24 News Update उदयपुर। उदयपुर फाइल्स के बाद चले भाई साहब के ब्रहृमास्त्र से मची मारकाट का असर अब धीरे धीरे कम होता नजर आ रहा है। फाइल्स को वक्त की कब्र में दफन करने और गड़े मुर्दों के कभी भी वापस नहीं आने के बंदोबस्त के बीच खबर ये है कि किशन मेघवाल प्रकरण की गूंज अब दिल्ली दरबार तक पहुंच गई है। वहां से जल्दी ही उदयपुर में एक दूसरे पर तलवार ताने खड़े गुटों को अपनी हदों में रहने का संदेसा शीघ्र ही आने की उम्मीद की जा रही है।
इस बीच बुजुर्ग के अपहरण में भाजपा नेता किशन मेघवाल का नाम उछलने के बाद की परिस्थितियों में स्पष्ट रूप से दो धड़े बन गए हैं जिसमें एक धड़ा मेघवाल के पक्ष में है और आला कमान से साफ—साफ कह रहा है कि भाई साहब के दबाव में मेघवाल की पॉलिटिकल रिमांड बार—बार ली जा रही है। जरूरत से ज्यादा मीडिया प्रोजेक्शन करते हुए बार बार नाम उछाला जा रहा है। निगेटिव शेड में पेंड करते हुए पूरे संगठन की बैंड बजाई जा रही है। यही हाल रहा तो आगे चुनावों में बैंड ना बज जाए इसकी तैयारी अभी से करनी होगी। मिले सुर तेरा तुम्हारा की स्थितियों को फिर से तैयार करने के लिए जयपुर के बाद अब दिल्ली के स्तर पर मंथन किया जा रहा है। उदयपुर फाइल्स का घनघोर अंधेरा छंटने बाद अब पार्टी में ही अब एक नया आंतरिक संघर्ष शुरू हुआ है जिसमें नई तरह से नई पावर इक्वेशन और खींचतान के बीच एक नया लेवल ओफ कंफर्ट तैयार किया जाना तय माना जा रहा है। ओल्ड गार्ड अपना पूरा जोर लगाने के बाद भी अब तक उन लोगों को पनिशमेंट नहीं दिलवा पाए हैं जिनका नाम आरोपियों की लिस्ट में शामिल था। जिनका नाम पब्लिक की जुबां पर है और जो रोज विभिन्न मंचों पर देखे भी जा रहे हैं।
बहरहाल किशन मेघवाल जैसे दिखने वाले शख्स का पुलिस के साथ रात के सन्नाटे में पाया जाना और उसके बाद रामलाल अपहरण मामले में भी उनका नाम आना डबल सेटबेक माना जा रहा था। मगर अब इसका उल्टा असर भी होता हुआ दिखाई दे रहा है। किसी एक को टार्गेट करने पर पूरा का पूरा एक ग्रुप नाराज हो गया है और वो पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर आया है। ग्रुप का कहना है काम करने वालों, काम आने वालों और पार्टी के लिए जान छिड़कने वालों के प्रति अंदरखाने इस तरह का बर्ताव अब सहन नहीं किया जाएगा। छोटे स्तर पर जो घेराबंदी हो रही है। सूचनाओं का मीडिया—भोज करवाया जा रहा है वह अब हद पार कर चुका है। किशन मेघवाल से आज हमने बात की तो उनका कहना था कि मामलों से उनका वास्ता ही नहीं है। रामलाल प्रकरण में ना तो आरोपी हैं, ना उनका एफआईआर में नाम है। पुलिस ने भी अब तक जांच के लिए ना नाम लिया है ना बुलाया है। किसी आरोपी ने किसी के सामने नाम लिया है तो उसका वे क्या कर सकते हैं। न्यायालय की दहलीज पर सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। मेघवाल बोले कि मैं पीडित के साथ खड़ा हूं। जो दोशी हैं पनिशमेंट मिलना ही चाहिए। पीडित ने भी मेरा नाम नहीं बोला है केवल मीडिया हाइप की जा रही है जो लगभग मानहानिकारक हैं।
यह था मामला
आपको बता दें कि बड़गांव थाना क्षेत्र में बुजुर्ग के अपहरण के मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि सायरा नांदेश्मा निवासी भाजपा नेता किशन मेघवाल और गोगुंदा के सुवावतों का गुड़ा निवासी सुरेश मेघवाल के कहने पर रामलाल का अपहरण किया गया। सभी आरोपी गिरोह बनाकर लंबे समय से अनपढ़ व भोलेभाले लोगों की जमीन हड़पने का काम कर रहे हैं। रजिस्ट्री कराने के लिए दस्तावेज तैयार करवा लिए। फिर रामलाल 8 मार्च को ब्रेजा कार में अपहरण कर ले गए। मेघवाल का इस बात पर कहना है कि घटना के वक्त वे मैं शहर में नहीं थे।
जिस दिन घटना हुई, वे निजी काम से दिल्ली गए थे। राजनीतिक द्वेषता के चलते कुछ लोग छवि खराब करने की साजिश रच रहे हैं।
भाई साहब के ब्रहृमास्त्र के बाद किशन मेघवाल की बात पहुंची दिल्ली दरबार

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