24 न्यूज अपडेट उदयपुर। अंतर्राष्ट्रीय होकर्स दिवस पर शिराली भवन में ठेला व्यवसायी मजदूर यूनियन व नेशनल हॉकर फैडरेशन द्वारा निजाम मोहम्मद की अध्यक्षता में ठेला व्यवसायियों की बेदखली पर जनसुनवाई की गई। नेशनल हॉकर फैडरेशन के याकूब मोहम्मद ने पथ विक्रेता (जीविका का सरंक्षण और पथ विक्रेता का नियमन) अधिनियम 2014 का महत्व बताते हुए कहा कि पथ विक्रेता अधिनियम से भारत के करोड़ों पथ विक्रेता ,जिनमें सड़क पर केबिन, ठेला, पेरी लगाकर सामान बेचने वाले को, कानूनी सुरक्षा मिली है। अधिनियम में पथ विक्रेता की परिभाषा, 5 वर्ष पर सर्वे, पथ विक्रेता का पंजीयन, अतिक्रमण या सोंदर्यकरण सहित अन्य किसी भी तरीके से बेदखली पर रोक, पथ विक्रेताओं में प्रतिनिधि चुनकर टाउन वेंडिंग कमेटी का प्रावधान जैसे महत्वपूर्ण अधिकार दिये है। साथ ही अधिनियम ने शहर की 2.5 प्रतिशत जमीन पथ विक्रेताओं के लिए आरक्षित की है। लेकिन अन्य कानूनों की तरह सत्ताधारी लोगों और अधिकारियों ने इतने महत्वपूर्ण कानून को भी निष्प्रभावी बना दिया है। जहां जमीनी संघर्ष है , वहीं कानून लागू है। पथ विक्रेताओं को भी कानून को जानना , समझना चाहिए ताकि अपने अधिकार पता चले। जनसुनवाई में तब्बसुम ने बताया कि उनके पति ने हाथीपोल मस्जिद के बाहर 1984 में ठेला लगया था, पति की मृत्यु पर 30 वर्ष से ठेला लगा रही हूं। 62 वर्ष की उम्र में ठेला लगाती हूं तो नगरनिगम आकर कहती है कि तुम ठेला नहीं लगा सकती हो। तब्बसुम के 33 वर्षीय बेटे इरफान ने आपबीति बताते हुए कहा कि सुबह 6 बजे हमारा ठेला उठा ले गये। ठेला छुड़ाने गया तो मांगीलाल ने थप्पड़ मारते हुए कहा कि ठेला लगाना है तो सुखेर – भुवाणा जाओ। सविना सब्जी मंडी में सड़क किनारे ठेला लगाने वाली नजमा ने बताया कि हम तो सड़क किनारे दीवार के पास बैठते है ,फिर भी यातायात बाधित करने का आरोप लगाकर, पुलिस आये दिन परेशान करती रहती है। अस्पताल रोड़ पर सर्वे में शामिल योगेश कुमार ने बताया कि दिन भर सर्दी – गर्मी में खड़े रहकर, साईकिल पर रखकर सामान बेचता हूं ,फिर भी नगरनिगम के नाम पर कोई भी आकर तंग करता रहता है। दिल्ली गेट पर 13 वर्ष से ठेला व्यवसाय करने वाले कमलजीत ने बताया कि ठेला किराये पर लेकर लगाता हूं ,लेकिन नगर निगम और पुलिस आकर कांटे -बाँट ,सामान और ठेला जब्त कर लेती है। कांटे -बाँट की कीमत 1100 रुपये लेकिन 2000 की रसीद काटते है। कुछ बोले तो पुलिस वाले गालियां और डंडे मारते है। क्या दिन में एक ठेले वाला 3100 कहा पाता है जो इतनी रसीद कटवाये। दुध तलाई पर ठेला लगाने वाले शाहिद मोहम्मद ने बताया कि हमने सबने मिलकर प्रतिरोध किया और वर्तमान में न्यायालय से स्थगन आदेश लेकर बैठे है। नगरनिगम, पुलिस ने बहुत कोशिश की ,लेकिन हम झुके नहीं। हाथीपोल के अल्ताफ ने बताया कि जब ठेला लेकर निकलो , नगरनिगम और पुलिस काम ही नहीं करने देती है। मेरे घर में छोटा बच्चा है , जिसको बीमारी के कारण रोजाना 100 रुपये का दुध चाहिए। अगर मै ठेला ही नहीं लगा पाऊगा तो बच्चे को दुध कैसे ला कर पिलाऊगा। सीटू राज्य कमेटी सदस्य हीरालाल सालवी ने कहां कि शहर में नगरनिगम और उदयपुर विकास प्राधिकरण की लड़ाई, ज्यादा से ज्यादा जमीन बेचकर पैसा कमाने की है। फतेहसागर पर नगरनिगम द्वारा दिये लाइसेंस को उदयपुर विकास प्राधिकरण मानने को तैयार नही है। इस नाम से पथ विक्रेताओं को बेदखल करने की कोशिश की गई, लेकिन सीटू ने लड़कर पथ विक्रेताओं को बेदखल नही करने दिया गया। ठेला व्यवसायी मजदुर युनियन सरंक्षक राव गुमान सिंह ने कहां कि भाजपा बोर्ड गरीबों के लिए केंसर बन गया है। ठेले वाले सरकार से कोई सहायता भी नहीं मांगते बल्कि बदले में किराया देते है। फिर भी भाजपा बोर्ड शहर से गरीबों को बेदखल कर उन्हे बर्बाद करने पर आमादा है। ऐसे में संघर्ष और संगठन ही एकमात्र उपाय है। महिला समिति की सचिव रानी माली ने कहा कि नगर निगम ओर प्रसाशन के दमन का सबसे ज्यादा सामना महिलाओ को करना पड़ता है इसलिए महिलाओ को भी सड़क पर अपनी एकता से हर दमन का सामना करना होगा। ठेला व्यवसायी मजदूर यूनियन संरक्षक, पूर्व पार्षद और सीटू जिला संयोजक राजेश सिंघवी ने कहां कि आज जनसुनवाई में शामिल होने के लिए जिला पुलिस -प्रशासन, नगरनिगम, उदयपुर विकास प्राधिकरण को आमंत्रित किया था, लेकिन कोई नहीं पहुँचा। इस जनसुनवाई का उद्देश्य यही था कि ठेले व्यवसायियों की प्रशासन के साथ मिलकर, कानून के अनुसार समस्याओं का समाधान हो। सिंघवी ने कहा कि सत्ता का चरित्र ही जनता से उनका व्यवहार तय करता है। अपने आप को चाय बेचने वाला बताने वाले प्रधानमंत्री के लोग, आज ठेले वालों को चाय ,सब्जी, फल , सस्ता कपड़ा और घरेलू सामान भी नहीं बेचने दे रहे हैं। कानूनी अधिकारों के बावजूद हमें बार -बार न्यायालय से स्थगन आदेश लाना पड़ता है लेकिन नगर निगम कोर्ट के आदेशों को भी मानने को तय्यार नहीं है। पुलिस, प्रशासन, नगरनिगम और उदयपुर विकास प्राधिकरण पैसे वालों के आगे नतमस्तक है। उदयपुर में अरावली पहाड़ी को काटकर कॉलोनी, होटल बन रहे हं। भाजपा नेता जमीनों पर कब्जे के लिए लड़ रहे हैं , होटल और दुकानदार सड़क पर कब्जा करके बैठे हैं। शहर में प्रावधान के बावजूद मॉल और व्यवसायिक काम्पलेक्स में पार्किंग व्यवस्था नहीं है। नगरनिगम को समझना होगा कि ठेले वालों को हटाकर ,यातायात समस्या का समाधान नही हो सकता है। हम समस्याओं पर मांगपत्र बनाकर, जिला कलक्टर और एसपी से मिलेगे। ठेला व्यवसायियों को भी संगठित होकर ,मजदुर विरोधी भाजपा बोर्ड का मुकाबला करना होगा। इस अवसर पर बेदखली बंद करों ,सामाजिक सुरक्षा लागू करो, पथ विक्रेता अधिनियम लागू करों के नारों के साथ , जनसुनवाई समाप्त हुई। इस अवसर शबाना, लक्ष्मीलाल कुमावत, विनोद दया, भजनलाल कालड़ा, मिट्ठु बाई, गुलाब सिंह, रमेश सिंह, गंगा बाई, मदन सिंह, गोपाल, रघुनाथ सिंह भाटी, जावेद हुसैन, वही म अकरम, अमना बानों, हुसैना, योगेश कुमार, जायदा, तबसुम, सुरेश साल्वी, कमलसिंह पंवार, शासन मोहम्मद, राजेश कुमार सोनी, रघुनाथ सिंह भाटी, धर्मेंद्र कुमावत, अभय सिंह, देवी, मुबारिक, पप्पु सेन, कलाजी रायका, रोशन मेंघवाल, भगवंत सिंह, शंकर प्रजापत, शकील, मो.शाहिद, रोना कीर, शोएब हुसैन, रजु मोहम्मद, साहिल मोहम्मद, शमीना बानो, जगदीश कुमावत, नजमा बानो, मोहिनीराज माली, जावेद खान, अमजद शेख मौजूद थे। बाई, गुलाब सिंह, रमेश सिंह, गंगा बाई, मदन सिंह, गोपाल, रघुनाथ सिंह भाटी, जावेद हुसैन, वही म अकरम, अमना बानों, हुसैना, योगेश कुमार, जायदा, तबसुम, सुरेश सालवी, कमलसिंह पंवार, शासन मोहम्मद, राजेश कुमार सोनी, रघुनाथ सिंह भाटी, धर्मेंद्र कुमावत, अभय सिंह, देवी, मुबारिक, पप्पु सेन, कलाजी रायका, रोशन मेंघवाल, भगवंत सिंह, शंकर प्रजापत, शकील, मो.शाहिद, रोना कीर, शोएब हुसैन, रजु मोहम्मद, साहिल मोहम्मद, शमीना बानो, जगदीश कुमावत, नजमा बानो, मोहिनीराज माली, जावेद खान, अमजद शेख मौजूद थे। जन सुनवाई का संचालन बंशीलाल चौहान ने किया। Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp 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