24 News Update बडोदिया(बांसवाड़ा) 7 फरवरी। जब भक्ति संगठित होती है, तब पहाड़ भी साक्षी बनते हैं। बांसवाड़ा–मुंबई हाईवे मार्ग पर बडोदिया-चोखला के समीप 1500 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित वागड़ का पावागढ़—नंदनी माता शक्ति पीठ शनिवार को उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब मंदिर शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत स्वर्ण शिखर, श्रद्धा, वैदिक अनुष्ठान और जनसैलाब एक साथ शिखर पर पहुंचे।
माघ–फाल्गुनी कृष्ण षष्ठी के पावन अवसर पर आयोजित 51 कुण्डीय शतचंडी, गणेश याग एवं रुद्र भैरव याग महायज्ञ ने पूरे वागड़ को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी में इस धाम पर दिनभर श्रद्धा की सरिता बहती रही।

यज्ञ वेदी से शिखर तक—वैदिक विधि का पूर्ण अनुष्ठान :

प्रातःकालीन वेला में कार्यक्रम के प्रधान आचार्य किशोर शुक्ला एवं सह आचार्य कपिल भाई शास्त्री के निर्देशन में प्रतिष्ठा कर्म संपन्न हुए। पं. पंकज जोशी, राहुल जोशी, हरिओम पाठक, संदीप पाठक, ललित जोशी, राजेश उपाध्याय, सतिश जोशी सहित कुल 65 ब्राह्मणों द्वारा आज प्रातः पूजन, स्थापित देवता पूजन, देवप्रबोधक, पिण्डीकाधिवास, शिखर मूर्ति प्रतिष्ठा, कीर्ति स्तंभ प्रतिष्ठा, 81 कलशात्मक प्रसादस्नपन, हवन दण्ड प्रतिष्ठा, व्याप्तिहोम, उत्तर पूजन, एवं पूर्णाहुति वैदिक विधि से सम्पन्न कराई गई। यज्ञाग्नि से उठती आहुतियों में वागड़ सहित विश्व मंगल की कामना की गई।

शोभायात्रा: जब भक्ति स्वयं चल पड़ी :
नंदनी माता विकास समिति के भूपेश पटेल एवं मुदित जोशी ने बताया कि दो वर्षों के अथक परिश्रम और भक्तों के सहयोग से निर्मित यह विशाल श्वेत पाषाण मंदिर आज दूर-दूर तक श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहा है।
शनिवार को दोपहर बारह बजे पुण्यार्जक यजमान परिवारों ने सिर पर शिखर, ध्वजदण्ड और गणेश प्रतिमा धारण कर डम-डम डमरू की गूंज के साथ मां नंदनी के दरबार की परिक्रमा करते हुए भव्य शोभायात्रा निकाली।
समिति अध्यक्ष जितेंद्र पाटीदार के सानिध्य में शिखर के प्रधान कुंड के यजमान अशोक (पुत्र हिरालाल प्रजापत) परिवार सहित सभी 51 कुंडीय यजमान परिवारों ने हवन में पूर्णाहुति देकर वागड़ सहित विश्व कल्याण की प्रार्थना की।

स्वर्णिम शिखर और गगनचुंबी ध्वजा :

समिति के विट्ठल पाटीदार एवं दीपक ठाकुर ने बताया कि जैसे ही मुख्य मंदिर पर शिखर के यजमान रूपेंग सोलंकी (पुत्र लवजी सोलंकी) नाथी बाई सोलंकी छींच सपरिवार ने मंत्रोच्चारण के साथ शिखर स्थापना की, वैसे ही चारों दिशाओं से जयकारों की गूंज उठी। इस दौरान ढोल-नगाड़े, शहनाई आदि के समवेत स्वरों से पूरा धाम गुंजायमान हो उठा।
शिखर से फैलती स्वर्णिम आभा धरती से आकाश तक श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती प्रतीत हुई।
ध्वजदण्ड स्थापना के यजमान दली धर्मपत्नी प्रेमजी पाटीदार तथा हीरालाल पुरुषोत्तम सुथार ने विधिवत ध्वजदण्ड स्थापित किया। वागड़ की सबसे ऊंची पहाड़ी पर लहराती ध्वजा ने चारों दिशाओं में शुभ संकेतों का संदेश दिया।

मां के आंगन में गणेश, सिंह वाहन और श्री यंत्र की प्रतिष्ठा :

समिति अध्यक्ष जितेंद्र पाटीदार एवं जगदीश पाटीदार ने बताया कि शिखर प्रतिष्ठा के यजमान: नितेश कलाल (पुत्र छगनलाल कलाल), सिंह वाहन के यजमान: विवेकानंद महाराज, गणेश मूर्ति स्थापना के यजमान: पन्नालाल सुथार (पुत्र वखतराम सुथार),घंटा वादन के यजमान: लालसिंह सोलंकी (पुत्र नारेंग सोलंकी), श्री यंत्र स्थापना के यजमान: सुरेशचंद्र सुथार (पुत्र भुरालाल सुथार) द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सभी प्रतिष्ठाएं सम्पन्न कराई गईं।
राजेन्द्र पाटीदार (पुत्र रणछोड़ पाटीदार), चौखला परिवार ने मां के श्रृंगार की सामग्री भेंट की।

फाल्गुनी गीतों में रंगी भक्ति :

“होली खेले मोरी माता, शिखर वन में, नंदन वन में…”
प्रातःकाल से ही महिला मंडल फाल्गुनी गीत गाते हुए पहाड़ी की सीढ़ियां चढ़ते रहे। गुलाबी पुष्पों से सुसज्जित मां की प्रतिमा, सुवासित यज्ञ मंडप और भक्ति से सराबोर वातावरण में श्रद्धालुओं को ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं मां नंदनी भक्तों संग होली खेल रही हों।

महाप्रसाद में सेवा का विस्तार :

हजारों श्रद्धालुओं के लिए चौथे दिन के दातार गोविंद पाटीदार, चौखला परिवार द्वारा दिनभर महाप्रसाद का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।
जनप्रतिनिधियों और समाजजनों की सहभागिता इस अवसर पर हाडखरा पटेल समाज एवं लेउवा पाटीदार समाज के बडोदिया, ईटाउवा, पाडीकला, सालिया, नादिया, छत्रसालपुर, बालावाड़ा, बुडवा, बांसला, बागीदौरा, पिपलोद, राखो, लेउवा, चौखला, पिंडारमा, नौमामा, खोखरवा, सुरवानिया, करजी सहित विभिन्न गांवों के पंचगण उपस्थित रहे।
साथ ही रामगिरी महाराज, बागीदौरा विधायक जयकृष्ण पटेल, राष्ट्रीय सरदार पटेल सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जिला कार्यकारिणी सदस्य, हमीरपुरा सरपंच राकेश रावत, बांसला सरपंच दिलीप सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई।

वागड़ की आस्था का स्थायी शिखर
यह आयोजन केवल मंदिर शिखर की स्थापना नहीं था—
यह वागड़ की सामूहिक श्रद्धा, संगठन और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव था। वागड़ का पावागढ़—नंदनी माता धाम अब इतिहास, आस्था और भविष्य की उम्मीद—तीनों का संगम बन चुका है।

नंदनी माता प्रतिष्ठा महोत्सव में उम्र की सीमाएं टूटीं, आस्था बनी शक्ति

बडोदिया। वागड़ के पावागढ़ कहे जाने वाले नंदनी माता धाम में चल रहे शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान आस्था की ऐसी मिसालें सामने आईं, जिन्होंने हर किसी को भावुक कर दिया। महोत्सव में उम्रदराज श्रद्धालुओं ने कठिन पहाड़ी चढ़ाई कर यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची भक्ति के आगे उम्र और शारीरिक सीमाएं भी बौनी पड़ जाती हैं।
90 वर्षीय दली धर्मपत्नी प्रेमजी पाटीदार ने लगभग एक घंटे में पहाड़ी की चढ़ाई पूरी कर मां नंदनी के दर्शन किए। वहीं 75 वर्षीय रशी देवी, धर्मपत्नी रणछोड़ पाटीदार, सांस लेने में समस्या होने के बावजूद माता के दरबार तक पहुंचीं और दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
इसी क्रम में 95 वर्षीय बबली रावत, धर्मपत्नी रूपा रावत (चिरोला) ने भी कठिन चढ़ाई तय कर नंदनी माता के दर्शन किए।


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