चित्तौड़गढ़। नगर परिषद चुनाव 2026 में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत के साथ चित्तौड़गढ़ नगर परिषद की सत्ता अपने नाम कर ली है। 60 वार्डों में भाजपा ने 33 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 23 वार्डों तक सीमित रही। 4 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। इस तरह भाजपा ने कांग्रेस से 10 सीट ज्यादा जीतकर बोर्ड गठन का रास्ता साफ कर दिया। 9 सितंबर को हुए मतदान में नगर परिषद क्षेत्र में 68.15% मतदान हुआ था। सोमवार को सुबह 8 बजे मतगणना शुरू होने के बाद परिणामों का सिलसिला चला और दोपहर तक सभी 60 वार्डों की तस्वीर सामने आ गई। चुनावी गणित में भाजपा की साफ बढ़त दलजीती सीटेंकुल सीटों में हिस्सेदारीभाजपा3355%कांग्रेस2338.33%निर्दलीय46.67%कुल60100% 60 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत थी। भाजपा ने 33 सीटें जीतकर बहुमत के आंकड़े से 2 सीट अधिक हासिल की हैं। लिहाजा बोर्ड बनाने के लिए उसे निर्दलीयों के समर्थन की आवश्यकता नहीं है। शुरुआत में ही बन गया था भाजपा की बढ़त का संकेत मतगणना के शुरुआती चरण से ही भाजपा ने बढ़त बना ली थी। पहले 11 वार्डों के परिणाम में भाजपा ने 11 में से 8 सीटें जीतीं। 16 वार्डों की गिनती पूरी होने पर भाजपा के खाते में 13 सीटें थीं। बाद में 40 वार्डों के परिणाम में भाजपा 26 सीटों तक पहुंच गई। 54 वार्डों के परिणाम आने तक भी तस्वीर लगभग स्पष्ट हो चुकी थी—भाजपा 29, कांग्रेस 22 और निर्दलीय 3। अंतिम 6 वार्डों के परिणामों के बाद भाजपा 33, कांग्रेस 23 और निर्दलीय 4 पर पहुंची। कांग्रेस के लिए 23 सीटें—हार बड़ी, लेकिन पूरी तरह सफाया नहीं भाजपा के 33 के मुकाबले कांग्रेस की 23 सीटें संख्या में भले ही काफी पीछे हों, लेकिन कांग्रेस ने परिषद के कई हिस्सों में अपनी पकड़ कायम रखी। वार्ड 4, 9, 12, 17, 20, 21, 23, 26, 32 और 36 जैसे वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। खास तौर पर वार्ड 17 में कांग्रेस के महेंद्र सिंह मेड़तिया, वार्ड 36 में नगेंद्र सिंह राठौड़, वार्ड 45 में धर्मेंद्र मूंदड़ा और अन्य प्रमुख मुकाबलों में कांग्रेस की जीत ने पार्टी को 20 से ऊपर बनाए रखा। 4 निर्दलीय भी जीते, लेकिन बोर्ड के समीकरण में निर्णायक नहीं निर्दलीयों ने वार्ड 18 में राकेश घारू, वार्ड 30 में देवीलाल गुर्जर, वार्ड 41 में शकील खान और वार्ड 59 में अनिल सैनी के रूप में जीत दर्ज की। इन 4 सीटों का राजनीतिक महत्व जरूर रहेगा, लेकिन 33 सीटों के साथ भाजपा बहुमत से आगे है, इसलिए सभापति चुनाव में निर्दलीयों का समर्थन भाजपा के लिए अनिवार्य नहीं होगा। भाजपा के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश चित्तौड़गढ़ के नतीजे को केवल 33-23 की सीट संख्या के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। भाजपा ने शुरुआत से अंत तक बढ़त बनाए रखी और अंततः बहुमत के लिए जरूरी 31 के आंकड़े को पार कर लिया। भाजपा नेताओं की ओर से चुनाव को पिछले कांग्रेस शासन के प्रदर्शन से जोड़कर प्रचारित किया गया था। वहीं संगठन की ओर से चुनाव से पहले लंबे समय तक तैयारी करने का दावा किया गया। परिणामों ने कम से कम नगर परिषद स्तर पर भाजपा के उस संगठनात्मक दावे को सीटों के रूप में मजबूती दी है। अब नजर सभापति की कुर्सी पर भाजपा का बोर्ड बनना लगभग तय है, लेकिन असल राजनीतिक मुकाबला अब सभापति पद को लेकर भाजपा के भीतर शुरू होगा। 33 निर्वाचित भाजपा पार्षदों में से किसे सभापति बनाया जाता है, यह पार्टी नेतृत्व के लिए अगला बड़ा फैसला होगा। चित्तौड़गढ़ का चुनावी संदेश:भाजपा ने 33 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया, कांग्रेस 23 पर रुकी और 4 निर्दलीय अपनी जगह बनाने में सफल रहे। जनता ने मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच रखा, लेकिन सत्ता की चाबी स्पष्ट रूप से भाजपा के हाथ में दे दी। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation भीलवाड़ा में भाजपा का दबदबा, 70 में 45 वार्ड जीते; कांग्रेस से ज्यादा निर्दलीयों के खाते में सीटें वार्ड 60 में खुशबु मेहता की बड़ी जीत, BJP-कांग्रेस दोनों पीछे; 694 वोट से जीतीं