24 News update चित्तौड़गढ़। दिव्यांग कोटे के तहत हुई शिक्षक भर्तियों की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने मेडिकल परीक्षण में निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले पांच शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि एक शिक्षक के खिलाफ पहले से ही आपराधिक मामला दर्ज है। अब इसी क्रम में माध्यमिक शिक्षा विभाग में दिव्यांग श्रेणी से नियुक्त 141 शिक्षकों की भी दोबारा मेडिकल जांच कराई जाएगी। यदि किसी अभ्यर्थी की दिव्यांगता भर्ती के निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नहीं पाई गई तो उसके खिलाफ भी आपराधिक और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई राज्य सरकार और शिक्षा निदेशालय के उस निर्देश के बाद शुरू हुई, जिसमें वर्ष 2016 से 2022 के बीच दिव्यांग कोटे से नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों का पुनः सत्यापन कराने को कहा गया था। निर्देशों के तहत चित्तौड़गढ़ जिले में प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने संभाग स्तरीय मेडिकल कॉलेज, उदयपुर में 85 शिक्षकों का दोबारा मेडिकल परीक्षण कराया।
जांच में 80 शिक्षकों की दिव्यांगता भर्ती के नियमों के अनुरूप पाई गई, जबकि पांच शिक्षकों की दिव्यांगता निर्धारित सीमा से कम मिली। सरकारी नियमों के अनुसार दिव्यांग आरक्षण का लाभ केवल उन अभ्यर्थियों को मिल सकता है, जिनकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो।
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने दुर्गा गुर्जर, मनीष कुमार मीणा, बालमुकंद बैरागी और जयवीर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। चारों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है तथा निलंबन अवधि के लिए उनके मुख्यालय भी बदल दिए गए हैं। संबंधित विद्यालयों के संस्था प्रधानों ने भी इनके विरुद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
पांचवें शिक्षक चंद्रेश कुमार, जो माध्यमिक शिक्षा विभाग में अध्यापक लेवल-1 के पद पर कार्यरत हैं, उनके खिलाफ पहले ही भदेसर थाने में मामला दर्ज कराया जा चुका है। आरोप है कि उन्होंने शिक्षक भर्ती-2022 में दिव्यांग श्रेणी का लाभ लेकर नियुक्ति प्राप्त की, जबकि मेडिकल कॉलेज उदयपुर में पुनः कराए गए परीक्षण में उनकी दिव्यांगता भर्ती के लिए आवश्यक मानदंड से कम पाई गई। इस मामले की जांच फिलहाल एसओजी कर रही है और उन्हें पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) राजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि चारों निलंबित शिक्षकों के मामलों की रिपोर्ट भी एसओजी को भेज दी गई है। हालांकि फिलहाल एसओजी में प्रकरण दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि केवल चंद्रेश कुमार के मामले में हुई है। अन्य मामलों में एसओजी की कार्रवाई की प्रतीक्षा है।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद अब माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) राजेंद्र शर्मा ने बताया कि दिव्यांग कोटे से वर्तमान में कार्यरत 141 शिक्षकों की सूची मेडिकल कॉलेज, उदयपुर को भेज दी गई है। मेडिकल कॉलेज से जांच का कार्यक्रम मिलने के बाद शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। प्रतिदिन लगभग दस शिक्षकों की जांच की जा रही है, इसलिए पूरी प्रक्रिया तय शेड्यूल के अनुसार पूरी होगी।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में मेडिकल परीक्षण के दौरान भर्ती नियमों का उल्लंघन सामने आएगा, वहां एसओजी में प्रकरण दर्ज कराने के साथ राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत विभागीय जांच भी शुरू की जाएगी। जांच के दौरान संबंधित कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा, लेकिन यदि यह साबित होता है कि किसी ने गलत तरीके से दिव्यांग कोटे का लाभ लेकर सरकारी नौकरी प्राप्त की है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।


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