
24 News Update बांसवाड़ा। शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ सोमवार को माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में भक्तिभाव और उल्लास के साथ हुआ। प्रातः मंगला आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष धूलजी पंचाल ने बताया कि परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी विश्वकर्मा वंशी सेना के सानिध्य में अश्विन नवरात्रि की एकम पर माँ त्रिपुरा सुंदरी को लगभग 5 किलोमीटर लंबी चुनरी अर्पित की गई।
इंदौर, उज्जैन और रतलाम से पहुँची चुनरी यात्रा
विश्वकर्मा वंशी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज नंदकिशोर पंचाल, जिलाध्यक्ष हरीश पंचाल (बांसवाड़ा) एवं संगठन के अन्य सदस्यों ने इंदौर, उज्जैन, रतलाम से करीब 400 चौपहिया वाहनों के साथ विशाल यात्रा निकाली। बांसवाड़ा शहर से गुजरती इस यात्रा में लगभग 1500 श्रद्धालु शामिल हुए और माताजी परिसर पहुँचकर चुनरी अर्पित की। इस अवसर पर पंचाल समाज चौदह चौखरा ट्रस्ट मंडल ने आगंतुकों का स्वागत किया। रविवार रात जगराता एवं भजन संध्या का आयोजन भी किया गया।
पहले दिन श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
नवरात्रि के पहले दिन मंदिर परिसर और आसपास के गाँवों के अलावा बांसवाड़ा, परतापुर सहित विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु नंगे पाँव पदयात्रा कर दर्शन हेतु पहुँचे। सोमवार होने के कारण इस दिन माता को सफेद वर्ण का श्रृंगार धारण कराया गया। पूर्वाह्न में विधि-विधान से घट स्थापना की गई। रात्रि 8 बजे से गरबा उत्सव का शुभारंभ हुआ, जो नवरात्रि पर्व पर्यंत प्रतिदिन आयोजित होगा।
माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर : ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व
माँ त्रिपुरा सुंदरी मंदिर बांसवाड़ा जिले के तलवाड़ा कस्बे से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है और इसे प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहाँ देवी सती के अंग का अंश गिरा था, जिसके बाद यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में विख्यात हुआ। त्रिपुरा सुंदरी माता को तारक और त्रिपुरेश्वरी नामों से भी जाना जाता है।
मंदिर का गर्भगृह प्राचीन शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है और यहाँ स्थापित माता की मूर्ति अद्वितीय मानी जाती है। नवरात्रि पर्व के दौरान यहाँ लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। मंदिर परिसर में भव्य बाजार, भजन संध्याएँ और सांस्कृतिक आयोजन भक्तिमय माहौल बना देते हैं।
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