जयपुर। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर राजस्थान में आम जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ का मुद्दा विधानसभा तक पहुंच गया है। 16वीं राजस्थान विधानसभा के पंचम सत्र में अतारांकित प्रश्न संख्या 16/5/1539 के जरिए सदस्य श्रवण कुमार ने सरकार से सीधे सवाल किए—क्या राजस्थान में ईंधन की कीमतें पड़ोसी राज्यों से ज्यादा हैं और क्या सरकार इन्हें कम करने पर विचार कर रही है? सरकार की ओर से दिए गए लिखित उत्तर ने न सिर्फ कीमतों की तुलना सार्वजनिक कर दी, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि फिलहाल करों में कमी या दरों की समीक्षा का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। जबकि भाजपा कीमतों के असमान होने का शोर मचा कर इसे अपने इलेक्शन का मुद्दा बनाकर सत्ता में आई है। याने हाथी के दांत दिखाने के कुछ और होत हैं, खाने के कुछ और। पड़ोसी राज्यों से तुलना: पेट्रोल-डीजल में कहां खड़ा है राजस्थानसरकार ने सदन को बताया कि मौजूदा स्थिति में राजस्थान में— पेट्रोल की कीमतें हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात से अधिक, जबकि मध्य प्रदेश से कम हैं। डीजल की कीमतें हरियाणा और उत्तर प्रदेश से अधिक, जबकि गुजरात और मध्य प्रदेश से कम हैं। इस दावे के साथ परिशिष्ट-1 में राज्य-वार तुलनात्मक विवरण भी रखा गया, जिसके अनुसार जयपुर में पेट्रोल ₹104.72 प्रति लीटर और डीजल ₹90.21 प्रति लीटर दर्ज है। तुलना में गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पेट्रोल 94 से 96 रुपये के दायरे में है, जबकि डीजल भी कई राज्यों में राजस्थान से सस्ता बिक रहा है। कर संरचना देखें तो राजस्थान में पेट्रोल पर 29.04% VAT के साथ ₹1500 प्रति किलोलीटर सेस और डीजल पर 17.30% VAT के साथ ₹1750 प्रति किलोलीटर सेस लगाया जा रहा है—यही कारण है कि खुदरा कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। “कर से बोझ बढ़ रहा”—सवाल, “लोकहित में जरूरी”—सरकार दूसरे सवाल में पूछा गया कि क्या पेट्रोल-डीजल पर VAT/सेस के कारण आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इस पर सरकार का जवाब सीधा और नीति-आधारित रहा। सरकार ने कहा कि ईंधन पर लगाए गए कर राज्य के समग्र विकास और लोकहित को ध्यान में रखकर तय किए जाते हैं। यानी कीमतें भले जेब पर भारी हों, लेकिन सरकार इन्हें राजस्व और विकास जरूरतों से जोड़कर देख रही है। राहत की उम्मीद पर ब्रेक तीसरे और सबसे अहम सवाल—क्या सरकार कीमतों की समीक्षा कर उन्हें पड़ोसी राज्यों के समकक्ष लाने या करों में कमी पर विचार कर रही है—पर सरकार ने दो टूक जवाब दिया:“वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।” राजनीतिक-आर्थिक संकेत विधानसभा में आए इस जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि ईंधन कीमतों को लेकर सरकार फिलहाल राजस्व नीति में बदलाव के मूड में नहीं है। हालांकि, आंकड़े यह भी बताते हैं कि सीमावर्ती जिलों में लोग सस्ते ईंधन के लिए पड़ोसी राज्यों का रुख कर रहे हैं, जिससे राजस्थान को संभावित राजस्व नुकसान भी हो सकता है। एक तरफ सरकार “लोकहित और विकास” का तर्क दे रही है, तो दूसरी ओर सदन में रखे गए आंकड़े बता रहे हैं कि ईंधन की आग में आम आदमी की जेब लगातार झुलस रही है—और फिलहाल उस आग को ठंडा करने की कोई योजना सरकार के पास नहीं है। 🟠 पेट्रोल: राजस्थान बनाम पड़ोसी राज्य (₹ प्रति लीटर) राज्य (शहर)पेट्रोल पर राज्य कर संरचनापेट्रोल खुदरा मूल्यराजस्थान से अंतरगुजरात (अहमदाबाद)13.7% + 4% सेस (टर्नओवर पर)94.84₹9.88 सस्ताहरियाणा (अंबाला)18.20% या ₹14.50/ली. (जो अधिक) + VAT पर 5% अतिरिक्त कर95.99₹8.73 सस्तामध्य प्रदेश (भोपाल)29% + ₹2.50/ली. अतिरिक्त कर + 1% सेस106.52₹1.80 महंगाराजस्थान (जयपुर)29.04% VAT + सेस ₹1500/किलोलीटर104.72—उत्तर प्रदेश (लखनऊ)19.36% या ₹14.85/ली. (जो अधिक)94.68₹10.04 सस्ता 🔵 डीज़ल: राजस्थान बनाम पड़ोसी राज्य (₹ प्रति लीटर) राज्य (शहर)डीज़ल पर राज्य कर संरचनाडीज़ल खुदरा मूल्यराजस्थान से अंतरगुजरात (अहमदाबाद)14.9% + 4% सेस (टर्नओवर पर)90.51₹0.30 महंगाहरियाणा (अंबाला)16% या ₹11.86/ली. (जो अधिक) + VAT पर 5% अतिरिक्त कर88.42₹1.79 सस्तामध्य प्रदेश (भोपाल)19% + ₹1.50/ली. अतिरिक्त कर + 1% सेस91.89₹1.68 महंगाराजस्थान (जयपुर)17.30% VAT + सेस ₹1750/किलोलीटर90.21—उत्तर प्रदेश (लखनऊ)17.08% या ₹10.41/ली. (जो अधिक)87.80₹2.41 सस्ता Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Email a link to a friend (Opens in new window) Email Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Like this:Like Loading... Related Discover more from 24 News Update Subscribe to get the latest posts sent to your email. Type your email… Subscribe Post navigation जेजेएम घोटाला: सुबोध अग्रवाल पहुंचे हाई कोर्ट, सुधांश पंत का लिया नाम, अब क्या करेंगी जांच एजेंसियां???? आमजन की शिकायतों का समाधान अब सीधे सीनियर IAS अफसरों से: भजनलाल सरकार ने 181 हेल्पलाइन अभियान शुरू किया