24 News Update उदयपुर। भूपाल नोबल्स (बीएन) संस्थान में विद्या प्रचारिणी सभा की एडहॉक कमेटी और पूर्व कार्यकारिणी के बीच विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार को जारी प्रेस नोट और मीडिया ब्रीफिंग में एडहॉक कमेटी ने पूर्व पदाधिकारियों पर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं।प्रधान संरक्षक मेवाड़ के महाराणा व नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ द्वारा गठित एडहॉक कमेटी के चेयरमैन डॉ. युवराज सिंह झाला ने कहा कि संस्था में पारदर्शिता लाने और निष्पक्ष एक्सटर्नल ऑडिट कराने के प्रयासों में लगातार बाधाएं डाली जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 9 सितंबर 2025, 15 फरवरी 2026, 30 मार्च 2026 और 12 अप्रैल 2026 को प्रबंधन समिति को पत्र जारी किए गए, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।आज एडहॉक कमेटी की प्रेसवार्ता में बताया गया कि पिछले करीब 25 वर्षों से एक ही गुट का वर्चस्व रहा है और इसी दौरान निष्पक्ष एक्सटर्नल ऑडिट नहीं होने दिया गया। वर्ष 2017 और 2022 में ऑडिट के दौरान अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है, जबकि 2025 में ऑडिट टीम को कार्यालय में प्रवेश तक नहीं दिया गया। कमेटी के अनुसार ऑडिटरों द्वारा 60 से अधिक इंक्वायरी मेमो जारी किए गए, लेकिन आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। यहां तक कि ऑडिट टीम के साथ अभद्र व्यवहार और उन्हें डराने-धमकाने के आरोप भी लगाए गए हैं।26 करोड़ की एफडी पर किसने किए जाली हस्ताक्षरकमेटी ने 26 करोड़ रुपए की एफडी को जाली हस्ताक्षरों के जरिए तुड़वाने का आरोप भी लगाया है। प्रेस नोट में कहा गया है कि यूनिवर्सिटी की चेकबुक पर रजिस्ट्रार या सीएफओ की जगह अन्य व्यक्तियों ने हस्ताक्षर किए। साथ ही यह भी आरोप है कि बैंक स्तर पर मिलीभगत कर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। इसके अलावा, शिकारबाड़ी क्षेत्र स्थित संस्थान की करोड़ों रुपए मूल्य की जमीन को निजी हित में उपयोग करने की साजिश का भी जिक्र किया गया है।भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कमेटी के अनुसार, रिश्तेदारों को फर्जी मार्कशीट के आधार पर नियुक्तियां दी गईं और नियमों के विरुद्ध प्रोफेसर ग्रेड प्रमोशन दिए गए। इसके अलावा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से आयोजित NEET परीक्षा में अयोग्य व्यक्तियों—जिनमें दसवीं पास, स्टाफ के परिजन और अन्य गैर-योग्य लोग शामिल बताए गए—को ड्यूटी में लगाए जाने का दावा किया गया है। विवाद की वजह परिवारवादएडहॉक कमेटी के सदस्य नरेंद्र सिंह कच्छवा ने कहा कि संस्था में विवाद की प्रमुख वजह ‘परिवारवाद’ है। उनके अनुसार, 700 से 800 आवेदनों को दरकिनार कर सीमित संख्या में पारिवारिक सदस्यों को ही सदस्य बनाया गया। वर्ष 2025 में सदस्यता प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी कर बड़ी संख्या में एक ही परिवार से जुड़े लोगों को शामिल करने के आरोप लगाए गए हैं। यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जिसकी अगली सुनवाई 5 मई को प्रस्तावित है। बताया गया कि 12 फरवरी को कार्यकाल समाप्त होने के बाद कोर्ट के निर्देश पर 11 सदस्यीय एडहॉक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी को संस्थान का बाहरी ऑडिट कराने और वित्तीय मामलों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 12 फरवरी से 12 अप्रैल तक पूर्व कार्यकारिणी को ऑडिट में सहयोग के निर्देश दिए गए थे, लेकिन सहयोग नहीं मिलने पर 12 अप्रैल को एडहॉक कमेटी को पूर्ण अधिकार सौंप दिए गए। इसके बाद पूर्व पदाधिकारियों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की जानकारी भी सामने आई है।प्रेस नोट में एडहॉक कमेटी ने पूरे घटनाक्रम को संस्था में पारदर्शिता स्थापित करने और अनियमितताओं की जांच से जोड़ा है। वहीं, विवाद के बीच चित्तौड़गढ़ के पूर्व जिला प्रमुख भेरू सिंह चौहान के खिलाफ भूपालपुरा थाने में मामला दर्ज होने का भी उल्लेख किया गया है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation बाइक पर तलवार लहराने वाला बदमाश गिरफ्तार, पावर बाइक व हथियार बरामद लंबे समय से फरार 2 स्थायी वारंटी गिरफ्तार, ऋषभदेव पुलिस की कार्रवाई