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विद्यापीठ – विधि महाविद्यालय में मूट कोर्ट का हुआ आयोजन – विद्यार्थियों ने प्रस्तुत की न्यायिक प्रक्रिया की झलक व्यावहारिक प्रशिक्षण से ही सशक्त बनती है विधि शिक्षा – प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत

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24 News Update उदयपुर 10 अप्रेल। विधि शिक्षा को व्यवहारिक स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से राजस्थान विद्यापीठ के संघटक विधि संकाय के विद्यार्थियों की ओर से मूट कोर्ट का आयोजन किया गया जिसमें मेडिकल ग्रॉस नेग्लिजेन्स के एक महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें हॉस्पिटल मैनेजमेंट को गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने न्यायालय की कार्यप्रणाली का जीवंत प्रदर्शन करते हुए वाद-विवाद, तर्क और कानूनी प्रक्रिया का प्रभावी प्रस्तुतिकरण किया।
मामले के अनुसार, एक मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहाँ उचित चिकित्सा सुविधाओं और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई। आरोप था कि अस्पताल प्रबंधन ने न तो आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए और न ही समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर की व्यवस्था की, जिससे मरीज की मृत्यु हो गई।
निर्णय देते हुए मूट कोर्ट के जजों ने कहा कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट की यह लापरवाही “ग्रॉस नेग्लिजेन्स” की श्रेणी में आती है, और ऐसे मामलों में संस्थान को भी उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए, न कि केवल व्यक्तिगत डॉक्टर को। निर्णायकों ने यह भी कहा कि अस्पतालों को अपने स्टाफ की योग्यता, उपकरणों की उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि मरीजों के जीवन की रक्षा की जा सके।

अध्यक्षता कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि विधि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे व्यवहारिक अभ्यास के साथ जोड़ा जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मूट कोर्ट जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, न्यायिक सोच और प्रभावी अभिव्यक्ति का विकास करती हैं। कुलपति ने विद्यार्थियों को भविष्य में एक सक्षम और संवेदनशील विधि विशेषज्ञ बनने के लिए निरंतर अध्ययन और अभ्यास करने की प्रेरणा दी।
प्रारम्भ में प्राचार्य प्रो. कला मुणेत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि मूट कोर्ट विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी गतिविधि है, जिसके माध्यम से उन्हें न्यायालय की कार्यप्रणाली, वकालत की शैली और कानूनी तर्कों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और विधिक ज्ञान को सुदृढ़ बनाती हैं।
जज की भूमिका सुरभी मेनारिया, डाक्टर की राहूल अग्रवाल – ज्योति, पुलिस की हेमेन्द्र त्रिवेदी, एडवोकेट की कनक सिंघोली, सिद्धार्थ शर्मा, दीपक सिंह चौहान, इफतियाक खान ने निभाई।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने न्यायाधीश, वकील, पुलिस, डाक्टर और पक्षकार की भूमिका निभाते हुए एक काल्पनिक मुकदमे की सुनवाई प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सराहा।

इस अवसर पर डॉ. मीता चौधरी, डॉ. के.के. त्रिवेदी, डॉ. सुरेन्द्र सिंह चुण्डावत, डॉ. प्रतीक जांगीण, डॉ. विनिता व्यास, डॉ. अंजु कावडिया, छत्रपाल सिंह, डॉ. ज्ञानेश्वरी राठौड, सहित अकादमिक सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।

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