24 News Update उदयपुर। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई सूचनाओं पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय का जवाब अब खुद सवालों के घेरे में आ गया है। आरटीआई कार्यकर्ता जयवंत भैरविया के आवेदन को चार महीने तक लंबित रखने के बाद भी कार्यालय ने मांगी गई सूचनाएं देने के बजाय औपचारिक और टालमटोल वाले उत्तर देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया है। भैरविया ने बताया कि उन्हें गीतांजलि अस्पताल की पार्किंग में मरीजों और परिजनों के साथ दुर्व्यवहार तथा निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली की जानकारी मिली थीं। इसी आधार पर 20 मार्च को सीएमएचओ कार्यालय में आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया। इसमें एक वरिष्ठ पत्रकार की शिकायत की जानकारी मिलने पर उससे जुड़े बिंदु भी आवेदन में शामिल किए गए।आरटीआई में उन्होंने पांच प्रमुख सूचनाएं मांगी थीं। इनमें निजी अस्पतालों में गड़बड़ियों, भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमितताओं पर कार्रवाई के लिए अधिकृत अधिकारी का नाम और पदनाम, गीतांजलि अस्पताल को रियायती दर पर भूमि आवंटन से संबंधित आदेश, वरिष्ठ पत्रकार की शिकायत पर हुई जांच रिपोर्ट और नोटशीट, सीएमएचओ के अधिकार एवं शक्तियों का विवरण तथा एक जनवरी 2026 से गीतांजलि अस्पताल से महाराणा भूपाल अस्पताल भेजे गए मरीजों की सूची शामिल थी। चार महीने बाद मिला ऐसा जवाबसीएमएचओ कार्यालय को एक महीने में जवाब देना था मगर चार महीने बाद उत्तर दिया। पहले बिंदु पर केवल इतना उत्तर दिया कि शिकायत मिलने पर राज्य सरकार के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाती है। लेकिन यह नहीं बताया कि कार्रवाई करने का अधिकृत अधिकारी कौन है। भूमि आवंटन से जुड़े आदेश के संबंध में सीएमएचओ ने जवाब दिया कि यह सूचना उसके कार्यालय से संबंधित नहीं है। जबकि आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि यदि सूचना संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं थी, तो सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आवेदन सक्षम प्राधिकारी को स्थानांतरित किया जाना चाहिए था।वरिष्ठ पत्रकार की शिकायत पर मांगी गई जांच रिपोर्ट के संबंध में उत्तर दिया गया कि परिवादी से संपर्क कर उसकी संतुष्टि के बाद संपर्क पोर्टल पर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। हालांकि संबंधित पत्रकार ने साफ कर दिया कि उनसे कभी संपर्क नहीं किया गया और उन्होंने पोर्टल पर अपनी लगातार असंतुष्टि भी दर्ज कर रखी है। सीएमएचओ झूठ बोल रहे हैं कि सहमति ले ली गई। जबकि सीएमएचओ ने उल्टे उनको मांगे गए तथ्य दिए बिना ही शिकायत को गीतांजलि को लाभ देने के लिए बंद करवा दिया। सीएमएचओ के अधिकार और शक्तियों की जानकारी मांगने पर कार्यालय ने केवल विभागीय वेबसाइट देखने की सलाह दे दी। भैरविया का कहना है कि जब किसी विभाग से उसके वैधानिक अधिकारों और दायित्वों की सूचना मांगी जाती है, तो वेबसाइट पर सूचना देख लेने वाला सामान्य हवाला देना साफ दर्शाता है कि यहां बहुत बड़ा मजाक चल रहा है। वहीं, गीतांजलि अस्पताल से महाराणा भूपाल अस्पताल रेफर किए गए मरीजों की सूची उपलब्ध कराने से यह कहते हुए इनकार कर दिया गया कि यह व्यक्तिगत सूचना है। आरटीआई कार्यकर्ता का तर्क है कि उन्होंने मरीजों का चिकित्सकीय विवरण नहीं, बल्कि सरकारी अभिलेखों में उपलब्ध रेफरल सूची मांगी थी। सीएमएचओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल जयवंत भैरविया का आरोप है कि पूरे मामले में सीएमएचओ कार्यालय ने सूचनाएं उपलब्ध कराने के बजाय जिम्मेदारी से बचने का रास्ता अपनाया। उनका कहना है कि यदि आम नागरिक यह भी नहीं जान पाए कि निजी अस्पतालों के विरुद्ध शिकायत किस अधिकारी के समक्ष की जाए, तो जवाबदेही की व्यवस्था कैसे प्रभावी होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरटीआई आवेदन का उद्देश्य स्पष्ट होने के बावजूद उत्तर इस तरह दिए गए, जिससे मूल सूचनाएं उपलब्ध ही नहीं हो सकीं। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता की भावना प्रभावित होती है। आदेशों का भी किया उल्लेखभैरविया ने राजस्थान सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग के 4 दिसंबर 2020 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि यदि लोक सूचना अधिकारी जानबूझकर सूचना रोकता है, गलत या भ्रामक सूचना देता है अथवा उपलब्ध अभिलेख होने के बावजूद सूचना नहीं देता, तो ऐसे मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation डॉ सुमन को मिला राजस्थान गौरव अवार्ड सुखाड़िया–शेखावत–भानुकुमार शास्त्री : विचारों की भिन्नता के बीच रिश्तों की गरिमा