24 न्यूज अपडेट, भोपाल। भोपाल की शांत दिखने वाली गलियों में सोमवार रात एक ऐसी खबर गूंजी जिसने हर संवेदनशील दिल को हिला दिया। जहांगीराबाद में रहने वाले 68 वर्षीय वरिष्ठ एडवोकेट शिवकुमार वर्मा ने अपने ही घर में फांसी लगाकर जान दे दी। लेकिन यह आत्महत्या नहीं—साइबर अपराधियों की निर्दयी चाल का शिकार बनना था।
एक फोन कॉल… और टूट गया हिम्मत का पहाड़
पुलिस को घटनास्थल से मिला सुसाइड नोट सच का एक खौफनाक आईना है। उसमें लिखा था—
किसी अजनबी ने उन्हें फोन कर कहा कि उनका नाम दिल्ली में लाल किले के पास हुए बम धमाके की “साजिश” में आया है… और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। देश के कानून की बारीकियों को जानने वाले, हजारों लोगों के केस लड़ चुके इस जिंदादिल वकील के भीतर उस दिन डर ने ऐसी जगह बना ली, जहां कोई कानून, कोई तर्क, कोई भरोसा पहुंच नहीं पाया।
बैंक खाते से ‘आतंकी फंडिंग’ का झांसा—साइबर ठगों का घातक हमला
जांच में सामने आया कि वर्मा के बैंक अकाउंट से “आतंकी फंडिंग” होने का हवाला देकर उन्हें धमकाया जा रहा था। साइबर ठग अक्सर इसी तरीके से लोगों को डराकर पैसे ऐंठते हैं—लेकिन इस बार दांव खेलने वालों ने यह नहीं सोचा होगा कि उनका झूठ किसी की जिंदगी निगल जाएगा।
तुरंत अस्पताल ले जाया गया, पर बहुत देर हो चुकी थी
मंगलवार शाम करीब साढ़े सात बजे जब परिवार ने उन्हें फंदे पर लटकते देखा, तो तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। फोरेंसिक और साइबर सेल को भी अलर्ट किया गया है। एक जागरूक, अनुभवी, कानून का ज्ञानी, समाज का मार्गदर्शक… ऐसे वकील को यदि एक फोन कॉल मानसिक रूप से तोड़ दे—तो इससे बड़ा सबक और क्या हो सकता है? साइबर ठग सिर्फ पैसे नहीं लूटते—वे भरोसा, सुरक्षा, मानसिक शांति और कभी-कभी जिंदगी तक छीन लेते हैं।
यह सिर्फ एक घटना नहीं—एक चेतावनी है
आज की डिजिटल दुनिया में ठगी करने वाले अपराधी केवल आपकी जेब नहीं, आपकी मनोस्थिति पर हमला करते हैं। वर्मा जैसे ज़िंदादिल इंसान को खोना सिर्फ उनके परिवार की नहीं—समाज की भी अपूरणीय क्षति है।

