24 News Update उदयपुर, 15 अप्रैल। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में संविदा (एस.एफ.ए.बी.) नियुक्तियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर जहां सैकड़ों संविदा कर्मी नियुक्ति की आस लगाए बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर कथित रूप से पिछले दरवाजे से एकल नियुक्ति ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, संविदा (एस.एफ.ए.बी.) नियुक्तियों की प्रक्रिया जनवरी 2026 में पूर्ण हो चुकी थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने राज्य सरकार से स्वीकृति नहीं मिलने का हवाला देते हुए पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया। इसके चलते किसी भी नए संविदा कर्मी को नियुक्ति नहीं दी गई। वहीं, पूर्व में कार्यरत कर्मियों को मात्र दो-दो महीने का सेवा विस्तार देकर 2023 के न्यूनतम वेतन पर कार्य करवाया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
इसी बीच 8 अप्रैल 2026 को विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश ने पूरे मामले में चर्चा के दौर शुरू कर दिए हैं। आदेश के अनुसार संविदा (एस.एफ.ए.बी.) के तहत किशन लाल शर्मा को 1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक के लिए सेवा सलाहकार के रूप में नियुक्ति दी गई है। यह नियुक्ति उस समय दी गई है जब न तो चयन प्रक्रिया के परिणाम जारी किए गए हैं और न ही अन्य अभ्यर्थियों को अवसर प्रदान किया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि जब राज्य सरकार से स्वीकृति का अभाव बताकर पूरी प्रक्रिया रोकी गई थी, तो फिर एक व्यक्ति को नियुक्ति कैसे दी गई। करीब 250 संविदा कर्मी लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें दरकिनार कर एकल नियुक्ति किया जाना प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। कर्मचारी वर्ग में इस निर्णय को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यह मामला “अपनों पर सितम, गैरों पर करम” का प्रतीक बन गया है, जहां पारदर्शिता और समान अवसर के सिद्धांतों की अनदेखी की जा रही है।
सुविवि में बेकडोर एंट्री से संविदा नियुक्तियों पर उठे सवाल, अपनों पर सितम, गैरों पर करम, 250 कर्मी इंतजार में, एक को नियुक्ति!!!

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