24 News Update नई दिल्ली। बिना सत्यापन एक वायरल वीडियो को सांप्रदायिक एंगल के साथ ब्रॉडकास्ट करना ज़ी न्यूज़ को महंगा पड़ गया। न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने चैनल पर ₹1,00,000 का जुर्माना लगाते हुए साफ कहा है कि सोशल मीडिया से उठाए गए अनवेरिफाइड कंटेंट का इस्तेमाल “एक्यूरेसी” के मूल सिद्धांत का गंभीर उल्लंघन है।
यह कार्रवाई 17 फरवरी 2026 को पारित उस कॉमन ऑर्डर के तहत की गई, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस ए.के. सिकरी (सेवानिवृत्त) ने की। मामला जम्मू–श्रीनगर नेशनल हाईवे से जुड़े एक वायरल वीडियो के ब्रॉडकास्ट से संबंधित था, जिसमें ट्रैफिक जाम को कथित तौर पर “ट्रक ड्राइवर द्वारा हाईवे पर नमाज़ पढ़ने” से जोड़ा गया था।
क्या था मामला
शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि ज़ी न्यूज़ ने “ट्रक पर नमाज़… जम्मू में नया बवाल शुरू!” जैसे शीर्षक के साथ एक सोशल मीडिया वीडियो दिखाया, जिससे यह संदेश गया कि ट्रैफिक जाम धार्मिक कारणों से हुआ। जबकि बाद में फैक्ट-चेक और ट्रैफिक एडवाइजरी से यह स्पष्ट हुआ कि उस समय खराब मौसम और लैंडस्लाइड के कारण पहले से ही हाईवे बाधित था। NBDSA ने माना कि इस ब्रॉडकास्ट ने एक सामान्य ट्रैफिक समस्या को सांप्रदायिक रंग दिया और बिना पुष्टि की क्लिप दिखाकर भ्रामक सूचना को बढ़ावा दिया।
ज़ी न्यूज़ का पक्ष
चैनल ने अपने बचाव में कहा कि टेलीकास्ट के समय वीडियो वायरल था और उसे अनवेरिफाइड बताया भी गया था। साथ ही, बाद में वीडियो के फर्जी होने की जानकारी मिलने पर उसे डिलीट कर दिया गया। हालांकि अथॉरिटी ने स्पष्ट किया कि “डिस्क्लेमर” देना या वीडियो के वायरल होने का उल्लेख करना, ब्रॉडकास्टर को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।
NBDSA की सख्त टिप्पणी
NBDSA ने सुनवाई के दौरान यह दर्ज किया कि ब्रॉडकास्टर ने स्वयं स्वीकार किया कि कंटेंट की सत्यता टेलीकास्ट से पहले जांची नहीं गई थी। इसे कोड ऑफ कंडक्ट के तहत “एक्यूरेसी” के सिद्धांत का उल्लंघन माना गया।
अथॉरिटी ने यह भी कहा कि उल्लंघन की प्रकृति को देखते हुए अधिक जुर्माना लगाया जा सकता था, लेकिन वीडियो को बाद में हटाए जाने को शमनकारी कारक मानते हुए ₹1 लाख का जुर्माना लगाया गया।
सोशल मीडिया कंटेंट पर नई गाइडलाइंस
इस मामले को व्यापक संदर्भ में लेते हुए NBDSA ने ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स के लिए सोशल मीडिया कंटेंट के उपयोग पर विस्तृत नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इनमें प्रमुख बिंदु हैं— अनिवार्य सत्यापन: सोशल मीडिया से ली गई हर सूचना, फोटो या वीडियो का प्रसारण से पहले सत्यापन जरूरी। भरोसेमंद पुष्टि: जहां संभव हो, ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग, चश्मदीद, पुलिस या सरकारी स्रोतों से पुष्टि। AI/डीपफेक की जांच: कंटेंट में हेरफेर या AI जनित होने की संभावना की जांच। आउट-ऑफ-कॉन्टेक्स्ट निषेध: संदर्भ से काटकर कंटेंट दिखाने पर रोक। संवेदनशील मामलों में अतिरिक्त सावधानी: सांप्रदायिक हिंसा, सैन्य कार्रवाई, कानून-व्यवस्था जैसे मामलों में “पब्लिक इंटरेस्ट” और “एक्यूरेसी” की कड़ी कसौटी। डिस्क्लेमर पर्याप्त नहीं: “वायरल/अनवेरिफाइड” कह देना जिम्मेदारी से मुक्ति नहीं देगा।
NBDSA ने निर्देश दिया है कि ये गाइडलाइंस NBDA के सभी सदस्यों और संपादकों तक पहुंचाई जाएं, वेबसाइट पर प्रकाशित हों और वार्षिक रिपोर्ट का हिस्सा बनें।

