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मूल्यांकन की मशीन या मेडिकल शिक्षा का मज़ाक? RUHS में रेजिडेंट डॉक्टरों की सीधी टक्कर, कुलपति से सुधार का वादा

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24 News Update उदयपुर। राजस्थान की चिकित्सा शिक्षा इन दिनों “रिज़ल्ट कब आएगा?” के सवाल पर अटकी हुई है—और इसी बेचैनी के बीच रेजिडेंट डाक्टर्स एसोसएिशन के प्रतिनिधिमंडल ने राजस्थान युनिवर्सिटी आफ हैल्थ साइंस के कुलपति डॉ. प्रमोद जी. येवले के दरवाज़े पर दस्तक दी।
यूआरडीए के अध्यक्ष डॉ. दीपेन्द्र सेवड़ा, संयुक्त सचिव डॉ. आशीष महंत और डीडब्ल्यूएफ अध्यक्ष डॉ. विकास बामनिया ने जिस रिशफलिंग प्रक्रिया को सामने रखा, वह अब मेडिकल छात्रों के बीच मज़ाक नहीं, बल्कि मानसिक दबाव का पर्याय बन चुकी है। नतीजे अटकने से परेशानी हो रही है।
डॉक्टरों ने साफ शब्दों में कहा—यह सिर्फ परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि करियर, आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य का संकट है। एक तरफ रेजिडेंट डॉक्टर अस्पतालों में जिंदगी बचाने की जंग लड़ रहे हैं, दूसरी तरफ अपनी ही डिग्री के परिणाम के लिए इंतज़ार की कतार में खड़े हैं। सवाल सीधा है—क्या सिस्टम डॉक्टर तैयार कर रहा है या उन्हें धीरे-धीरे थका रहा है?
प्रतिनिधिमंडल ने पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की मांग रखी, ताकि मेहनत का नतीजा फाइलों में नहीं, समय पर मार्कशीट में दिखाई दे। कुलपति डॉ. येवले ने सभी मुद्दों पर समिति के जरिए जल्द समाधान निकालने का भरोसा दिया।

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