हैदराबाद स्थित विश्व के सबसे बड़े ध्यान केंद्र ‘कान्हा शांति वनम’ से होगा सीधा वैश्विक प्रसारण
बावलवाड़ा/उदयपुर। आगामी 21 दिसंबर 2025 को वैश्विक स्तर पर ‘विश्व ध्यान दिवस’ मनाया जाएगा। इस अवसर पर हार्टफुलनेस संस्थान द्वारा एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक पहल के तहत दुनिया भर में 10 लाख लोगों को एक साथ ध्यान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस सामूहिक साधना का उद्देश्य विश्व में शांति, करुणा और एकता का संदेश प्रसारित करना है।
हार्टफुलनेस संस्थान, उदयपुर के केंद्र समन्वयक एवं प्रशिक्षक डॉ. राकेश दशोरा ने बताया कि इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘एक विश्व, एक हृदय’ (One World, One Heart) रखी गई है। यह भव्य आयोजन हार्टफुलनेस के वैश्विक मुख्यालय हैदराबाद स्थित ‘कान्हा शांति वनम’ से सीधे प्रसारित किया जाएगा।
घर बैठे ‘दाजी’ के सानिध्य में ध्यान
इस कार्यक्रम की विशेषता यह है कि प्रतिभागी अपने घर बैठे वर्चुअल माध्यम से इस ध्यान सत्र में भाग ले सकेंगे। 21 दिसंबर को रात्रि 8 बजे (भारतीय समयानुसार) आयोजित होने वाले इस सत्र में विश्वविख्यात आध्यात्मिक मार्गदर्शक ‘दाजी’ (कमलेश डी. पटेल) के सानिध्य में ध्यान करने का अवसर मिलेगा।
इस सत्र में भाग लेने हेतु कोई शुल्क नहीं रखा गया है। इच्छुक व्यक्ति पोस्टर पर दिए गए क्यूआर कोड अथवा आधिकारिक लिंक के माध्यम से अपना पंजीकरण कर सकते हैं।
लक्षराज सिंह मेवाड़ ने की सहभागिता की अपील
“दाजी के साथ जुड़ें और ध्यान करें”
मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्षराज सिंह मेवाड़ ने भी आमजन से इस वैश्विक ध्यान अभियान से जुड़ने की अपील की है। अपने संदेश में उन्होंने कहा—
“सबसे पहले दाजी को कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं, नमस्कार करता हूं। 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस है। मैं यह उम्मीद करता हूं कि हम सब मिल-जुलकर दाजी के साथ शाम 8 बजे विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर जुड़ेंगे और ध्यान (मेडिटेशन) करेंगे। बहुत-बहुत आभार, नमस्कार।”
ऐसा है विश्व का सबसे बड़ा ध्यान केंद्र: जहाँ बंजर भूमि बनी ‘हरित तीर्थ’
हैदराबाद स्थित ‘कान्हा शांति वनम’, जहाँ से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का सीधा प्रसारण होगा, वह प्रकृति, विज्ञान और आध्यात्म के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण है—
- 1400 एकड़ में हरियाली: वैज्ञानिक तकनीकों और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से 1400 एकड़ बंजर एवं पथरीली भूमि को घने हरित वन में परिवर्तित किया गया है।
- जल स्तर में ऐतिहासिक सुधार: जल संरक्षण के सतत प्रयासों से भूमिगत जल स्तर, जो कभी 1000 फीट नीचे था, अब बढ़कर लगभग 100 फीट तक आ गया है।
- 50 करोड़ लीटर जल संचयन क्षमता: परिसर में निर्मित 9 विशाल कृत्रिम झीलों में वर्षा जल के रूप में लगभग 50 करोड़ लीटर पानी का संचयन संभव है।
- बायोचार तकनीक का प्रयोग: आधुनिक बायोचार तकनीक से यहाँ 1.5 लाख से अधिक पेड़ लगाए गए हैं, जिससे बंजर भूमि भी उपजाऊ बन सकी है।
- समृद्ध जैव विविधता: जहाँ एक दशक पहले वीरान परिदृश्य था, आज वहाँ 120 से अधिक पक्षी प्रजातियां और लाखों पेड़-पौधे प्राकृतिक संतुलन का सजीव प्रमाण हैं।

