उदयपुर। सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार व अनियमितताओं को सामने लाने के लिए बना सूचना का अधिकार अधिनियम आम नागरिक के लिए सबसे अहम हथियारों में से एक है। लेकिन उदयपुर नगर निगम में हालात उल्टे दिख रहे हैं। यहा सिलसिलेवार आरटीआई की राजनीति व प्रशासनिक मिलीभगत से सामूहिक हत्या का प्रयास चलता नजर आ रहा है।272 भूखंडों से जुड़े खुलासे के बाद से पता नहीं क्यों नगर निगम के अफसरों में डर बैठ गया है। कहीं वे सूचनाएं बाहर ना आ जाएं जिन पर नेताओं के इशारों पर पहरा बिठा रखा है। कहीं दोनों की एक दूसरे के प्रति लॉयल्टी खतरे में ना आ जाएं। वो जुगलबंदी ना टूट जाए जिससे कई राज अभी पर्दे के पीछे और कारपेट के नीचे दबा कर रखे हुए हैं।हद तो ये है कि जिम्मेदार अफसर की ऑनलाइन RTI की आईडी मैपिंग तक नहीं की जा रही है। निगम में लोक सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी उपायुक्त स्तर पर ढोल दी गई है लेकिन करीब तीन महीने से वर्तमान उपायुक्त की आईडी ऑनलाइन RTI व्यवस्था से मैप नहीं होने की बात सामने आ रही है। इसका सीधा असर उन आवेदकों पर पड़ रहा है, जो ऑनलाइन RTI के जरिए निगम से सूचना मांग रहे हैं। आवेदन की निर्धारित समय सीमा आगे बढ़ती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी तक आवेदन पहुंचने और उस पर कार्रवाई की व्यवस्था को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। समय का कोई मोल नहीं है क्योंकि इस स्तर पर अफसर को पनिश करने की कोई व्यवस्था ही नहीं है। अधिकारी बदल गया, ऑनलाइन RTI में पुराना नाम नगर निगम में उपायुक्त का पद संभालने के बाद भी ऑनलाइन RTI पोर्टल पर पूर्व उपायुक्त दिनेश कुमार मंडोवरा का नाम लोक सूचना अधिकारी के तौर पर प्रदर्शित हो रहा है। वर्तमान में हरि सिंह देवल उपायुक्त का कार्य देख रहे हैं। सवाल यह है कि जब अधिकारी बदल चुका है तो तीन महीने बाद भी ऑनलाइन RTI व्यवस्था में नई आईडी की मैपिंग क्यों नहीं हुई? इसी दौरान ऑनलाइन RTI लगाई गई उनका आवेदन किस अधिकारी के खाते में पहुंचा? उस पर कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है? और सबसे अहम बात ये हो गई कि RTI की कानूनी समयसीमा निकल जाने पर जवाबदेही किसकी तय होगी? जिस बोर्ड पर RTI समझाई, उस पर अब सफेदीनगर निगम परिसर में RTI से संबंधित जानकारी देने वाले बोर्ड पर भी अब सफेदी पोत दी गई है। पहले इसी बोर्ड पर बताया गया था कि नगर निगम में सूचना के अधिकार की क्या व्यवस्था है और आम नागरिक किस तरह इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। अब बोर्ड पर सफेदी होने से वहां RTI से संबंधित जानकारी दिखाई नहीं दे रही। यह तस्वीर अपने आप में निगम की RTI व्यवस्था को लेकर सवाल खड़ा कर रही है। एक तरफ तो सरकार आम नागरिक को सूचना मांगने का अधिकार देकर बड़े दावे कर रही है तो दूसरी तरफ उसी अधिकार के इस्तेमाल की प्रक्रिया बताने वाला बोर्ड ही गायब हो जाएं और ऑनलाइन व्यवस्था में जिम्मेदार अधिकारी की आईडी मैपिंग महीनों तक न हो, तो पारदर्शिता की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आवेदक के लिए हर दिन अहम, निगम के लिए समयसीमा?RTI आवेदक के लिए समयसीमा कोरी प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं होती। कई बार मांगी गई सूचना किसी शिकायत, जांच, सरकारी जमीन, निर्माण, टेंडर, नामांतरण या किसी कथित अनियमितता से जुड़ी होती है। सूचना मिलने में देरी का मतलब ही सूचना के उपयोग की उपयोगिता कम होना हो सकता है। अधिकारों का सीधा सीधा हनन होना है, मगर यहां भी अफसरों व कार्मिकों पर पनिशमेंट की परमपरा नहीं होने से जवाबदेही शून्य हो रही है। आयुक्त ने उपायुक्त को दी जिम्मेदारी, फिर आईडी मैपिंग क्यों नहीं?निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने RTI से जुड़ी जिम्मेदारी उपायुक्त स्तर पर दे रखी है। ऐसे में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होने के बावजूद ऑनलाइन सिस्टम में वर्तमान अधिकारी की आईडी मैप नहीं होना व्यवस्था और निगरानी दोनों पर सवाल खड़े करता है। यह स्थिति ऐसे समय सामने आ रही है, जब 272 भूखंडों से जुड़े मामले ने नगर निगम के रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक रुचि बढ़ा दी है। RTI के जरिए दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगने वाले आवेदकों के लिए ऑनलाइन व्यवस्था का सुचारु होना और भी जरूरी हो जाता है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation सेक्टर-11 में निगम की कार्रवाई, इंडियन ऑयल डिपो के सामने 4 डंपर कबाड़ व अन्य सामान जब्त, यूडीए से निगम को हस्तांतरित दुकानों के बाहर किया गया था कब्जा गांधी ग्राउंड में 20 अक्टूबर को होगा 78वां विजयादशमी महोत्सव, मथुरा की टीम बना रही रावण परिवार के पुतले