24 न्यूज अपडेट. उदयपुर। जमीन माफियाओं, नेताओं और अधिकारियों के आपराधिक नेक्सस ने पेंथर से उसकी टेरिटरी छीन ली। उसके शिकार के इलाकों में खुद के महल खड़े कर दिए। इसका नतीजा रोज मासूम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। जंगलों और पहाड़ों को काट कर करोड़ों कमाने वालों और नदी को नाला बनाकर करोड़ों बहा देने वालों का दुस्साहस जब तक बरकरार रहेगा, तब तक हमले होते रहेंगे। दुखद खबर आई है कि पेंथर ने आठवां शिकार कर लिया है। घर में घुस कर महिला को दबोच कर ले गया। गोगुंदा की घटना है। मंगलवार सुबह हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई। पेंथर महिला की गर्दन को जबड़े में दबाकर भाग गया, शोर मचाने पर वहीं छोड़ गया। कलएक पुजारी को लेपर्ड मंदिर से खींचकर ले गया था। पिछले 12 दिन में अब तक कुल 8 लोगों की मौत हो चुकी है। वन विभाग ने पिंजरे लगाकर लगातार पेंथर पकड़ रहा हैं अब तक 4 पेंथर पकड़ में आए हैं लेकिन लोगों के जान लेने के सिलसिले थमे नहीं हैं; बताया गया कि सुबह 8 बजे हुआ केलवो का खेड़ा गांव में कमला कुंवर (55) अपने घर के आंगन में काम कर रही थी। अचानक से लेपर्ड ने हमला कर दिया। महिला की चीख-पुकार सुनकर परिवार के लोग बाहर आए तो देखा कि एक पेंथर कमला को मुंह में दबाकर भाग रहा है। चिल्लाने पर पेंथर शव को छोड़कर भाग गया। मौके पर ही महिला ने दम तोड़ दिया। सोमवार को बड़गांव थाना क्षेत्र के राठौड़ों का गुड़ा में रात को लेपर्ड ने मंदिर के पुजारी विष्णु गिरी (65) को मौत के घाट उतार दिया था। वन विभाग ने पिंजरे-कैमरे लगाए हैं व मौके पर सेना के जवान बुलाए हैं। सेना के जवान पहले भी बुलाए गए थे मगर उसके बाद भी 19 सितंबर को भेवड़िया गांव में खुमाराम गमेती (45) का आदमखोर ने शिकार कर लिया। अगले दिन 20 सितंबर को छाली के ही उमरिया गांव में हमेरी गमेती को मार दिया। पिछले 24 सितंबर को जब दो पिंजरों में दो पेंथर आए तो चेन की सांस ली गई। एक 13 से 14 साल का बूढ़ा और दूसरा 7 से 8 साल का युवा पेंथर था। दोनों के केनाइन (आगे वाले चीरने फाड़ने के दांत) टूटे व घिसे हुए थे। बताया गया कि शिकार में सक्षम नहीं होने से इनसान को आसान शिकार माना, इनके पकड़े जाने के बाद भी हमले नहीं थमे। 25 सितंबर को मजावद पंचायत में 6 साल की बच्ची सूरज का शिकार किया। 28 सितंबर को लेपर्ड पकड़ा गया तो 28 सितंबर को बगडूंदा पंचायत के गुर्जरों का गुड़ा में गटू बाई को शिकार बना लिया। इसके अगले दिन 29 सितंबर को लेपर्ड पिंजरे में फंसा तो 30 सितंबर को पुजारी का शिकार हो गया।चालाक हो गया है पेंथर, पिंजरे तक पहुंचता है, लेकिन फंसता नहींबिछीवाड़ा में बच्चे का शिकार करने के बाद पिंजरे के पास पेंथर पहुंचा। पिंजरे को पेंथर सूंघकर वापस चला गया। कहा जा रहा है कि पहले भी वन विभाग ने उसे पकड़ा होगा और बाद में जंगल में छोड़ा गया होगा। इस कारण वह चालाक हो गया और फंस नहीं रहा। फलासियां, झाड़ोल और गोगुंदा रेंज को पेंथर ने अपनी टेरीटरी बना रखी है व यहीं पर यह वारदात कर रहा है। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading… Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation चल वाहन जांच लेब शहर मे उपलब्ध कराने की माँग उदयपुर के डॉ. पण्ड्या को दुबई में किया अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित, उदयपुर के युवा समाजसेवी डॉ. पण्ड्या को दुबई में किया सम्मानित