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सुविवि में धमाका : राज्यपाल के आदेश के बाद आचार्य डॉ. महेन्द्र सिंह ढाका के खिलाफ एफआईआर

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24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (एमएलएसयू), उदयपुर की ओर से भौतिक विज्ञान विभाग के आचार्य डॉ. महेन्द्र सिंह ढाका के खिलाफ धोखाधड़ी और मिथ्या शपथ पत्र प्रस्तुत करने के आरोप में पुलिस थाना प्रतापनगर, उदयपुर में एफआईआर दर्ज करवा दी है। इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।
कुलसचिव की ओर से यह कार्रवाई की गई है जिसमें यह बताया गया है कि विश्वविद्यालय के अनुसार, वर्ष 2010 में सह आचार्य के पद की नियुक्ति के क्रम में डॉ. ढाका ने शपथ पत्र दिनांक 01.11.2007 प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने अपने शैक्षणिक अनुभव और अर्हताओं के संबंध में असत्य विवरण दिया। इस शपथ पत्र में तदर्थ और अंशकालिक सेवाओं की जानकारी छिपाई गई थी, ताकि विश्वविद्यालय से नौकरी प्राप्त की जा सके।
विश्वविद्यालय की जांच समिति ने मामले की जांच कर अपनी संस्तुति में पाया कि डॉ. ढाका ने धोखाधड़ी के तत्व के तहत नौकरी हासिल की। इस बारे में गठित की गई जांच समिति ने सुझाव दिया था कि भारतीय दंड संहिता के तहत एफआईआर दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। मगर इस मामले में अवकाश प्राप्त वीसी सुनीता मिश्रा ने जान बूझकर एफआईआर नहीं करवाई थी व मामले का अटका रखा था। इसके बाद जब सुनीता मिश्रा के खिलाफ आंदोलन हुए व जांचें हुई तो यह मामला भी प्रमुखता से उछला था। हाल ही में उदयपुर आए राज्यपाल हरिभाउ बागड़े ने पहली बार सुविवि के डीन्स की बैठक ली व उनसे सूरतेहाल जाने। इसके अलावा उनसे कई प्रतिनिधिमंडल भी मिले जिसमें यह मांग रखी गई। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब आधिकारिक रूप से जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस थाना प्रतापनगर में प्रकरण दर्ज करवाया। एफआईआर के साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी द्वारा असत्य दस्तावेज प्रस्तुत कर सेवा लाभ प्राप्त करना स्वीकार्य नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस कार्रवाई से प्रोफेसर ढाक की मुश्किलें बढ़ सकती है।
डॉ महेन्द्र सिंह ढाका की नियुक्ति के संबंध में प्रमुख सचिव राज्यपाल सचिवालय राजस्थान जयपुर के आदेश क्रमांक एफ3 (6) आरबी/2021/1929 दिनांक 12.04.2022 द्वारा जांच के आदेश प्रदान किये गये। उक्त जांच के क्रम में जांच ममिति द्वारा उक्त नियुक्ति के संबंध में जांच कर संस्तुति पेश कर अंकन किया गया शपथ पत्र दिनांक 1.11.2007 में शैक्षिक अनुभव में तदर्थ एवं अंशकालिक सेवाओं के तथ्यों को छिपाकर असत्य शपथ पत्र प्रस्तुत कर सेवाओं के लाभ लेने के लिये धोखाधड़ी करने के कदाचार के लिये भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति की गई है। इस प्रकरण के क्रम में विश्वविद्यालय प्रबंध मण्डल की बैठक दिनांक 01.07.2023 को हुई जिसमें उक्त संस्तुति प्रस्तुत
की गई जिसमें कुलाधिपति एवं राज्यपाल के निर्देशानुसार उत्ता प्रोफेलर महेन्द्र सिंह डाका द्वारा तत्कालिन समय प्रस्तुत कथित मिध्या शपथ पत्र प्रस्तुत कर नौकरी प्राप्त करने बाबत प्रकरण दर्ज करवाने का निर्णय लिया गया है।

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