24 न्यूज अपडेट. नेशनल डेस्क। पिछले कुछ वर्षों में ई-कचरे का उत्पादन बढ़ा है और उपभोक्ताओं द्वारा विद्युतीय एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (ईईई) के बढ़ते उपयोग के कारण इसमें दिन-प्रतिदिन वृद्धि हुई है। यह आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति का परिणाम है। मंत्रालय ने ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2016 को व्यापक रूप से संशोधित किया है और नवंबर, 2022 में ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 को अधिसूचित किया है। यह 1 अप्रैल, 2023 से लागू है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य और पर्यावरण को ई-कचरे से होने वाले किसी भी प्रतिकूल प्रभाव से बचाना है। इन नए नियमों का उद्देश्य पर्यावरण की दृष्टि से ई-कचरे का प्रबंधन करना तथा ई-कचरे के पुनर्चक्रण के लिए उन्नत विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) व्यवस्था लागू करना है, जिसके तहत सभी विनिर्माता, उत्पादक, नवीनीकरणकर्ता और पुनर्चक्रणकर्ता को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा विकसित पोर्टल पर पंजीकरण कराना आवश्यक है।नए प्रावधानों से असंगठित क्षेत्र को व्यवसाय करने के लिए संगठित क्षेत्र में लाने में सुविधा होगी और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से ई-कचरे का पुनर्चक्रण सुनिश्चित होगा। इसमें पर्यावरण क्षतिपूर्ति और सत्यापन एवं लेखा परीक्षा के प्रावधान भी पेश किए गए हैं। ये नियम ईपीआर व्यवस्था और ई-कचरे के वैज्ञानिक पुनर्चक्रण/निपटान के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देते हैं।वर्तमान में सीपीसीबी के साथ 322 रिसाइकिलर और 72 रिफर्बिशर पंजीकृत हैं जो उत्पन्न ई-कचरे की रिसाइकिलिंग/रिफर्बिशिंग की सेवाएं प्रदान करते हैं। 322 पंजीकृत रिसाइकिलर की प्रसंस्करण क्षमता 09.02.2025 तक 22,08,918.064 मीट्रिक टन प्रति वर्ष है और 72 पंजीकृत रिफर्बिशर की प्रसंस्करण क्षमता 92,042.18 मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। इसके अलावा, सीपीसीबी ने ई-कचरा नियमों के प्रभावी प्रबंधन के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैंःसीपीसीबी द्वारा एक ऑनलाइन ईपीआर ई-वेस्ट पोर्टल विकसित किया गया है, जहां ई-कचरे के उत्पादकों, निर्माताओं, पुनर्चक्रणकर्ताओं और नवीनीकरणकर्ताओं जैसी संस्थाओं को पंजीकृत होना आवश्यक है।सीपीसीबी ने ई-कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। इन दिशा-निर्देशों में पर्यावरण के अनुकूल तरीके से ई-कचरे के पुनर्चक्रण के लिए आवश्यक मशीनरी और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के संदर्भ में प्रक्रियाओं और सुविधाओं का विवरण दिया गया है।ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के कार्यान्वयन के लिए एक कार्य योजना बनाई गई है और इसे सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी)/प्रदूषण नियंत्रण समितियों (पीसीसी) द्वारा अपने-अपने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है। एसपीसीबी/पीसीसी तिमाही प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहे हैं। कार्य योजना में अनौपचारिक ई-कचरा गतिविधियों की जाँच के लिए कार्य बिंदु हैं और एसपीसीबी/पीसीसी को अनौपचारिक ई-कचरा गतिविधियों की जाँच के लिए नियमित अभियान चलाने के लिए कहा गया है। ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के नियम 10(1) के तहत राज्य सरकार को मौजूदा और आगामी औद्योगिक पार्क, एस्टेट और औद्योगिक क्लस्टरों में ई-कचरा के निराकरण और पुनर्चक्रण के लिए औद्योगिक स्थान या शेड का चिह्नांकन या आवंटन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।सीपीसीबी ने ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, 2022 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एसपीसीबी/पीसीसी को निम्नलिखित निर्देश जारी किएःजल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 18 (1) (बी) के तहत अनौपचारिक ई-कचरा गतिविधियों की जांच, ई-कचरे के अधिकृत विघटनकर्ताओं/पुनर्चक्रणकर्ताओं के सत्यापन और व्यापक जागरूकता अभियान के संबंध में दिनांक 06.09.2022 के निर्देश। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के अंतर्गत ऑनलाइन ई-कचरा ईपीआर पोर्टल पर उत्पादकों, निर्माताओं, पुनर्चक्रणकर्ताओं और नवीनीकरणकर्ताओं के पंजीकरण के संबंध में दिनांक 30.01.2024 के निर्देश। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए उत्पादकों के ईपीआर दायित्वों की पूर्ति हेतु ई-कचरा पुनर्चक्रणकर्ताओं द्वारा ईपीआर प्रमाणपत्रों का सृजन सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के अंतर्गत दिनांक 14.02.2024 के निर्देश। केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation 2 लाख देकर बनी थी ममता कुलकर्णी महामंडलेश्वर, विवाद के बाद छोड़ा पद, बोली-मैं 25 वर्षों से साध्वी हूं, आगे भी रहूंगी राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्रदास को जल समाधि