नई दिल्ली। भारत की पहली बुलेट ट्रेन के स्वदेशी निर्माण की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु स्थित ‘आदित्य’ (ADITYA) निर्माण इकाई का दौरा कर भारत में तैयार की जा रही बुलेट ट्रेन B28 के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान रेल मंत्री ने हाई-स्पीड ट्रेन की कारबॉडी तैयार करने के लिए विकसित विशेष निर्माण व्यवस्था को देखा। इसमें सटीक इंजीनियरिंग वाले जिग्स और फिक्स्चर शामिल हैं, जिनकी मदद से कारबॉडी के विभिन्न हिस्सों को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया जाता है। उन्होंने ट्रेन निर्माण के अलग-अलग चरणों का भी निरीक्षण किया। इनमें अंडरफ्रेम, साइडवॉल, रूफ असेंबली, कार असेंबली, सतह की तैयारी और ट्रीटमेंट जैसे काम शामिल हैं। हाई-स्पीड रेल के लिए कारबॉडी की मजबूती और निर्माण में सटीकता महत्वपूर्ण होने के कारण इन प्रक्रियाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ‘स्क्वीज टेस्ट’ से परखी कारबॉडी की मजबूती रेल मंत्री ने कारबॉडी पर किए जाने वाले ‘स्क्वीज टेस्ट’ की प्रक्रिया भी देखी। इस परीक्षण में कारबॉडी पर नियंत्रित दबाव और बल डालकर उसकी संरचनात्मक मजबूती, कठोरता और आकार की स्थिरता की जांच की जाती है। हाई-स्पीड परिचालन के लिहाज से यह गुणवत्ता परीक्षण महत्वपूर्ण माना जाता है। निरीक्षण के दौरान यात्रियों के लिए लगाई जाने वाली सीटों की व्यवस्था भी देखी गई। खास तौर पर तेज रफ्तार यात्रा के दौरान यात्रियों को मिलने वाले आराम और सुविधा से जुड़े पहलुओं का जायजा लिया गया। इसके अलावा हीटिंग, वेंटिलेशन एवं एयर कंडीशनिंग (HVAC) सिस्टम, कपलर और ट्रेन के अन्य उपकरणों व असेंबलियों की भी समीक्षा की गई। रेल मंत्री ने साइड मॉड्यूल और रूफ मॉड्यूल के निर्माण के बाद होने वाली इंटीग्रेशन और असेंबली प्रक्रिया को भी देखा। बेंगलुरु की निर्माण इकाई में चल रहा यह काम भारत में हाई-स्पीड ट्रेन के निर्माण की क्षमता विकसित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। भारत में तैयार की जा रही इस बुलेट ट्रेन की अधिकतम परीक्षण गति 280 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है, जबकि परिचालन गति 249 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। करीब 202 मीटर लंबी ट्रेन में कुल आठ कोच होंगे। इनमें चार मोटर कार और चार ट्रेलर कार शामिल हैं। ट्रेन में करीब 557 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। दिव्यांगजन या कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए भी सीट और सुविधाएं निर्धारित की गई हैं। 7 स्टैंडर्ड और एक एग्जीक्यूटिव कोच ट्रेन के आठ कोच में सात स्टैंडर्ड क्लास और एक एग्जीक्यूटिव क्लास का होगा। स्टैंडर्ड क्लास में 3×2 सीटिंग और एग्जीक्यूटिव क्लास में 2×2 सीटिंग व्यवस्था होगी। दोनों सिरों पर ड्राइवर कैब बनाई गई है, जिसमें इंटेलिजेंट ऑन-बोर्ड कंट्रोल सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम ट्रेन संचालन के दौरान त्वरित निर्णय और ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर के साथ समन्वय में मदद करेगा। भविष्य में जरूरत बढ़ने पर दो आठ-कोच वाली ट्रेनों को जोड़कर 16 कोच की ट्रेन के रूप में भी चलाया जा सकेगा। हर सीट तक बड़ी खिड़की, सामान के लिए अलग जगह ट्रेन के इंटीरियर को भारतीय यात्रियों की शारीरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सीटों में पर्याप्त लेगरूम होगा। हर सीट रो के सामने चौड़ी खिड़कियां होंगी। यात्रियों के मोबाइल और लैपटॉप के लिए पावर आउटलेट, ऊपर सामान रखने के रैक और बड़े सामान के लिए अलग फ्लोर-माउंटेड लगेज स्टैंड दिए जाएंगे। ट्रेन में आधुनिक बायो-डाइजेस्टर टॉयलेट होंगे। कोचों के बीच आवाजाही के लिए सीलबंद सिंगल-पीस गैंगवे बनाया गया है, जिससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच तक आसानी से जा सकेंगे। हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में मिलेगी जानकारी यात्रियों को यात्रा के दौरान ट्रेन के अंदर लगे एलसीडी डिस्प्ले के माध्यम से अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी दी जाएगी। पब्लिक एड्रेस और ऑटोमेटिक अनाउंसमेंट सिस्टम से ऑडियो सूचना भी उपलब्ध होगी। आपात स्थिति में यात्री ट्रेन के कर्मचारियों से सीधे संपर्क कर सकें, इसके लिए पैसेंजर केबिन और वेस्टिब्यूल में इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट लगाई गई हैं। इसके अलावा वाई-फाई आधारित पैसेंजर इन्फोटेनमेंट सिस्टम भी होगा, जिसके जरिए यात्री ट्रेन में पहले से उपलब्ध मनोरंजन सामग्री देख सकेंगे। व्हीलचेयर से आवाजाही आसान, ब्रेल साइनेज भी ट्रेन में दिव्यांगजन और कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सुविधाओं को डिजाइन का हिस्सा बनाया गया है। ट्रेन का फर्श प्लेटफॉर्म की ऊंचाई के अनुरूप रखा गया है, ताकि लेवल बोर्डिंग हो सके। दरवाजों में रिट्रैक्टेबल फुटस्टेप दिए गए हैं, जिससे ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच का क्षैतिज अंतर कम किया जा सके। व्हीलचेयर की आवाजाही के अनुकूल दरवाजे, दिव्यांगजन के लिए सीट और टॉयलेट तथा ब्रेल आधारित सूचना संकेतक भी ट्रेन में उपलब्ध होंगे। हर मौसम में आरामदायक तापमान यात्रियों के आराम के लिए ट्रेन में अत्याधुनिक HVAC सिस्टम लगाया गया है। यह कोच के अंदर तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित रखेगा। प्रत्येक कोच में दो HVAC यूनिट होंगी। शोर कम करने के लिए कारबॉडी और फ्लोर स्ट्रक्चर में साउंड इंसुलेशन, नॉइज-डैंपिंग कोटिंग, स्कर्ट, बोगी कवर और फेयरिंग जैसे उपाय किए गए हैं। इसका उद्देश्य तेज गति के बावजूद यात्रा को अपेक्षाकृत शांत और सुगम बनाना है। 25 केवी एसी से चलेगी ट्रेन, ब्रेकिंग में ऊर्जा भी बचाएगी बुलेट ट्रेन 25 केवी, 50 हर्ट्ज सिंगल-फेज एसी ट्रैक्शन सिस्टम पर चलेगी। इसके लिए हैवी कंपाउंड कैटेनरी के जरिए बिजली की आपूर्ति होगी। ट्रेन में रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम दिया गया है, जो ब्रेक लगाने के दौरान ऊर्जा को रिकवर कर ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा। ट्रेन के बाहरी डिजाइन को भी हाई-स्पीड संचालन के अनुरूप तैयार किया गया है। इसके नोज और कारबॉडी प्रोफाइल को कम्प्यूटेशनल फ्लूड डायनेमिक्स (CFD) सिमुलेशन के जरिए विकसित किया गया है। इससे हवा के प्रतिरोध को कम करने, सुरंगों में दबाव की तरंगों और सोनिक बूम के प्रभाव को घटाने तथा हवा के दबाव से पैदा होने वाली अशांति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। रूफ पैनल, HVAC का रूफटॉप प्रोफाइल और एयरफ्लो डिफ्लेक्टर भी इसी एयरोडायनामिक डिजाइन का हिस्सा हैं। सीलबंद कारबॉडी और बाहरी विंड-गाइडिंग प्रोफाइल हाई-स्पीड दौड़ के दौरान दबाव के अंतर को नियंत्रित कर यात्रियों के आराम में मदद करेंगे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. 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