24 News update जयपुर, 6 अक्टूबर। राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में रविवार देर रात भयावह हादसा हुआ। ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो आईसीयू में अचानक आग लगने से आठ मरीजों की मौत हो गई, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं। हादसे के वक्त आईसीयू में ग्यारह मरीज भर्ती थे, जबकि बगल वाले वार्ड में तेरह मरीज थे।

स्टोर रूम से उठी आग, मिनटों में भर गया धुआं
रात करीब 11 बजकर 20 मिनट पर आग न्यूरो आईसीयू के स्टोर रूम में भड़की, जहां पेपर, मेडिकल उपकरण और ब्लड सैंपलिंग ट्यूब रखे थे। ट्रॉमा सेंटर के नोडल अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका है। आग लगते ही पूरे वार्ड में धुआं फैल गया, जिससे कई मरीजों का दम घुट गया।

फायर ब्रिगेड ने तोड़ी खिड़कियां, डेढ़ घंटे में पाया काबू
दमकल विभाग के कर्मचारी अलार्म बजते ही मौके पर पहुंचे, लेकिन वार्ड पूरी तरह धुएं से भर चुका था। दरवाजों से अंदर जाना असंभव था, ऐसे में टीम ने बिल्डिंग की दूसरी ओर की खिड़कियां तोड़कर पानी की बौछार की। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। सभी मरीजों को बेड समेत बाहर लाकर ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट किया गया।
फायरकर्मियों के अनुसार,
“धुआं इतना गाढ़ा था कि एक कदम आगे दिखना भी मुश्किल था। मरीजों को स्ट्रेचर और बेड समेत बाहर निकालना पड़ा। कई लोग धुएं से बेहोश मिले।”
लोगों ने कहा — ‘धुआं उठ रहा था, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया’
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और अन्य मरीजों के रिश्तेदारों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना था कि आग भड़कने से करीब 20 मिनट पहले ही धुआं उठना शुरू हो गया था, लेकिन स्टाफ ने इसे नजरअंदाज कर दिया।
परिजनों के अनुसार, स्टाफ ने कहा कि “शायद मशीन गरम हो रही होगी,” और कुछ देर बाद ही आईसीयू से चीख-पुकार की आवाजें आने लगीं। अचानक बिजली बंद हो गई, चारों ओर अंधेरा छा गया और धुआं फैल गया। अफरा-तफरी के बीच परिजनों ने खुद दरवाजे तोड़कर मरीजों को बाहर निकालने की कोशिश की। कई मरीजों को ऑक्सीजन पाइप से जुड़े हुए ही बाहर खींचना पड़ा।
रिश्तेदारों का कहना है कि यदि शुरू में ही सतर्कता बरती जाती, तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती।
शासन ने गठित की 6 सदस्यीय जांच कमेटी
घटना के बाद राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी को तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि,
“यह बेहद दुखद और अस्वीकार्य घटना है। प्रारंभिक जांच में लापरवाही के संकेत मिले हैं। दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
अस्पताल परिसर में मचा हड़कंप
घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन वार्ड के बाहर रोते-बिलखते नजर आए। फायर अलार्म की आवाज और सायरनों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। देर रात तक अधिकारी मौके पर डटे रहे और अस्पताल प्रबंधन ने आईसीयू के सभी मरीजों को अन्य वार्डों में शिफ्ट किया।
सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
यह हादसा एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आईसीयू जैसी संवेदनशील यूनिट में यदि फायर अलार्म और स्मोक कंट्रोल सिस्टम समय पर काम नहीं कर सके, तो यह केवल तकनीकी नहीं बल्कि प्रबंधन की विफलता भी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है- राजस्थान के जयपुर स्थित एक हॉस्पिटल में आग लगने से हुई जान-माल की हानि अत्यंत दुखद है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदना। ईश्वर करे कि घायल शीघ्र स्वस्थ हों।
डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने रद्द किए कार्यक्रम
जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटना पर डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने गहरा दुख जताया है।
उन्होंने कहा कि मरीजों की जनहानि का समाचार अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। हादसे की सूचना मिलने के बाद उन्होंने चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ के अपने कार्यक्रम स्थगित कर दिए।
उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही, हादसे में घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
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