— 10,245 वार्डों में भाजपा जीती, कांग्रेस दूसरे नंबर पर, जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में भाजपा का बोर्ड तय, बीकानेर में कांग्रेस आगे 24 News Update जयपुर। राजस्थान के शहरों ने सोमवार को अपना सियासी फैसला सुना दिया। 309 नगरीय निकायों के 10,245 पार्षद पदों के लिए हुई मतगणना में भाजपा ने कांग्रेस पर स्पष्ट बढ़त बनाई, लेकिन तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। कई शहरों में निर्दलीय पार्षदों ने ऐसा प्रदर्शन किया कि बोर्ड बनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों को अब उनके दरवाजे पर जाना पड़ेगा। राज्य निर्वाचन आयोग के चुनावी ढांचे के अनुसार प्रदेश में 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाओं के लिए चुनाव हुए थे।राज्यभर के घोषित परिणामों के उपलब्ध आंकड़ों में भाजपा 4,178 वार्डों के साथ सबसे आगे, कांग्रेस 3,612 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर और निर्दलीय 2,273 वार्डों के साथ तीसरी बड़ी ताकत के रूप में सामने आए हैं। ये आंकड़े कुल 10,245 पार्षद पदों के चुनाव में दलों की शहरी पकड़ का बड़ा संकेत हैं।सबसे बड़ा संदेश प्रदेश के बड़े शहरों से आया है। जयपुर में भाजपा ने 150 में से 77 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार किया, जबकि कांग्रेस 52 वार्डों में सिमटी। उदयपुर में भाजपा ने 80 में से 53 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को 23 सीटें मिलीं और 3 निर्दलीय तथा 1 सीट सीपीआई(एम) के खाते में गई। इससे उदयपुर में भाजपा का बोर्ड बनना तय हो गया है।कोटा और भीलवाड़ा में भी भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया। भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों में भाजपा ने 45 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस 10 वार्डों तक सीमित रही। वहीं बड़े नगर निगमों में बीकानेर कांग्रेस के पक्ष में गया, जिससे यह साफ है कि शहरी राजस्थान में भाजपा की बढ़त के बावजूद कांग्रेस पूरी तरह मुकाबले से बाहर नहीं हुई है।दूसरी ओर जोधपुर, भरतपुर, अजमेर और पाली जैसे निकायों में तस्वीर अधिक दिलचस्प रही। यहां बोर्ड गठन का गणित निर्दलीय पार्षदों के समर्थन पर निर्भर हो सकता है। खासकर अजमेर और पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत के लिए उसे भी दूसरे पार्षदों की जरूरत पड़ सकती है। यानी चुनाव परिणाम ने केवल भाजपा-कांग्रेस की ताकत नहीं मापी, बल्कि निर्दलीयों को भी निर्णायक राजनीतिक हैसियत दे दी।इन नतीजों का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह चुनाव 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान के शहरी मतदाताओं का बड़ा मूड टेस्ट माना जा रहा था। 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में मतदान हुआ था। पहले चरण में 76.42 प्रतिशत और दूसरे चरण में 70.68 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। कुल मिलाकर 1.44 करोड़ से ज्यादा मतदाता इस चुनाव में मतदान के लिए पात्र थे।भाजपा के लिए परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण हैं कि राज्य में उसकी सरकार होने के बावजूद यह चुनाव सीधे स्थानीय मुद्दों—सड़क, सफाई, पानी, सीवरेज, शहरी विकास और वार्ड स्तर के संगठन—पर भी लड़ा गया। परिणाम बताते हैं कि पार्टी ने अधिकांश बड़े शहरी केंद्रों में अपना संगठनात्मक आधार बनाए रखा है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह कई निकायों में भाजपा के मुकाबले बड़ी संख्या में वार्ड जीतने के बावजूद बड़े शहरों में स्पष्ट बहुमत के बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं पहुंच सकी।हालांकि, निर्दलीयों का 2,273 वार्डों में जीतना इस पूरे चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण दूसरा पहलू है। इसका मतलब यह है कि शहरी मतदाता का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक पार्टी मुकाबले से बाहर भी गया। कई निकायों में यही पार्षद अब बोर्ड गठन के लिए निर्णायक होंगे। ऐसे में चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद असली सियासी खेल अब बोर्ड बनाने और सभापति-महापौर चुनने का शुरू होगा।राजस्थान के शहरी राजनीतिक नक्शे को देखें तो सोमवार का परिणाम भाजपा के लिए संगठन और बड़े शहरों में पकड़ मजबूत होने का संदेश है, जबकि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल अपने शहरी वोट को जीत में बदलने और स्थानीय संगठन को मजबूत करने का है। साथ ही निर्दलीयों की बड़ी संख्या यह संकेत देती है कि मतदाता ने कई जगह पार्टी के बजाय स्थानीय चेहरा और स्थानीय समीकरण को भी प्राथमिकता दी।अब पार्षदों की जीत के बाद अगली लड़ाई महापौर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सियों के लिए होगी। यानी सोमवार को मतपेटियों से निकला फैसला चुनाव का अंत नहीं, बल्कि राजस्थान के शहरी निकायों में अगले राजनीतिक अध्याय की शुरुआत है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation 10 दिन पहले हुई थी सगाई, घर में छाया मातम; कांग्रेस नेता के इकलौते बेटे की मौत से मचा हड़कंप