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शाही शादी में मीडिया को बना दिया याचक, या खुद मीडिया बन गया याचक!!!

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24 News Update Udaipur. मेवाड़ में बावजी चतुरसिंह जी की लिखी एक कहावत बड़ी मशहूर है। कहावत ये है कि पर घर पग नी मेलणो,,, बिना मान मनुहार। इंजन आवै देख ने सिगनल रो सतकार। लेकिन अरावली की वादियों में हो रही साउथ स्टार्स विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की शाही शादी में सब कुछ उल्टा ही देखने को मिल रहा है। बिना मान मनुहार और सत्कार के मीडिया गेट पर खड़ा हुआ इंतजार कर रहा है कि कब उसके हाथ शादी का काई फुटेज लगे और कब वो उसको ब्रेक करते हुए अपने सुपरबॉस को खुश कर दे। नेशनल मीडिया से लेकर इंफ्लूएंसर्स तक आयातित करके बुलाए गए हैं लेकिन उनकी एंट्री गेट तक भी नहीं है। बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना हो रहा है। इंस्टाग्राम ट्विट पर खबरें बन रही हैं और उसी को महाप्रसाद समझा जा रहा है। मगर आज तो गजब ही सीन देखने को मिला। अचानक वीडयो आए कि वेडिंग वेन्यू पर दूल्हे पक्ष के लोगों ने होटल गेट पर आकर मिठाई बांटी। लाभार्थियों में वहां मौजूद मीडिया वाले भी शामिल थे। इस महाप्रसाद को पाने और शादी वालों की एक झलक पाने के लिए मीडिया किस कदर बावला हुआ जा रहा है, यह आप भी देख लीजिए। काजू कतली का यह डिब्बा पाकर मीडिया धन्य हो रहा है। लाभार्थियों के चेहरे खिले हुए हैं। दृश्य ऐसा है कि मानो मीडिया को बरसों की तपस्या के बाद कोई वरदान मिल गया हो। तीन दिन से मीडिया रिसोर्ट के रास्ते पर धूल फांक रहा है मगर परिंदा भी पर नहीं मारने दे रहा। आज अचानक कुछ लोगों को बुलाकर मीडिया की जो भद पिटी गई है वो सचमुच सोचनीय है, चिंता का विषय है। लाइन में माइक, आगे बढ़ते बूम, और बीच-बीच में निर्देश कि आगे मत आओ… कैमरा मत चलाओ…”। यानी फ्रेम हमारा, फुटेज तुम्हारा। और फुटेज क्या दिया अहसान कर दिया।
सवाल सीधा है कि अगर शादी निजी थी। वीवीआईपी थी तो फिर गेट पर यह सार्वजनिक प्रदर्शन आखिर किसलिए? मेवाड़ में तो जिन्हें बुलाया जाता है, वे सम्मान से सबकी संगत करते हुए पंगत में बैठ कर खाना खाते हैं, यूं गेट पर मिठाई पाकर धन्य नहीं होते। अब लोग कह रहे हैं कि मीडिया या तो खुद अब्दुल्ला दीवाना हो गया है या फिर याचक मुद्रा में दिखाई दे रहा है। मीडिया के एक वर्ग का कहना है कि नौकरी के लिए यह सब करना पड़ता है मगर फिर हमारा सवाल है कि खैरात के जैसी बांटी जा रही मिठाई लेकर भी आखिर क्या हासिल हो जाएगा??? वीवीआईपी लोग जब आपको अपनी खुशियों में शरीक नहीं कर रहे हैं तो आप क्यों और किस लिए अपनी ​प्रतिष्ठा को गंवाने पर तुले हुए हो।

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