24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाहों की संभावनाओं को देखते हुए उदयपुर संभाग में प्रशासन और सामाजिक संगठनों की सतर्कता ने बड़ा असर दिखाया। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस, जिला प्रशासन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बाल अधिकारिता विभाग, गायत्री सेवा संस्थान और चाइल्ड हेल्पलाइन के संयुक्त प्रयास से संभागभर में अब तक कुल 47 बाल विवाहों को रोका गया। इन कार्रवाइयों में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के तहत न्यायालय से निषेधाज्ञा भी जारी करवाई गई।
बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं राजस्थान बाल आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. शैलेन्द्र पंड्या ने बताया कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस द्वारा चलाए गए विशेष जागरूकता अभियान में आम नागरिकों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और बाल विवाह की सूचनाएं प्रशासन तक पहुंचाईं। उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन उदयपुर जिले में तीन बाल विवाहों को मौके पर रोका गया, जबकि जिलेभर में कुल 15 बाल विवाहों पर कार्रवाई की गई। चित्तौड़गढ़ में 15, प्रतापगढ़ में 13 और सलूम्बर क्षेत्र में 4 बाल विवाह रुकवाए गए।
एक मामले में गायत्री सेवा संस्थान द्वारा न्यायालय में दायर परिवाद पर निषेधाज्ञा जारी की गई, जिससे विवाह को रोका जा सका। यह कार्रवाई सामाजिक और कानूनी समन्वय का सशक्त उदाहरण बनी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उदयपुर के सचिव कुलदीप शर्मा ने बताया कि बाल विवाह कराना ही नहीं, बल्कि उसमें किसी भी प्रकार से सहयोग करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। विवाह में शामिल होने वाले ढोली, पंडित, मौलवी या सेवा प्रदाता भी कानूनन दोषी माने जाते हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे समाज को बाल विवाह जैसी कुप्रथा से मुक्त करने में प्रशासन का साथ दें और ऐसे मामलों की सूचना तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन या संबंधित अधिकारियों को दें।
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