24 News Update उदयपुर। पिछले दिनों उदयपुर में हुई एक एनआरआई परिवार की शाही शादी देश-विदेश में सुर्खियों में रही। भव्य आयोजन, विदेशी कलाकार, मोटी फीस, वीवीआईपी मेहमान और डोनाल्ड ट्रम्प के बेटे की मौजूदगी ने इसे खास बना दिया। मीडिया से लेकर शहर की नामचीन हस्तियों और अधिकारियों तक, कई लोग इस आयोजन का हिस्सा बने। मीडिया बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना होकर खुलकर तशरीफ ले गया। लेकिन इस चमक-दमक के बीच उदयपुर की आम जनता ने असली कीमत चुकाई—घंटों का जाम, बंद रास्ते, भारी सुरक्षा के बीच घरों में कैद जैसे हालात और रोजमर्रा की जिंदगी में जबरदस्त परेशानी।
शहर ठप, लोग हुए परेशान
21 से 25 नवंबर 2025 के बीच सिटी पैलेस, होटल लीला और होटल उदय विलास में हुए आयोजनों के दौरान शहर में वीवीआईपी मूवमेंट इतना ज्यादा रहा कि आमजन को घंटों ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा। जिस इलाके में कार्यक्रम हुए, वहां के निवासियों को कड़े सुरक्षा इंतजामों के कारण आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई लोगों को अपने ही घर पहुंचने के लिए लंबी दूरी का चक्कर लगाना पड़ा। शहर की इस पीड़ा को देखते हुए एक जागरूक नागरिक ने जिला कलेक्टर से सूचना के अधिकार के तहत चार अहम सवाल पूछे— शाही शादी में कुल कितना खर्च हुआ और सरकार/प्रशासन को कितना राजस्व मिला? आम जनता को हुई परेशानियों की कौन करेगा सुनवाई? जिला प्रशासन ने आयोजन में कौन-कौन सी सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई? शहर के कौन से सरकारी अधिकारी इस शादी में शामिल हुए? मकसद साफ था—यह जानना कि शहर को शाही शादियों से आखिर फायदा क्या है?
जवाब ने चौंकाया
RTI आवेदन पर एडीएम सिटी जितेंद्र ओझा ने नगर निगम आयुक्त को सूचना देने के निर्देश दिए। लेकिन नगर निगम की ओर से जो जवाब आया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। नगर निगम ने साफ कह दिया कि न तो शाही शादी से जुड़े खर्च का कोई रिकॉर्ड है, न राजस्व का कोई आंकड़ा, न आमजन को हुई परेशानी का कोई दस्तावेज, और न ही उन सरकारी अधिकारियों की सूची, जो इस आयोजन में शरीक हुए। चारों बिंदुओं पर एक ही जवाब—“नगर निगम, उदयपुर में सूचना संधारित नहीं है।”
सवालों के घेरे में व्यवस्था
निगम के जवाब के मायने बहुत ही गंभीर हैं। क्या उदयपुर में होने वाले बड़े-बड़े शाही आयोजनों का प्रशासनिक स्तर पर कोई डेटा ही नहीं रखा जाता? क्या शहर को होने वाले लाभ या नुकसान का कोई आकलन नहीं होता?और जब विदेशी मेहमानों व सुरक्षा एजेंसियों की आवाजाही होती है, तो क्या स्थानीय प्रशासन के पास सुरक्षा इंतजामों की कोई ठोस जानकारी नहीं रहती?
चमक के पीछे का अंधेरा
एक ओर उदयपुर को “डेस्टिनेशन वेडिंग सिटी” के रूप में ब्रांड किया जा रहा है, दूसरी ओर RTI के जवाब ने प्रशासनिक तैयारी और पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया है। शाही शादियों से शहर की अर्थव्यवस्था को कितना लाभ हो रहा है—यह सवाल अब भी जवाब का इंतजार कर रहा है।

