24 न्यूज अपडेट, जोधपुर। राजस्थान में कोरोना एक बार फिर से धीरे-धीरे पांव पसारने लगा है। जोधपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 39 दिन का एक नवजात शिशु कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। यह बच्चा जन्म से ही एम्स के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती है। जन्म 16 अप्रैल को एम्स में ही हुआ था और तभी से वह एनआईसीयू में विशेष निगरानी में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रविवार को प्रदेश में कुल तीन कोरोना मरीज सामने आए हैं। इनमें जोधपुर एम्स का यह नवजात, उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज में भर्ती एक युवक और जयपुर में अजमेर जिले के केकड़ी निवासी 68 वर्षीय एक बुजुर्ग शामिल हैं। तीनों को अलग-अलग मेडिकल निगरानी में रखा गया है। नवजात के पॉजिटिव आने पर मेडिकल जांच बढ़ाई गई डीडवाना निवासी दंपति के इस नवजात के पॉजिटिव मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सकते में है। विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि शिशु जन्म से ही अस्पताल में था, ऐसे में संक्रमण का स्रोत अस्पताल के भीतर ही कहीं होने की आशंका है। इसके चलते जोधपुर एम्स में हाल ही में भर्ती अन्य चार कोविड पॉजिटिव मरीजों की हिस्ट्री को भी खंगाला जा रहा है, ताकि संक्रमण की कड़ी को समझा जा सके। चार महीने में 15 केस: राहत नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी राजस्थान में इस साल के शुरुआती चार महीने और 25 दिनों के भीतर कुल 15 कोरोना केस सामने आ चुके हैं। इनमें फलोदी, बीकानेर, सवाई माधोपुर से एक-एक, कुचामन, अजमेर, जोधपुर से दो-दो और जयपुर व उदयपुर से तीन-तीन मरीज संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि अधिकांश मरीजों को रूटीन दवाओं से आराम मिल गया और गंभीर स्थिति नहीं बनी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सभी मामलों की बारीकी से निगरानी कर रहा है। JN.1 वेरिएंट बना चिंता का विषय विशेषज्ञों के अनुसार, कोरोना वायरस का नया सब-वेरिएंट JN.1, जो ओमिक्रॉन के BA.2.86 वंश का हिस्सा है, वर्तमान में दुनिया के कई देशों में तेजी से फैल रहा है। भारत में भी इसी वेरिएंट के केस सामने आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे दिसंबर 2023 में ‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया था। JN.1 में लगभग 30 म्यूटेशन्स मौजूद हैं, जो इसे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से छिपाने में मदद करते हैं। यही वजह है कि यह वेरिएंट प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर सकता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों में। लक्षण हल्के, लेकिन लम्बे समय तक टिक सकते हैं इस वेरिएंट के सामान्य लक्षणों में गले में खराश, हल्का बुखार, बदन दर्द, थकान और कभी-कभी डायरिया या खांसी शामिल हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में लक्षण हल्के रहते हैं, परंतु कुछ मरीजों में लॉन्ग कोविड के लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं — यानी कोविड संक्रमण खत्म होने के बाद भी थकान, सांस की कमी, या ब्रेन फॉग जैसी समस्याएं बनी रह सकती हैं। विशेषज्ञों की राय: सतर्कता ही सुरक्षा हेल्थ डिपार्टमेंट की प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ के अनुसार, नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) द्वारा आयोजित हालिया समीक्षा बैठक में बताया गया कि JN.1 घातक नहीं है, लेकिन तेजी से फैल सकता है। ऐसे में मास्क पहनना, भीड़भाड़ से बचना और हाथों की स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है। टीकाकरण और निगरानी पर जोर डॉक्टरों का मानना है कि जिन लोगों को बूस्टर डोज नहीं लगी है, वे जल्द से जल्द टीकाकरण करवा लें। साथ ही, जिन क्षेत्रों से पॉजिटिव केस आ रहे हैं, वहां सैंपलिंग और जीनोम सिक्वेंसिंग पर जोर दिया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस वेरिएंट का प्रसार हो रहा है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation 4 राज्यों में मानसून, महाराष्ट्र में भारी बारिश; दिल्ली की फ्लाइट्स डायवर्ट, हिमाचल में बादल फटा लालू यादव ने तेज प्रताप को पार्टी और परिवार से निकाला: 12 साल पुराने रिश्ते का खुलासा बना कारण