24 न्यूज अपडेट, उदयपुर। यूडी टेक्स में नगर निगम की ओर से सख्ती दिखाते हुए इस बार जो 18.68 करोड़ रूपए वसूले गए थे वो सब एलिवेटेड रोड के काम आ गए हैं। याने के टेक्स डंडा जो चला था वो एलिवेटेड रोड का आधार स्तंभ पिलर बन गया है। निगम के बजट में इस बार एलिवेटेड रोड के लिए 40 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही अबकी बार यूडी टेक्स का लक्ष्य 20 करोड़ रखा गया है। निकाय के चुनावों में यह मुद्दा बनता है तब यह लक्ष्य चुनाव से पहले हासिल करना मुश्किल होगा। यदि चुनाव में देरी होती है तो यह चुनावी मुद्दा बनना इस बार तय है। क्या आयड़ नदी पर हो रहा खर्च उचित है? बाकी झीलों के रख-रखाव के लिए पर्याप्त बजट क्यों नहीं? उदयपुर में इस साल 471.98 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया है। प्रशासन ने इसे शहर के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है, लेकिन जब इस बजट को गहराई से देखा जाए, तो इसमें कई विसंगतियां नजर आती हैं। खासकर, आयड़ नदी पर किया जा रहा खर्च अन्य झीलों के रख-रखाव के मुकाबले असंतुलित दिखता है। आयड़ नदी को प्राथमिकता, लेकिन बाकी झीलों का क्या? बजट में आयड़ नदी के सौंदर्यीकरण के लिए 80 लाख रुपये (0.80 करोड़) आवंटित किए गए हैं। यह राशि उदयपुर की झीलों की सफाई के लिए रखी गई 1 करोड़ रुपये की राशि के लगभग बराबर है। यह चौंकाने वाली बात है कि उदयपुर की पहचान मानी जाने वाली पिछोला, फतेहसागर, स्वरूप सागर जैसी झीलों की सफाई और रख-रखाव के लिए केवल 1 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है, जबकि एक छोटी और अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण नदी के लिए 80 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। क्या प्रशासन को झीलों की स्थिति की अधिक चिंता नहीं होनी चाहिए थी? सौंदर्यीकरण बनाम बुनियादी सुविधाएं बजट में झीलों के सौंदर्यीकरण के लिए भी केवल 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि शहर के विभिन्न चौराहों और सर्किलों के नवीनीकरण और ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए 4 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यह सवाल उठता है कि क्या ट्रैफिक लाइटें और सर्किल सौंदर्यीकरण झीलों की सफाई से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं? स्वच्छता को लेकर कितनी गंभीरता? शहर में घर-घर कचरा संग्रहण के लिए 8 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि झीलों की सफाई के लिए महज 1 करोड़ रुपये और डिविडिंग मशीन की खरीद के लिए 8 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। क्या झीलों की सफाई सिर्फ मशीनों के भरोसे छोड़ दी गई है? अगर मशीनें खरीदी भी जाती हैं, तो उनका रखरखाव और संचालन कितना प्रभावी रहेगा, इस पर प्रशासन ने कोई विस्तृत योजना नहीं दी है। बिजली बिल और पार्कों का खर्च—प्राथमिकताएं क्या हैं? बिजली बिल के भुगतान के लिए 13 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो झीलों के कुल रख-रखाव बजट (6 करोड़ रुपये) से दोगुना से भी अधिक है। इसी तरह, उदयपुर के 79 पार्कों के रखरखाव के लिए 2.5 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि गुलाब बाग जैसे ऐतिहासिक स्थल को सिर्फ 80 लाख रुपये मिले हैं। क्या बजट संतुलित है? अगर हम बजट को समग्र रूप से देखें, तो यह स्पष्ट होता है कि कुछ मदों पर अधिक खर्च किया जा रहा है, जबकि वास्तव में महत्वपूर्ण मामलों को नजरअंदाज किया गया है। आयड़ नदी पर खर्च किया जा रहा बजट झीलों के रखरखाव के मुकाबले असंतुलित है। इसी तरह, सफाई व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के बीच भी असमानता है। प्रश्न यह उठता है कि क्या प्रशासन ने बजट बनाते समय शहर की असली जरूरतों को ध्यान में रखा है, या फिर यह केवल कागजी विकास तक सीमित रहेगा? प्रमुख बजट प्रावधान: 1. आधारभूत ढांचे और सौंदर्यीकरण के लिए विशेष योजनाएं ✅ एलिवेटेड रोड: 40 करोड़ रुपये (30 करोड़ UDA और राज्य सरकार से)✅ झीलों की सफाई: 8 करोड़ रुपये, नई डिविडिंग मशीन की खरीद✅ आयड़ नदी का सौंदर्यीकरण: 80 लाख रुपये✅ शहर की प्रमुख झीलों व तालाबों की सफाई: 1 करोड़ रुपये✅ गुलाबबाग रखरखाव और विकास: 80 लाख रुपये✅ पार्कों का रखरखाव: 3 करोड़ रुपये (79 पार्कों के लिए 50 लाख रुपये)✅ रात्रिकालीन पर्यटन को बढ़ावा: 8 करोड़ रुपये (मसाला चौक, फूड कोर्ट सहित अन्य सुविधाओं का विकास)✅ विभिन्न सर्किलों/चौराहों के नवीनीकरण: 4 करोड़ रुपये✅ ट्रैफिक मैनेजमेंट और सिग्नल सुधार: 1.5 करोड़ रुपये 2. स्वच्छता और सफाई कार्यों के लिए बजट आवंटन ✅ घर-घर कचरा संग्रहण: 8 करोड़ रुपये (ऑटो टीपर के माध्यम से)✅ रात्रिकालीन सफाई (Night Sweeping): 1.5 करोड़ रुपये✅ सड़क एवं नाली सफाई कार्य: 12 करोड़ रुपये (UDA के तहत)✅ गैराज में नई सफाई मशीनें व उपकरण: 1.5 करोड़ रुपये✅ सीवरेज लाइन के रखरखाव: 5 करोड़ रुपये✅ सड़क मरम्मत और सुदृढ़ीकरण: 15 करोड़ रुपये 3. पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण ✅ गौशालाओं के संचालन और चारा प्रबंधन: 4.8 करोड़ रुपये✅ शहर की दीवारों पर पारंपरिक मंडणे (चित्रकारी) के लिए: 1 करोड़ रुपये 4. नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए लक्ष्य ✅ यूडी टैक्स संग्रह: 20 करोड़ रुपये✅ साइन बोर्ड से आय: 3 करोड़ रुपये✅ भवन निर्माण अनुमति शुल्क: 4.5 करोड़ रुपये✅ भू उपयोग परिवर्तन से आय: 7 करोड़ रुपये✅ रोड कटिंग शुल्क से आय: 5 करोड़ रुपये✅ भूखंड विक्रय से आय: 6 करोड़ रुपये✅ झीलों में नाव संचालन से आय: 7.5 करोड़ रुपये प्रशासक नमित मेहता का बयान नगर निगम प्रशासक नमित मेहता ने कहा कि “इस बजट का मुख्य उद्देश्य उदयपुर को एक स्वच्छ, सुगठित और आधुनिक शहर बनाना है। आने वाले वर्षों में नगर निगम सार्वजनिक सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और यातायात प्रबंधन पर अधिक ध्यान देगा।” बजट पारित होने के बाद, नगर निगम के सभी वरिष्ठ अधिकारी, including नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश, उपायुक्त दिनेश कुमार मंडोवर, और अन्य अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे। विभिन्न मदों में व्यय और उनका कुल बजट में प्रतिशत खर्च का विवरणराशि (करोड़ रुपये)प्रतिशत (%)एलिवेटेड रोड निर्माण408.48%घर-घर कचरा संग्रहण81.69%झीलों की सफाई10.21%रात्रिकालीन सफाई1.500.32%आयड़ नदी सौंदर्यीकरण0.800.17%रोड एवं नाली सफाई (उदयपुर विकास प्राधिकरण)122.54%गौशाला संचालन4.801.02%79 पार्कों का रखरखाव0.500.11%गुलाब बाग का रखरखाव0.800.17%अन्य पार्कों का रखरखाव2.500.53%झीलों की सफाई (डिविडिंग मशीन खरीद)81.69%सफाई उपकरण/मशीनरी खरीद1.500.32%रोड लाइट मॉनिटरिंग (स्मार्ट सिस्टम)1.000.21%बिजली बिल भुगतान132.75%पुरानी सीवरेज लाइन का रखरखाव51.06%सड़कों का रखरखाव और सुदृढ़ीकरण153.18%अशोक नगर नाला निर्माण51.06%शिकारबाड़ी क्षेत्र में सड़क और नाली निर्माण51.06%विभिन्न दीवारों पर चित्रकारी (मांढणे)10.21%पिछोला झील सौंदर्यीकरण51.06%रात्रिकालीन पर्यटन (मसाला चौक, फूड कोर्ट, आदि)81.69%सर्किल/चौराहों का सौंदर्यीकरण40.85%ट्रैफिक मैनेजमेंट और सिग्नल व्यवस्था1.500.32%हाईमास्ट लाइट लगाने का प्रावधान10.21% प्रतिदिन खर्च का अनुमान कुल बजट: 471.98 करोड़ रुपयेप्रति दिन खर्च = कुल बजट / 365 दिन= 1.29 करोड़ रुपये प्रति दिन इस प्रकार, शहर के विकास पर प्रतिदिन लगभग 1.29 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... 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