रिपोर्ट : जयवंत भैरविया24 न्यूज अपडेट उदयपुर। शहर के प्रथम नागरिक का दर्जा प्राप्त महापौर कहने के लिये जनता द्वारा चुने गए, जनता के लिये कार्य करने वाले जनप्रतिनिधि होते हैं लेकिन पद पर आसीन होने के बाद कई बार किसी अन्य सरकारी अधिकारी के समान ही व्यवहार और कार्यशैली रखने के कारण जनप्रतिनिधि वाली कोई बात नजर नहीं आती। आम जनता बडी उम्मीद में नगर निगम के महापौर के पास अपनी समस्या लेकर जाती है, कई बार महापौर व्यस्त होने का कारण बता मिलते नहीं या फिर उनका समय आम जनता के लिये उपलब्ध नहीं होता।नगर निगम में महापौर आरटीआई एक्ट में प्रथम अपीलीय अधिकारी होते है लेकिन कुछ नगर निगम में महापौर को ये दायित्व भी बोझ लगता है, इसलिए कभी अपील की सुनवाई नहीं करते जिसकी वजह से अपीलार्थियों का समय, श्रम और धन आयोग में द्वितीय अपील करने में नष्ट हो जाता है। महापौर से जो उम्मीद आम जनता जनता का प्रतिनिधि समझ कर करती है वो अक्सर धूमिल होती ही नजर आती है। इसके अलावा विभागीय घोटालों और अनियमताओ को उजागर करने में जो भूमिका महापौर की होनी चाहिए वो भूमिका किसी किसी नगर निगम में 5 साल के लिये कोमा में ही चली जाती है। सवाल उठते है कि जनता द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधि महापौर को जनता के टैक्स से क्या क्या सुख सुविधाएं एवं भत्ते मिलते है ? इस संबंध में जब बीकानेर नगर निगम में आरटीआई के जरिए सूचना मांगी गई तो न तो लोक सूचना अधिकारी और पदासीन आयुक्त ने कोई जवाब दिया और न ही प्रथम अपीलीय अधिकारी महापौर ने सुनवाई करने में कोई रुचि दिखाई। आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई थी ये सूचनाएं(1) बीकानेर नगर निगम के महापौर के अधिकार एवं शक्तियों की सत्यापित सूचना प्रदान की जाए(2) बीकानेर नगर निगम के महापौर को नगर निगम द्वारा प्रदत्त वाहन पर होने वाले मासिक खर्च की सत्यापित सूचना प्रदान की जाए(3) बीकानेर नगर निगम के महापौर को नगर निगम द्वारा प्रदत्त ऑफिस व उसमें लगें ंब के बिल की सत्यापित सूचना प्रदान की जाए(4) बीकानेर महापौर को मिलने वाले भत्तों और निजी सहायक के नाम व पदनाम की सत्यापित सूचना प्रदान की जाएआरटीआई के संदर्भ बीकानेर के आयुक्त एवं लोक सूचना अधिकारी द्वारा कोई जवाब नही दिया गया तत्पश्चात की गई प्रथम अपील के बाद भी बीकानेर महापौर ने सुनवाई करना उचित नही समझा। मामला राज्य सूचना आयोग पहुँचा जिसमें आयुक्त की ओर से अधिवक्ता रिशाल शर्मा ने पैरवी करते हुए सूचना को तृतीय पक्ष से सम्बंधित बता अपील खारिज करने की मांग की। प्रत्यर्थी के उत्तर को विधिसम्मत एवं तर्कपूर्ण नहीं मानते हुए सूचना आयुक्त मोहनलाल लाठर ने अपील को स्वीकार किया और आवेदन में चाही गई सूचना को विहित समयावधि में देने की बाध्यता बताते हुए 21 दिन में सूचना प्रार्थी को जरिये रजिस्टर्ड डाक प्रेषित करने के निर्देश दिए।सूचना आयोग का यह निर्णय पूरे राज्य के लिये जनउपयोगी बन गया है, अब राज्य की किसी भी नगर निगम में महापौर को मिलने वाली सुख सुविधाओं, वेतन भत्तों और वाहन पर होने वाले मासिक खर्च की सूचना आम जनता आरटीआई के अंतर्गत जान सकती है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation खटीक समाज राष्ट्रीय संगटन करवाएगा 51 जोडो का निशुल्क सामूहिक विवाह: बागडीबुधवार से प्रारंभ हुए रजिस्ट्रेशन, किसी से एक पैसा नहीं लेंगे विद्यापीठ – नेक की तैयारियॉ जोरो परडीन, डायरेक्टर, विभागाध्यक्षों की हुई बैठकनेक गाईड लाईन के अनुसार करें तैयारी- प्रो. सारंगदेवो