24 न्यूज अपडेट, जयपुर। आईपीएस अधिकारी मनीष अग्रवाल पर दौसा जिले म्ै। एसपी के पद पर भ्रष्टाचार करने के कई आरोप थे। एसीबी ने मामला दर्ज किया था। अग्रवाल को एक्सप्रेस- वे बनाने वाली कंपनी से घूस लेने के आरोप में 2 फरवरी, 2021 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले 13 जनवरी को दलाल नीरज मीणा को गिरफ्तार किया था। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस वे बनाने वाली दो कंपनियों से लाखों रुपए घूस लेने के आरोप लगे। मनीष 2 फरवरी 2021 से सस्पेंड थे। सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिक जांच में लिप्त पाए जाने पर निलंबित कर दिया था। 9 जुलाई 2021 को एसीबी की ओर से अभियोजन प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए थे। कार्मिक विभाग की ओर से 16 जुलाई 2021 को जांच अधिकारी से प्रकरण के संबंध में विचार-विमर्श किया, एसीबी ने अब स्पष्ट किया है कि अग्रवाल को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था। अब जाकर 13 मई 2024 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने एक अनुशंसा की व रिव्यू कमेटी की बैठक में अग्रवाल को बहाल करने की अनुशंसा हुई जिसके बाद कार्मिक विभाग ने किया बहाली का आदेश जारी किया।
27 पुलिसकर्मियों के नाम शामिल थे, उनका क्या हुआ
एसीबी के एक अधिकारी ने तब मीडिया को बतया था कि एक रिजस्टर में कुछ नोट लिखे मिले। इसी के माध्यम से भ्रष्टाचार का खेल चल रहा था। नोट अग्रवाल के सबऑर्डिनेटर में से एक ने 16 अक्टूबर, 2019 और 5 जुलाई, 2020 के बीच पुलिस अधीक्षक जीआरपी (सरकारी रेलवे पुलिस) में अपनी पोस्टिंग के दौरान जमा किए थे। 10 से अधिक पुलिस जिले उसके अधिकार क्षेत्र में थे। रजिस्टर में 27 पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं जिसमें कांस्टेबल से लेकर अलवर, जयपुर, भरतपुर, अजमेर, कोटा, अबू रोड, गंगापुर सिटी, हिंदौन चौकी, बांदीकुई और झालावाड़ में तैनात पुलिसकर्मियों का नाम था। 27 पुलिसकर्मियों के नाम के साथ साफ लिखा हुआ था कि उन्होंने कब, किससे और कितने पैसे घूस के तौर पर लिए थे। तब सीबी को संदेह था कियह डीटेल पूर्व एसपी कार्यालय के खुफिया या सतर्कता विंग में तैनात किसी पुलिसकर्मी द्वारा दर्ज किए गए। आईपीएस अधिकारी मनीष अग्रवाल के एक सबऑडिनेट ने रजिस्टर में अग्रवाल को संबोधित करते हुए लिखा, “जय हिंद सर! हमें इन पुलिसकर्मियों को अलग से बुलाना चाहिये. यदि आप उन्हें अपने स्तर पर सवाल जवाब करते हैं तो वे निश्चित रूप से बोलेंगे. अगर उन्हें धमकी दी जाती है, तो वे सच बोलेंगे। ” अब सवाल यह है कि क्या सच बोला गया, क्या सच सामने आया।
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