हुआ मामला, हत्या तक पहुँचाप्रकरण की शुरुआत 23 फरवरी 2025 को हुई, जब श्री सुन्दरलाल पुत्र नारूलाल भाण्ड, निवासी कुरज, थाना कुंवारिया (राजसमंद) ने अपनी 70 वर्षीय मासी श्रीमती चांदी बाई पत्नी स्व. पृथ्वीराज ढोली, निवासी पीपली चौक, फतहनगर की गुमशुदगी की रिपोर्ट फतहनगर थाने में दर्ज करवाई। दो माह बाद 22 अप्रैल को सहायक पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार (आईपीएस), वृत्त मावली द्वारा शंका के आधार पर मामला दर्ज कर खुद अनुसंधान अपने हाथ में लिया गया। ढोल बजाने वाली चांदी बाई के गहनों पर थी नज़रअनुसंधान में खुलासा हुआ कि चांदी बाई पेशे से ढोल बजाने का काम करती थी। 9 जनवरी को आरोपी रमेश पुत्र स्व. फुलचंद लौहार (32 वर्ष) निवासी चंगेड़ी रोड, फतहनगर के घर आयोजित बारहवें के कार्यक्रम में चांदी बाई गहने पहनकर ढोल बजाने आई थी, तभी आरोपी ने उसके गहनों पर निगाह डाली और हत्या की योजना बनाई। 22 फरवरी को आरोपी ने फर्जी रातीजगे की बात कहकर चांदी बाई को अपनी सिल्वर रंग की मारुति ओमनी वैन में बैठाया और चार घंटे तक अंधेरे होने का इंतजार करता रहा। उसने अपना मोबाइल बार-बार बंद किया ताकि लोकेशन ट्रेस न हो। हत्या, लूट और शव जलाने की ‘दृश्यम’ फिल्म जैसी योजनारात में अंधेरे में लोहे के पाने से चांदी बाई के सिर पर वार कर हत्या कर दी, गहने लूट लिए। मोबाइल और अन्य सामान फेंक दिया। शव को फतहनगर डंपिंग यार्ड के कचरे में डालकर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाई लगा दी। जलने के बाद शव के अवशेष जैसे हड्डियाँ, दांत, दाढ़ को इकट्ठा करके घोसुण्डा बांध में फेंक दिया गया। सोना गला दिया, चांदी गहने सुनार से बदलवा दिएसोने की टोकरियां आरोपी ने उदयपुर की दुकान में बेची और नए गहने खरीदे। दुकान की पुष्टि कर उनसे पूछताछ की गई। चार सोने के मादलिये गैसगन से गला दिए गए, वह गला हुआ सोना जब्त किया गया। एक चांदी का पायजेब बरामद हुआ, शेष गहने सुनार से बदले गए थे। घटना में प्रयुक्त वैन, लोहे का पाना, गैसगन, मृतका का थैला, ओढ़नी, भामाशाह कार्ड, बीपी की गोली, कंघा आदि जब्त किए गए। मोबाइल और इंटरनेट हिस्ट्री से अपराधी की मानसिकता उजागरपुलिस को आरोपी रमेश के मोबाइल से यू ट्यूब व गूगल क्रॉम की हिस्ट्री में ‘दृश्यम फिल्म सच्ची घटना है या नहीं?’, ‘पुलिस अपराधियों को कैसे पकड़ती है?’ जैसे सर्च मिले। आरोपी की पत्नी ने बताया कि वह देर रात तक ‘दृश्यम’ और ‘क्राइम पेट्रोल’ देखता रहता था। पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी नाकामफिल्म की तर्ज पर आरोपी ने जानवरों की हड्डियों को पुलिस के सामने फेंका ताकि डीएनए मेल न खाए, लेकिन पुलिस ने वैज्ञानिक पद्धति से डंपिंग यार्ड से बरामद मानव कपाल व हड्डियों और मृतका के बाल का डीएनए मिलान कराया, जो मेल खा गया। इससे साबित हो गया कि हत्या चांदी बाई की ही हुई थी। अभियुक्त रमेश लौहार के विरुद्ध पूर्व में बलात्कार का एक प्रकरण थाना फतहनगर में दर्ज है, जो न्यायालय में विचाराधीन है।बाल से किया डीएनए का मिलानअभियुक्त का उसकी वैन गाडी में मृतका को बैठा कर ले जाने के स्थान से लेकर जहाँ-जहाँ मृतका को लेकर गया, रास्ते में रुका, किस स्थान पर मृतका के साथ घटना कारित की एवं घटना कारित करने के बाद मृतका को डंपिंग यार्ड फतहनगर में लेकर आने के स्थान का रुट देखा जाकर जीपीएस रुट मैप तैयार किया गया तो पाया गया कि अभियुक्त ने मृतका को जिन्दा व मुर्दा करीब चार घण्टे तक अपनी मारुती वैन रखा गया है। मृतका चांदी बाई के मकान की मृतका की गोदपुत्री श्रीमति मन्जू की उपस्थिति में मृतका के मकान से विवाद रहित मृतका के बाल डीएनए जॉच हेतु जब्त किये गये। मृतका चांदी बाई के बाल व डंपिंग यार्ड से जब्त मानव कपाल की हड्डीयों का डीएनए मिलान हो गया। जिससे यह पक्का हो गया की कपाल चांदी बाई का ही था। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation युवतियों के लिए उद्यमिता कौशल विकास हेतु तीन दिवसीय फल-सब्ज़ी प्रसंस्करण प्रशिक्षण का समापन विद्यापीठ में महाराणा प्रताप की 485वीं जयंती की पूर्व संध्या पर पुष्पांजलि और संगोष्ठी: ‘प्रताप’ बने राष्ट्रीय चेतना व मानवाधिकारों के प्रतीक