24 न्यूज अपडेट ब्यूरो। भीलवाड़ा जिले के हरणी गांव में होली नहीं जलाई जाती है बल्कि यहां पर एक खास परंपरा निभाई जाती है। हरणी गांव में होली पर सोने के भक्त प्रहलाद बनाए जाते हैं जिनको चांदी की बनी होलिका की गोद में बैठाए जाते हैं और फिर मंत्रोचार के साथ उनकी पूजा की जाती हैं । बताया जाता है कि हरणी गांव में बरसों पहले होली के लिए पेड़ काटने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद गांव में होलिका दहन करते समय आगजनी की घटना हो गई। इससे खफा होकर गावं के वरिष्ठजनों ने यह तय किया कि अब कभी भी होली पेड़ नहीं कोटे जाएंगे व होली जलाई नहीं जाएगी। इसके बाद से इस गांव में यह अनूठी परम्परा आरंभ हुई। अब यहां पेड नहीं काटे जाते। होली के दिन हरणी गांव में सभी ग्रामीण चारभुजा मंदिर पर जुटते है।ं उसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ सोने के प्रहलाद और चांदी की होलिका की शोभा यात्रा पूरे गांव में निकालती है। उन दोनों को होलिका दहन स्थल तक ले जाते हैं। उसके बाद पूजा करके उन्हें एक बार फिर से मंदिर में लाकर स्थापित कर देते हैं। इस बारे में ग्रामीणों ने बताया कि हरणी गांव भीलवाड़ा से तीन किलोमीटर दूर है व यहां पर प्रसिद्ध हरणी महादेवजी का मंदिर भी है। इस गांव के लोगों ने चंदा इकट्ठा कर सोने के प्रहलाद और चांदी की होली बनवाई है व इसकी हर साल पूजा की जाती है। गांव के लोग यह संदेश देते हैं कि हमें पेडों को नहीं काटना है।
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