24 न्यूज अपडेट जोधपुर. जोधपुर में एसीबी की टीम ने कार्रवाई करते हुए एक महिला कर्मचारी सहित दलाल को ट्रैप किया है। पूरी कार्रवाई जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में की गई है। टीम ने यहां पर न्यू ओपीडी के पास स्थित मल्टी लेवल इस ICU में एक ऑफिस में यह कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि महिला कर्मचारी एमडीएम हॉस्पिटल में ठेकाकर्मियों की हाजरी रजिस्टर को मेंटेन करती थी। कर्मचारी ने ठेकाकर्मी की 40 दिन की हाजरी का पेमेंट बनाया थी। जिसमें से बिना काम किए 12 हाजरी एक्स्ट्रा जोड़ी गई थी। जिसके कमीशन के पेटे 3600 की रिश्वत राशि महिला कर्मचारियों ने मांगी थी। टीम ने परिवादी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए महिला कर्मचारी और एक ठेकाकर्मी दलाल को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद महिला कर्मचारी और दलाल को एसीबी ने हिरासत में ले लिया। एसीबी के डीवाई एसपी गोरधनराम ने बताया की रिश्वत मांगने को लेकर परिवादी ने शिकायत दीथी। जिसमें बताया की जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल की ईसीजी टेक्निशियन वैशाली शर्मा अस्पताल में काम करने वाले ठेका कर्मियों की अटेंडेंस फील करती है। परिवादी ने बताया की वो संविदा के तौर पर यहां नियुक्त है। उन्होंने एक टेक्नीशियन के तौर पर 27 दिन हॉस्पिटल में काम किया था लेकिन उनकी इंचार्ज वैशाली शर्मा ने 40 दिन की उपस्तिथि का का रिकॉर्ड बनाकर पेमेंट पास किया।
इसके बाद 12 दिन की हाजिरी अधिक लिखने की आवाज में कमीशन के ₹3600 मांगे जा रहे थे। शिकायत मिलने पर ऐसी भी की ओर से सत्यापन करवाया गया जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने आज कार्रवाई करते हुए एमडीएम अस्पताल के मल्टी लेवल आईसीयू में एक टेक्नीशियन के ऑफिस में कार्रवाई करते हुए ठेका कर्मियों की इंचार्ज वैशाली शर्मा और संविदा पर नियुक्त दलाल ठेका कर्मी पीयूष शर्मा को ट्रैप किया।
वैशाली शर्मा ने रिश्वत की यह राशि पहले ठेका कर्मी पीयूष शर्मा को दी थी। इसके बाद पीयूष ने वैशाली कोई राशि दी एसीबी की टीम को वैशाली के बैग से 3600 रुपए की राशि बरामद हुई। ट्रैप होते ही वैशाली सिर पकड़कर रोने लगी।
बता दे की मथुरादास माथुर अस्पताल में ठेका कर्मियों की कम उपस्थिति के बावजूद अधिक हाजिरी बनाने को लेकर कई बार शिकायतें भी सामने आ रही थी। अब एसीबी की जांच में भी उन कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है जो ठेका कर्मियों से अधिक हाजिरी लिखने के नाम पर रिश्वत की राशि वसूलते हैं। एसीबी जांच में अब ऐसे और भी कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

