24 News Update उदयपुर। शहर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई को लेकर हालात धीरे-धीरे असामान्य होते जा रहे हैं। इसका पता आज लोगों को तब चला जबकि शहर के सभी नायरा कंपनी के पेट्रोल पम्पों पर डीजल की कीमतों में 3 रूपए तो पेट्रोल की कीमतों में 5 रूपए की बढोत्तरी कर दी गई। अचानक बढ़ी कीमतों को देख कर लोग चौंक गए और वो वाला पैनिक बटन दब गया जिसके बारे में जिला प्रशासन बड़े बड़े दावे कर रहा था। पता नहीं कलेक्टर साहब की बैठकों के बाद कैसे स्थिति सामान्य होने का दावा किया जा रहा है?? जबकि दूसरी ओर शहर में ही नायरा कंपनी वाले बेधड़क कीमतें बढा रहे हें जिससे फिजूल की पेट्रोल की खरीद का पेनिक बटन दब रहा है। जो नेता अब तक सब चंगा होने का ढोल पीट रहे थे वे भी आज कहीं नजर नहीं आए, ना ही उनके कोई बयान आए। प्राइवेट तेल कंपनी Nayara Energy की ओर से अचानक कीमतों में बढ़ोतरी के फैसले ने बाजार में हलचल मचा दी। डीलर्स भी हतप्रभ रह गए, क्योंकि उनके पास मीडिया को देने के लिए कोई जवाब ही नहीं है। “पैनिक बटन” दबाने की इस प्रक्रिया में अब पहल पेट्रोलियम मंत्रालय के स्तर पर ही संभव है।
जानकारों के अनुसार उदयपुर डिवीजन में करीब साढ़े तीन सौ नायरा के पेट्रोल पंप संचालित हैं, जिनमें उदयपुर जिले व आस पास ही नायरा के करीब 20 से 25 पंप हैं, जबकि पूरे संभाग/डिस्टिक्ट स्तर पर इनकी संख्या 50 से 55 तक पहुंचती है। ऐसे में कंपनी के एक फैसले का सीधा असर स्थानीय सप्लाई चेन पर पड़ना शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार आज करीब 40 प्रतिशत असर नायरा के पम्पों पर दिख रहा है, जो कल तक 40 से 60 प्रतिशत और उसके बाद एक दो दिन में शत प्रतिशत तक पहुंच सकता है। अगर हालात नहीं संभले तो आगे और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। आज हालात यह हो गए कि नायरा के पास के पम्पों पर भीड़ बढ़ गई और नायरा पर सन्नाटा पसर गया जो शाम और रात तक और अधिक गहराता चला गया। इससे पैनिक बाइंग को भी खूब बल मिला। अफवाहों को भी बल मिला कि आने वाले दिनों में दाम सरकारी पम्पों पर भी बढ़ सकते हैं।
आपको बता दें कि प्रदेश में करीब 90 प्रतिशत तक बाजार पर सरकारी कंपनियों के पम्पों का व्यापार कब्जा हैं इसके मुकाबले प्राइवेट कंपनियों—जैसे Reliance और Nayara Energy ही बचती हैं जो खुद तेल की कीमतें तय कर सकती हैं। इन पर वैश्विक परिस्थितियों का बहुत बड़ा दबाव है। ऐसे में इनके फैसले सीधे आम उपभोक्ता की जेब और सप्लाई दोनों पर असर डालेंगे यह तय हैं
गौरतलब है कि नायरा ने पेट्रोल 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल 3 रुपए प्रति लीटर महंगा कर दिया है, जिसके बाद प्रदेशभर के 900 पेट्रोल पंपों पर नई दरें लागू हो चुकी हैं।
उदयपुर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन उपाध्यक्ष विकास अग्रवाल ने बताया कि बढ़ी कीमतों का उदयपुर में भी असर हुआ हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को पैनिक बाइंग से बचना चाहिए और वैश्विक तेल—गैस संकट की इस घड़ी में सभी विकल्पों पर विचार करके सरकार के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलना चाहिएं
कहां सो रहा है जिला प्रशासन
उदयपुर में जिला प्रशासन का इस बारे में कोई बयान नहीं आया कि एक कंपनी की ओर से तेल की कीमतें बढ़ाने पर क्या असर हो रहा है? उस पर प्रशासन का क्या स्टेण्ड है वो क्या कर रहा है? कुछ कर रहा है या करने की स्थिति में ही नहीं है? यदि नहीं है तो लोगों के लिए क्या संदेश है? किन नंबरों पर लोग शिकायत करके प्रशासन से पूछें कि वहां तेल महंगा है तो किस पम्प से खरीदें, कब खरीदें, कितना खरीदें?? शहर में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है यह बात बार बार सरकारी पम्प वालों की एसोसिएशन की ओर से जिला प्रशासन कहलवा रहा है मगर अब नायरा प्रकरण से एक बार फिर से असमंजस की स्थिति बन गई है।
नायरा को लेकर भी असमंजस
अंदरखाने खबर ये भी है कि नायरा कंपनी को भी वैश्विक युद्ध वाली परिस्थितियों के कारण तेल के व्यापार में घाटा हो रहा है जिसका असर कीमतों में बढोत्तरी के रूप में दिख रहा है। मगर इसकी सबसे निचली चेन से जुड़े डीलर्स व उनसे जुड़े लोगों पर भी इस बढोत्तरी का भयंकर असर दिखना तय है, उस पर सरकारी स्तर पर क्या रणनीति है यह देखने वाली बात होगी।

