सुविवि में एसएफएबी बोर्ड से नियुक्त कर्मचारियों की जारी रही हड़ताल 24 न्यूज अपडेटdesk24newsupdate@gmail.com24 न्यूज अपडेट उदयपुर। मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के एसएफएबी कर्मचारियो की अभूतपूर्व हड़ताल का आज भी व्यापक असर देखने को मिला। आज सुबह कई विद्यार्थी परीक्षा देने पहुंचे तो पता चला कि एग्जाम 21 से 30 तक के पोस्टपोन कर दिए गए हैं। ऐसे मेंं गांवों से आए छात्रों को खूब परेशानी हुई। उनका कहना था कि विवि की अदूरदर्शिता के कारण उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। इसी प्रकार टीसी-माइग्रेशन आदि के लिए आए विद्यार्थी भी खासे परेशान हुए। आपको बता दें कि सुविवि प्रशासन ने इस मामले को शुरू से ही हल्के में लिया और बिना पूर्वानुमान लगाए एक ही आदेश से 327 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता बता दिया। यही नहीं उनका दो महीने का वेतन भी होली के त्योहार पर रोक दिया। इसे लेकर सुविवि के वीसी सहित अन्य अधिकारियों की आज पूरे शैक्षणिक जगत में काफी आलोचना की जा रही है। उनके इस कदम को असंवदेनशील कदम बताया जा रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि बिना अनुमान के कर्मचारियों को निकालने से परीक्षा रद्द करने जैसा कदम उठाना पड़ा। ऐसा विवि के इतिहास में आज तक नहीं हुआ। परीक्षाओं के आगे बढ़ने से विद्यार्थियों को जो भारी नुकसान होगा उसकी भरपाई आखिर कौन करेगा। जानकारों का कहना है कि सुविवि के अधिकारियों ने एसी रूम में बैठकर ही कर्मचारियों को निकालने का आदेश निकाल दिया। ग्राउंड जीरो पर फीडबैक नहीं लिया। उनके लगा कि एक बार कर्मचारियों को समझा-बुझा कर ओैर आचार संहिता का हवाला लेकर मना लेंगे और काम चल जाएगा। बाद का बाद में देखा जाएगा मगर यह निर्णय बड़ी चूक साबित हुआ। कर्मचारियों के पेनडाउन और मौन हड़ताल से पूरी व्यवस्था ही चरमरा गई। पहली बार विवि प्रशासन को अहसास हुआ कि हमारे स्थायी कर्मचारी नहीं, बल्कि एसएफएबी से लिए गए अस्थायी कर्मचारी ही रीढ़ की हड्डी है। सीक्रेसी से लगाकर फीस के काउंटर और परीक्षाओं तक ऐसा कोई काम नहीं है जो उनके बिना संभव हो सके। आज कर्मचारियों ने मौन रहकर पूरे दिन प्रदर्शन किया और विरोध की आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि अपना हक मिलने तक वे संघर्ष जारी रखेंगे। इधर यह भी बताया जा रहा है कि सुविवि प्रशासन को गलत फीडबैक के आधार पर सरकार को रिपोर्ट गई और वहां से उसी आधार पर फैसला हुआ है। ऐसे में जयपुर से आए पत्र को वापस लेते ही या फिर नया ऑर्डर जारी होती ही स्थितियां फिर से सामान्य हो सकती हैं। इसमें कहीं भी चुनाव आचार संहिता आड़े नहीं आ रही है क्योंकि नई नियुक्तियां नहीं हो रही हैं बल्कि पुरानों को ही कंटीन्यू किया जाना है। होली से पहले वेतन नहीं दिया गया तो सामाजिक और राजनीतिक हलकों मेंं भी गलत संदेश जाएगा। इस मामले में अब राजनीतिक दबाव बनाने की भी कवायाद शुरू हो गई है। एसएफएबी में नियुक्त कई कर्मचारी राजनीतिक रसूख रखते हैं व भाजपा से जुड़े हैं। ऐसे में वे सब जयपुर स्तर पर दबाव बनाने की कार्रवाई कर रहे हैं तो स्थानीय विधायक से लेकर लोकसभा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों तक ने कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति जताई है। एसएफएबी बोर्ड से लगे 327 कर्मचारियों को सेवा मुक्त करने के आदेश के बाद डीन और डायरेक्टरों का भी यही कहना है कि इनके साथ न्याय होना चाहिए। कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा बाहर है तो ऐसे में वित्त नियंत्रक सीमा यादव वेतन बिलों पर हस्ताक्षर नहीं कर रही हैं। रजिस्ट्रार श्वेता फगेडिया का कहना है कि जनवरी व फरवरी में इन कर्मचारियों पर सीओडी में निर्णय हो गया है व वर्क ऑर्डर जारी हो गया है, कर्मचारियों ने सेवाएं दी है तो वेतन दिया जाए। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके दबाव में वेतन रोका गया है। अब बताया जा रहा है कि 22 को जयपुर में उच्च शिक्षा विभाग में एक बार फिर इस प्रकरण का रिव्यू होगा। उसमें कोई हल निकलने की उम्मीद है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation विश्व वन दिवस पर फायर डिपार्टमेंट का दर्द आया सामने … अब जमी चुनावी रंगत, उदयपुर कलेक्टर रहे मीणा ने ठोकी चुनावी मैदान में ताल, बोले-जनता से दिल का नाता