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एक्सक्लूसिव : MLSU में हाट टॉक के बाद रजिस्ट्रार ने लिखा- मेरे साथ अनहोनी होती है तो डॉ. विनीत सोनी जिम्मेदार……..सह-आचार्य नियुक्ति पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र विवाद गहराया

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24 News update उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर वैसे तो शैक्षणिक कामों व उपलब्धियों से ज्यादा विवादो ंकी वजह से चर्चित रहा है मगर इस बार मामला कर्मचारियों की हड़ताल, वीसी के घर पर गैर कानूनी रूप से एसएफएबी कर्मचारियों से काम लेने, कथित अभद्रता करने आदि का नहीं, बल्कि रजिस्ट्रार साहब और एक सह आचार्य साहब की हॉट टॉक का है जिसमें एफआईआर करवाने की नौबत आ रही है। इसके कई दिनों से चर्चे दबी जुबां में हो रहे हैं। आज 24 न्यूज अपडेट की पहड़ताल में कई तथ्य सामने आए। पता चला कि सह-आचार्य पद पर हुई एक नियुक्ति को लेकर उठे सवाल अब गंभीर विवाद का रूप ले चुके हैं। स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की हालिया रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के बोटनी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनीत सोनी की पदोन्नति प्रक्रिया को संदेहास्पद बताया गया है। इसी को लेकर वे एक अन्य के साथ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. वी.सी. गर्ग से मिलने गए व इस दौरान हॉट टॉक ऐसी हुई कि सोनी के खिलाफ गर्ग साहब ने प्रतापनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराने चिट्ठी लिख थी। पुलिस हर बार की तरह सइ मामले को जांच में रखे हुए है व मामला ठंडा होने का इंतजार कर रही है। जिस प्रकार से वीसी के घर पर काम करने वाली दो महिलाओं के परिवाद के मामले में उसने किया है।
बताया गया कि अंकेक्षण विभाग की रिपोर्ट, जो 24 मई 2025 को जारी की गई थी, में कहा गया है कि डॉ. सोनी को 22 फरवरी 2012 को सहायक आचार्य और 29 मई 2018 को सह-आचार्य के पद पर पदोन्नति दी गई। इस प्रक्रिया में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से प्राप्त उनके अनुभव प्रमाण पत्र को आधार बनाया गया था, जिसमें 1 मई 2008 से 15 फरवरी 2012 तक सहायक आचार्य पद पर कार्य का अनुभव दर्शाया गया। जांच के दौरान यह प्रमाण पत्र संदिग्ध पाया गया क्योंकि उस पर कोई डिस्पैच नंबर नहीं था और 24 दिसंबर 2012 को एक ही तारीख में दो अलग-अलग अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए जिनमें विश्वविद्यालय के फैक्स नंबर भिन्न पाए गए। यही नहीं, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव द्वारा जारी नियुक्ति पत्र में उनकी नियुक्ति को संविदात्मक बताया गया है, जबकि यूजीसी नियमों के अनुसार सह-आचार्य पद पर पदोन्नति के लिए कम से कम आठ वर्ष का नियमित और पूर्णकालिक शिक्षण अनुभव आवश्यक है। अंकेक्षण विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आठ वर्ष का अनुभव पूरा किए बिना ही डॉ. सोनी को पदोन्नति क्यों दी गई।
इसी बीच यह मामला तब और तूल पकड़ गया जब 19 अगस्त 2025 की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे रजिस्ट्रार डॉ. वी.सी. गर्ग ने आरोप लगाया कि डॉ. विनीत सोनी अपने सहयोगी गणित विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजीत कुमार भाभोर के साथ उनके कक्ष में आए और ऑडिट आपत्ति पर अपने पक्ष में जवाब भेजने के लिए दबाव बनाने लगे। रजिस्ट्रार के अनुसार उन्होंने समझाने का प्रयास किया, लेकिन डॉ. सोनी अचानक ऊँची आवाज़ में चिल्लाने लगे और उन पर दुर्भावनापूर्ण तरीके से ऑडिट पैरा उठाने का आरोप लगाया। यह पूरा घटनाक्रम प्रबंधन अध्ययन संकाय की निदेशक प्रोफेसर मीरा माथुर की मौजूदगी में हुआ।
रजिस्ट्रार ने इस घटना को गंभीर मानते हुए पत्र में कहा है कि वे इससे भयभीत हैं और यदि उनके साथ कोई अनहोनी घटित होती है तो इसके लिए डॉ. विनीत सोनी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने पुलिस से डॉ. सोनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की और इसकी प्रतिलिपि उच्च शिक्षा विभाग, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी है। इस मामले में फिलहाल किसी कार्रवाई की कोई खबर नहीं मिली है। मगर चर्चा का बाजार जरूर गर्म है कि आखिर ऐसी हॉट टॉक की नौबत ही क्यों आ गई। यदि वास्तव में मामले में तथ्य गंभीर है तो दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए और अगर मामला एकतरफा व बायस्ड है तो उस पर भी कार्रवाई जरूर होनी चाहिए।

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