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गुमनाम है कोई, बदनाम है कोई, किसको खबर,,कौन है वो….???? किशन मेघवाल बोले—वीडियो में मैं नहीं!!!

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24 News Update. उदयपुर। लेकसिटी में आधी रात को सन्नाटे को चीर कर आई सनसनी और उसमें गूंजते बूटों की आवाज के बीच कुछ खास लोग। एकदम पर्सनल लोग, किसी पार्टी के पदाधिकारी टाइप दिखने वाले लोग। किसी खास पर्सनल काम के लिए पहुंचे और सीसीटीवी में साफ साफ कैद हो गए। अब पूरे शहर में चर्चा है कि आखिर ये लोग कौन थे। रात को पुलिस के साथ क्या करने आए थे??? उनकी पहचान पुलिस नहीं बता रही है, मगर सीसीटीवी में ऐसे खास दिखाई दे रहे हैं मानों पुलिस के खासमखास हों। कोई पुरानी जान पहचान हो। पुलिस की चुप्पी है तो वीडियो जनता में बोल रहा है। लोग खुद ही चेहरे देख कर तिलक लगा रहे हैं और कयास लगाने लग गए हैं कि वीडियो आखिर में कौन हैं।
आपको बता दें कि 1 फरवरी की रात 2:20 से 4:15 बजे के बीच चांदपोल में अधिवक्ता विशाल गुर्जर के घर हुई पुलिस कार्रवाई अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुकी है। इतनी रात गए क्या कार्रवाई हुई, क्यों हुई, किसके कहने पर हुई,किसकी मौजूदगी में हुई, किसको बचाने के लिए हुई, किसको न्याय दिलाने के लिए हुई??? वीडियो थे तो कौनसे?? हैं तो कहां हैं?? और गए तो कहां गए?? किस—किस के पास गए?? किसने भेजे?? ऐसे कई सारे सवाल फिजां में बवंडर बनकर तैर रहे हैं। इतने दिन बाद भी कोई बोलने को तैयार नहीं है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ???
इस मामले ने कल और तूल पकड़ लिया जब कार्रवाई से पहले और बाद का सीसीटीवी सामने आ गया। इसके बाद तो सवालों की झड़ी लग गई। वीडियो में पुलिस जवानों के साथ एक कम कद का, सूट-बूट पहने हुआ व्यक्ति दिखाई दिया वो चर्चा में आ गया। वो अफसरों के साथ भी ऐसा कंफर्टेबल होकर बात कर रहा है मानों कोई पुराना नाता हो।
इस वीडियो के सामने आने के बाद से आज शहर में चर्चाएं हो गईं कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति का नैन नक्श कहीं भाजपा पदाधिकारी किशन मेघवाल से मिलता जुलता तो नहीं है।
इस बारे में जब हमने किशन मेघवाल से पूछा तो उन्होंने साफ कर दिया कि वीडियो के बारे में उन्हें नहीं पता। कौन बात कर रहा है उन्हें नहीं पता, उनका मामले से कोई लेना देना नहीं है। बातचीत में मेघवाल ने कहा कि देखो, हमशक्ल तो दस लोग होते हैं। पदाकारी के नाते आना जाना तो सौ लोगों का होता रहता है। कौन क्या कह रहा है इसका आखिर क्या कहें। हमने पूछा कि पुलिस का फोन आया क्या,,,? उन्होंने कहा कि मेरे पास कोई पुलिस वाले या किसी अन्य का फोन नहीं आया है। ये अपने लेवल का मामला ही नहीं है, ना मेरा कोई लेना देना है।
आपको बता दें कि किशन मेघवाल का नाम राजनीतिक गलियारों में नया नहीं है। वे देहात युवा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं, जिला मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं, पूर्व जिला परिषद सदस्य रहे हैं और वर्तमान में एससी मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी में सदस्य बताए जाते हैं। पार्टी की दिशा समिति से भी उनका जुड़ाव है। यानी संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय और पहचाना हुआ चेहरा है। 24 न्यूज अपडेट से बातचीत में उन्होंने साफ कर दिया कि ऐसे किसी भी मामले से उनका कोई वास्ता नहीं है।

पुलिस बताए, आखिर कौन हैं वो औजार लिए हुए कानून के रखवाले

आधी रात पुलिस कार्रवाई के दौरान “सूट-बूट वाला” व्यक्ति सीसीटीवी में दिख रहा है। अन्य लोग भी हैं जिनके हाथ में औजार हैं। वे कौन हैं, पुलिस के साथ हैं तो क्यों हैं? उनकी पहचान क्या है? इतनी रात गए वहां क्या कर रहे हैं? आदि सवालों के जवाब और उन लोगों की पहचान अब पुलिस को ही करनी है।
वीडियो के मुताबिक: रात 2:20 बजे पुलिस जवान गली में पहुंचते हैं। 2:43 बजे गिर्वा डीएसपी गोपाल चंदेल मौके पर पहुंचते हैं। उसी समय एक सूट-बूट पहने व्यक्ति भी पुलिस के साथ घर की ओर बढ़ता है। आभास देता है मानों वह भी किसी अभियान का हिस्सा हो। 4:06 बजे अधिवक्ता विशाल को नंगे पैर पकड़कर ले जाते हुए दो जवान दिखाई देते हैं।
4:08 बजे हथौड़ा और सब्बल लिए दो युवक भी गली में आते-जाते दिखते हैं। उनके पास ही पुलिस वाले भी खड़े हैं।
आपको बता दें कि वकील विशाल की पत्नी और मां ने राज्यपाल, एसपी और आईजी को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि छत से दरवाजा तोड़कर प्रवेश किया गया, मोबाइल छीना गया और मारपीट हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस के साथ दिखाई देने वाला व्यक्ति कौन था? औजार लेकर पहुंचे युवक कौन थे? कहां से आते हैं ऐसे लोग,,,??? यदि वे पुलिस दल में शामिल नहीं थे तो उन्हें रोका क्यों नहीं गया? डीएसपी गोपाल चंदेल ने मीडिया बयान में कहा है कि कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश पर की गई और विधिवत जांच होगी। सवाल ये उठता है कि वो अफसर कौन थे जिन्होंने रात को इस कार्रवाई का आदेश दिया???
आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आमतौर पर एसपी के निर्देश से जांच बदलती है, जिससे “ऊपरी दबाव” की आशंका जताई जा रही है।
अब पुलिस को भी किशन मेघवाल को राहत दिलाने के लिए नाम का खुलासा करना चाहिए कि आखिर वो व्यक्ति कौन था जिसकी वजह से मेघवाल के होने का लोगों में भ्रम हुआ।

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