उदयपुर, 15 मार्च 2026। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर में रविवार को पेंशनर्स वेलफेयर सोसायटी द्वारा आयोजित वार्षिक अधिवेशन और वरिष्ठ पेंशनर्स सम्मान समारोह में राजस्थान के कृषि विश्वविद्यालयों में लंबे समय से लंबित पेंशन समस्या के स्थायी समाधान की मांग जोरदार तरीके से उठी। वक्ताओं ने कहा कि राज्य के पांचों सरकारी कृषि विश्वविद्यालयों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार के समक्ष ठोस प्रस्ताव रखना होगा, तभी पेंशन व्यवस्था का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर स्थित राजस्थान कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर (आरसीए) के सभागार में किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए 450 से अधिक सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों ने भाग लिया। बीकानेर और उदयपुर के कुलगुरुओं ने दिया साझा प्रयास का संदेश समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. आर. बी. दुबे, कुलपति स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने 22 दिसंबर को कुलपति पद संभालते समय पाया कि विश्वविद्यालय में तीन माह से पेंशन बकाया थी। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों की स्थिति को देखते हुए इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए चार दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित कराया। उन्होंने कहा कि यदि राजस्थान के पांचों सरकारी कृषि विश्वविद्यालय—उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा और बांदीकुई—पेंशन समस्या के समाधान के लिए एक मंच पर आकर राज्य सरकार के सामने तथ्यात्मक प्रस्ताव रखें, तो स्थायी समाधान का रास्ता निकल सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पंजाब और हरियाणा में मंडी टैक्स से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनरों को दिया जाता है। पेंशन व्यवस्था पर बढ़ता वित्तीय दबाव कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. प्रताप सिंह धाकड़, कुलपति महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर ने कहा कि राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पेंशन भुगतान की है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर विचार के लिए पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और पेंशनर सोसायटियों के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक प्रस्तावित थी, जो कुछ कारणों से स्थगित हो गई, लेकिन जल्द ही यह बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक के बाद राज्य सरकार और मुख्यमंत्री को एक संयुक्त प्रतिवेदन सौंपकर पेंशन समस्या का स्थायी समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा। 1461 पेंशनरों की प्रतिनिधि संस्था सोसायटी के प्रवक्ता वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने बताया कि पेंशनर्स वेलफेयर सोसायटी विश्वविद्यालय के 1461 पेंशनरों की प्रतिनिधि संस्था है, जो वर्ष 2008 से पेंशनरों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सोसायटी अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र कुमार भटनागर ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर विश्वविद्यालय की माली कॉलोनी की भूमि की बिक्री से प्राप्त राशि में से उदयपुर नगर विकास प्राधिकरण प्रतिमाह लगभग पांच करोड़ रुपये पेंशन भुगतान के लिए उपलब्ध करा रहा है, जबकि विश्वविद्यालय अपने संसाधनों से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये जोड़कर पेंशन दे रहा है। हालांकि यह व्यवस्था अस्थायी है और भविष्य में उपलब्ध राशि समाप्त होने की आशंका है, इसलिए राज्य सरकार से स्थायी वित्तीय व्यवस्था की मांग की जा रही है। पेंशन कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार पूर्व विशेषाधिकारी डॉ. सुभाष भार्गव ने कहा कि पेंशन किसी भी कर्मचारी का कानूनी और नैतिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि सेवा नियमों के अनुसार पेंशन “एक्सटेंडेड वेतन” की श्रेणी में आती है, जो कर्मचारी की जीवनभर की सेवा का प्रतिफल है। उन्होंने सुझाव दिया कि या तो विश्वविद्यालय स्तर पर केंद्रीय वित्तीय पूल बनाकर बड़ा कोष तैयार किया जाए या फिर अन्य राज्यों की तरह राज्य सरकार अपने बजट में कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनरों के लिए प्रावधान करे। 139 वरिष्ठ पेंशनरों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान 70, 75, 80 और 85 वर्ष से अधिक आयु के 139 वरिष्ठ पेंशनरों को मेवाड़ी पाग, उपरना, शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। सोसायटी के कोषाध्यक्ष देवीलाल तेली ने वार्षिक आय-व्यय का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि सख्त वित्तीय अनुशासन के कारण सोसायटी की कुल चल-अचल संपत्ति बढ़कर 40 लाख 27 हजार 229 रुपये हो गई है। राज्यभर से आए पेंशनर्स इस अधिवेशन में कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, जयपुर, अजमेर, जोधपुर, सिरोही, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, राजसमंद, प्रतापगढ़, सलूम्बर और उदयपुर सहित कई जिलों में निवास करने वाले पेंशनर्स शामिल हुए। आयोजन में इनका रहा सहयोग कार्यक्रम के संचालन का दायित्व डॉ. गायत्री तिवारी ने निभाया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सोसायटी के महामंत्री आर. के. राजपूत ने किया। आयोजन को सफल बनाने में पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा, पूर्व विशेषाधिकारी डॉ. सुभाष भार्गव, उपाध्यक्ष डॉ. प्रकाशचंद्र कंठालिया, कल्याण एवं संगठन मंत्री आर. पी. शर्मा, सचिव गणेशलाल पालीवाल, सदस्य डॉ. सुमन सिंह, डॉ. बालुराम रणवा, डॉ. जी. एस. आमेटा, डॉ. हेमंत जैन, डॉ. सी. पी. सिंह, मोहन सिंह चौहान, कोमल सिंह राठौड़, सुरेश मेहता, मोहम्मद हुसैन, शक्ति नारायण माथुर, सुश्री प्रेमलता मेहता, प्रभारी कोटा-झालावाड़ क्षेत्र डॉ. एन. के. पोरवाल, नरेंद्र कुमार मोड़ सहित अनेक सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समारोह के अंत में दोनों कुलपतियों ने पेंशनर्स वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों को पेंशनरों के हित में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... 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