24 News Update उदयपुर। औपनिवेशिक नीतियों ने भारत को उसकी पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय उद्योगों से दूर कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप गरीबी और सामाजिक असमानताएं बढ़ीं। इन ऐतिहासिक भूलों की भरपाई केवल समावेशी, मूल्य आधारित और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी शिक्षा के माध्यम से ही की जा सकती है। यह विचार राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने बुधवार को भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।राज्यपाल ने विद्यार्थियों से निरंतर परिश्रम, बड़ी सोच, एकाग्रता और गहन अध्ययन को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा के गौरव को पुनः स्थापित करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका निर्णायक है, ताकि भारत फिर से विश्व में ज्ञान–नेतृत्व की भूमिका निभा सके। 99 पीएचडी, 47 गोल्ड मेडल—बेटियों का दबदबासमारोह में राज्यपाल बागड़े ने 99 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की तथा स्नातक–स्नातकोत्तर स्तर के 47 उत्कृष्ट विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया। खास बात यह रही कि 62 पीएचडी डिग्रियां, 35 गोल्ड मेडल, बेटियों ने अपने नाम कर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। घने कोहरे के कारण जयपुर और उदयपुर एयरपोर्ट पर उड़ानों में विलंब हुआ, जिससे राज्यपाल लगभग दो घंटे देरी से समारोह स्थल पहुंचे, लेकिन कार्यक्रम पूरे गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।महाराणा भूपाल सिंह को नमन, एनसीसी का गार्ड ऑफ ऑनरसमारोह से पूर्व राज्यपाल बागड़े ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित महाराणा भूपाल सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। कार्यकारिणी सदस्यों ने राज्यपाल का 51 किलो की पुष्पमाला से भव्य स्वागत किया।जनजातीय और पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोरराज्यपाल बागड़े ने मेवाड़ सहित जनजातीय बहुल क्षेत्रों की शैक्षिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को मजबूत किए बिना सामाजिक समानता संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो पिछड़े, घुमंतू और जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को सम्मानजनक जीवन और समान अवसर प्रदान कर सकती है। मैकाले शिक्षा पर तीखा प्रहार, नई शिक्षा नीति की सराहनाराज्यपाल ने कहा कि 1835 में लागू की गई मैकाले शिक्षा प्रणाली ने भारत की मौलिक शिक्षा व्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाया, जिसके दुष्परिणाम आज भी समाज झेल रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति–2020 के माध्यम से इस ऐतिहासिक क्षति की भरपाई की दिशा में ठोस प्रयास शुरू हुए हैं। विशिष्ट अतिथि प्रो. कैलाश सोडाणी का संबोधनविशिष्ट अतिथि, पूर्व कुलपति एवं राज्यपाल के उच्च शिक्षा सलाहकार प्रो. कैलाश सोडाणी ने कहा कि आत्मनिर्भर और आधुनिक मेवाड़ के निर्माण में शिक्षण संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शोध, डिजिटल शिक्षा, तकनीकी उन्नयन और स्वदेशी सोशल प्लेटफॉर्म विकसित करने पर जोर दिया तथा मानसिक गुलामी से मुक्ति का आह्वान किया। दीक्षांत ज्ञान को कर्म में बदलने का पर्व—प्रो. सारंगदेवोतसमारोह की अध्यक्षता करते हुए कार्यवाहक अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि दीक्षांत केवल डिग्री प्राप्ति का अवसर नहीं, बल्कि ज्ञान को संस्कार और कर्म में रूपांतरित करने का पर्व है। उन्होंने विद्यार्थियों से सत्य, सेवा और संयम को जीवन के मूल स्तंभ बनाने और समाज व राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का आह्वान किया। प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि शिक्षा में समता के बिना सच्ची सफलता संभव नहीं है। जीवन में साहस, धर्म के मार्ग पर आस्था और कर्म में ईमानदारी ही व्यक्ति को ऊंचाइयों तक ले जाती है। भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उपनिषद समाज कल्याण के माध्यम से अमृतत्व का संदेश देते हैं, वहीं श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान की पवित्रता और उसकी महान परंपरा से हमारा परिचय कराती है।उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सभी के लिए एक्सेस, एक्नेटेबिलिटी और अफोर्डेबिलिटी सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सके। उन्होंने स्थानिक जड़ों से जुड़ी किंतु वैश्विक दृष्टिकोण वाली शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टि के साथ संवेदनशील, नैतिक और मूल्य आधारित सोच का निर्माण होना चाहिए।उन्होंने आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे सत्य, सेवा और संयम को अपने जीवन के मूल स्तंभ बनाएं, स्वतंत्र सोच के साथ निर्णय लें और दृढ़ संकल्प के बल पर अपने ज्ञान से समाज, राष्ट्र और विश्व को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करें।गरिमामय उपस्थितिसमारोह में प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड़, रजिस्ट्रार डॉ. एन.एन. सिंह, अध्यक्ष प्रो. चेतन सिंह चौहान, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन, पीजी डीन प्रो. प्रेमसिंह रावलोत सहित विश्वविद्यालय प्रबंधन, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिता राठौड़ ने किया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation राहु—ल काल में फिर यूडीए बना डीपीएस का चौकीदार, सरकार को किया गुमराह, कौन करेगा जांच??? उदयपुर की कशिश वाधवानी को मनोविज्ञान में पीएचडी, राज्यपाल ने किया सम्मानित