24 न्यूज अपडेट, जोधपुर। आजकल हर महकमे में रिश्वतखोरी एक “न्यू नॉर्मल” बनती जा रही है। सरकारी दफ्तरों से लेकर निजी संस्थानों तक, हर जगह पैसे लेकर काम करवाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। एक तरफ विधानसभा में शिक्षा सुधारों पर चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ शैक्षणिक संस्थानों में भ्रष्टाचार अपनी जड़ें गहरी करता जा रहा है। खासतौर पर बीएड कॉलेजों में यह खेल बरसों से चल रहा है, जहां छात्रों की उपस्थिति से लेकर इंटर्नशिप तक हर चीज में पैसों की मांग की जाती है। जोधपुर में सामने आया हालिया मामला यही दर्शाता है।
जोधपुर में बीएड कॉलेज की लेक्चरर रिश्वत लेते गिरफ्तार
एसीबी (ACB) की टीम ने जोधपुर के एक निजी बीएड कॉलेज की लेक्चरर को 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी लेक्चरर ने एक छात्रा से कक्षा में उपस्थिति पूरी करने और इंटर्नशिप के लिए रिलीविंग लेटर देने के एवज में रिश्वत मांगी थी।
डीआईजी (एसीबी) हरेंद्र कुमार महावर ने बताया कि जोधपुर के एक निजी बीएड कॉलेज की फर्स्ट ईयर की छात्रा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कॉलेज की लेक्चरर मीनाक्षी ने उससे 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।
छात्रा की शिकायत के अनुसार, लेक्चरर ने यह रकम कक्षा में पर्याप्त उपस्थिति न होने के बावजूद रिकॉर्ड में अटेंडेंस पूरी करने और इंटर्नशिप के लिए रिलीविंग लेटर जारी करने के बदले मांगी थी।
एसीबी टीम का ऑपरेशन: कॉलेज में रंगे हाथों पकड़ा
शिकायत का सत्यापन कराने के लिए एसीबी (ACB) ने ट्रैप प्लान तैयार किया। एएसपी चक्रवर्ती सिंह राठौड़ की अगुवाई में इंस्पेक्टर सुनीता कुमारी, एसआई किशन सिंह चारण सहित अन्य अधिकारियों की टीम ने जाल बिछाया।
आज दोपहर करीब 12 बजे, जैसे ही छात्रा ने लेक्चरर को 15 हजार रुपए सौंपे, ACB टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
क्या यह मामला अकेला है? बीएड कॉलेजों में रिश्वत का खेल!
बीएड कॉलेजों में भ्रष्टाचार का यह कोई नया मामला नहीं है। शिक्षा क्षेत्र में बढ़ते भ्रष्टाचार ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- उपस्थिति घोटाला: छात्रों को उपस्थिति पूरी दिखाने के लिए पैसों की मांग की जाती है।
- इंटर्नशिप में गड़बड़ियां: सही प्रक्रिया अपनाने के बजाय पैसे लेकर फर्जी रिलीविंग लेटर जारी किए जाते हैं।
- परीक्षा और ग्रेडिंग में धांधली: कई बार कॉलेज प्रशासन छात्रों से पैसे लेकर उन्हें अच्छे नंबर देने की गारंटी देता है।
क्या रिश्वतखोरी शिक्षा को खोखला कर रही है?
रिश्वत का यह खेल भविष्य के शिक्षकों को ही नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र को प्रभावित करता है। सवाल उठता है कि यदि शिक्षक बनने वाले छात्र पहले से ही भ्रष्टाचार का सामना कर रहे हैं, तो वे आगे चलकर किस तरह की शिक्षा देंगे?
🔹 शिक्षा नीति का उल्लंघन: यह घटनाएं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और शिक्षक प्रशिक्षण मानकों का मजाक उड़ाती हैं। 🔹 आदर्शों का पतन: शिक्षक, जिन्हें नैतिकता और मूल्यों का पालन सिखाना चाहिए, वे खुद भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जा रहे हैं। 🔹 छात्रों का मनोबल गिरना: ईमानदारी से पढ़ाई करने वाले छात्रों को इस तरह के भ्रष्टाचार से मानसिक तनाव झेलना पड़ता है।

