24 News Update उदयपुर। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया का उदयपुर दौरा शुक्रवार को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया। डबोक एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत और हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बीच में सैकड़ों गाड़ियों के काफिले ने एक धड़े को चकित कर दिया। भाजपा संगठन के भीतर गहरी खींचतान भी खुलकर सामने आ गई और साफ हो गया कि अब कमल की पंखुड़ियां आपस में ही आने वाले चुनावों के बीच अगर सब कुछ ठीक नहीं हुआ तो तलवारबाजी करने वाली हैं।
शहर विधायक ताराचंद जैन के नेतृत्व में डबोक एयरपोर्ट पर स्वागत हुआ जिसमें जिलेभर से कार्यकर्ताओं को जुटाया गया। टाइगर से बढ़कर कोई नहीं वाला परसेप्शन बनाया गया और आप्टिक्स दिखाया गया कि भाई साहब की अब तक सर्वेसर्वा हैं। एयरपोर्ट से लेकर हाईवे तक जगह-जगह स्वागत द्वार, फूलमालाएं और ढोल-नगाड़ों के बीच करीब 1500 से 2000 कार्यकर्ता और 300 से अधिक वाहनों का काफिला दिखाई दिया जो खुद कटारियाजी को गदगद करने के लिए और चकित करने के लिए काफी था।
कटारिया के साथ गोगुंदा विधायक प्रताप गमेती, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी, ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा सहित देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, पूर्व जिलाध्यक्ष रवींद्र श्रीमाली, चंद्रगुप्त सिंह चौहान, पूर्व महापौर जी.एस. टांक, महेंद्र सिंह शेखावत, डॉ. गीता पटेल, अनिल सिंघल, रामकृपाल शर्मा, अतुल चंडालिया जैसे कई नेता मौजूद रहे।
जो नहीं दिखे, उन पर खूब हुई चर्चा
लेकिन इस भीड़ के बीच जो नहीं दिखा, वही सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश बन गया। शहर भाजपा की कार्यकारिणी के कई बड़े पदाधिकारी इस कार्यक्रम से दूर रहे। वरिष्ठ नेता प्रमोद सामर, शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह, पारस सिंघवी सहित कई मंडलों के प्रमुख चेहरे नजर ही नहीं आए। संगठन की इस दूरी ने साफ संकेत दिया कि पार्टी के भीतर खींचतान अब सतह पर आ चुकी है और आपसी जंग निर्णायक मोड़ की तरफ कूच कर गई है।
12 मंडलों में से केवल 3 आए
मंडल और मोर्चा स्तर पर भी यही तस्वीर रही। शहर के करीब 12 मंडलों में से सिर्फ 3 मंडल अध्यक्ष—विजय आहुजा, रणजीत सिंह दिगपाल और कन्हैयालाल वैष्णव ही स्वागत में पहुंचे, जबकि 9 मंडल अध्यक्षों ने दूरी बनाए रखी। याने कि शहर के तीन चौथाई मंडलों पर अब शहर कार्यकारिणी की बगावती विचारधारा का असर दिखाई देने लगा है। या दूरसे शब्दों में कहें तो इन मंडलों के अध्यक्षों, कार्यकर्ताओं ने अपनी कोई पोलिटिकल फ्यूचर गेन वाली प्लानिंग सेट कर रखी है जिसके चलते वे फिलहाल कटारियाजी से दूरी ही बनाने में खुद को सेफ महसूस कर रहे हैं। इधर मोर्चा संगठनों में भी यही हाल रहा, जहां 6 में से सिर्फ एक मोर्चा अध्यक्ष की स्वागत में मौजूदगी दर्ज हुई और बाकी पांच नदारद रहे।
राजनीतिक जानकार इसे सीधा गुटबाजी का संकेत मान रहे हैं—जहां एक ओर कटारिया समर्थक भीड़ के जरिए ताकत दिखा रहे हैं, वहीं दूसरा धड़ा चुप रहकर विरोध जता रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे हालिया विवाद और संगठनात्मक खींचतान को अहम माना जा रहा है। डॉत्वि. जय प्रकाश विप्लवी और धर्मनारायण जोशी जैसे नाम जो पहले कभी विरोध खेमे में सक्रिय बताए जाते थे व बाद में कटारिया गुट से भरत मिलाप हो गया था। वे एक बार फिर से विरोधी खेमे के खेवनहार बनते नजर आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो जब से उदयपुर फाइल्स का मामला आया है, कटारिया गुट पहले से अधिक ताकतवर हो गया है। फाइल्स के इलेक्ट्रोनिक मटेरियल ने कटारिया गुट को नए जोश से भर दिया है। मामला दिल्ली दरबार तक तक पहुंचा और ऐसे अपुष्ट कयास हैं कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक भी चर्चा हुई है जिसके बाद से शतरंज की बिसात पर उदयपुर भाजपा में जमे जमाये नए चेहरे प्यादों से पिटते हुए नजर आ रहे हैं। एक और चर्चा यह है कि अगर शहर वाली बड़ी कुर्सी पर कोई नाम पार्टी ने रिप्लेसमेंट के लिए पहले से तय कर रखा है तो उसके लिए भी फिल्डिंग आज जमती हुई नजर आई। कुछ दावेदार स्वागत समारोह में भी दिखाई दिए। उनका मानना है कि क्या पता दिल्ली के रास्ते उनका सितारा बुलंद हो जाए। कुल मिलाकर आज एयरपोर्ट पर दिखी भीड़ ने एक नई तस्वीर पेश कर दी। अनुपस्थित चेहरों ने दूसरी कहानी बयां कर दी। अब बयानों में सब यही कह रहे हैं कि हमें नहीं पता वे क्यों नहीं आए। उनकी तो वो ही जानें….। मगर सच तो ये है कि दरारों के बीच से झांक रहा कमल अब उदयपुर में पहले से अधिक कमजोर नजर आ रहा हैं। उदयपुर फाइल्स की परछाइयां लाख जतन करने पर भी पीछा करने से बाज नहीं आ रही है।
यह सांगठनिक संकट की भी घड़ी है जिसने दिल्ली दरबार को भी असमंजस में डाल दिया है।

