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FIAT JUSTITIA राष्ट्रीय मूट कोर्ट का आगाज़: ‘न्यायालय जीवन की प्रयोगशाला’ में उतरे विधि छात्र

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24 News Update उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के विधि महाविद्यालय द्वारा आयोजित FIAT JUSTITIA राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का उद्घाटन आरएनटी ऑडिटोरियम में गरिमामय वातावरण में हुआ। कार्यक्रम में न्याय, कानून और वकालत की गरिमा पर केंद्रित संदेशों ने विधि विद्यार्थियों को पेशेवर जीवन की दिशा दिखाई।

“मूट कोर्ट न्यायिक जीवन का प्रथम कदम” — मनन कुमार मिश्रा
मुख्य अतिथि मनन कुमार मिश्रा, जो Bar Council of India के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य हैं, ने कहा कि मूट कोर्ट विधि विद्यार्थियों के लिए न्यायालयीन जीवन का पहला वास्तविक अभ्यास है। यह उन्हें न्यायालय की गरिमा, तर्क प्रस्तुत करने की कला और अधिवक्ता के दायित्वों से परिचित कराता है।
उन्होंने मूट कोर्ट को विधि शिक्षा की “प्रयोगशाला” बताते हुए कहा कि यहीं विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, शोध कौशल और प्रभावी प्रस्तुतीकरण का विकास होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायालय न्याय का मंदिर है और अधिवक्ता का दायित्व केवल मुवक्किल का प्रतिनिधित्व करना नहीं, बल्कि समाज में न्याय और मानवता की स्थापना करना भी है।
प्रारंभिक पेशेवर चुनौतियों—अनुभव और संसाधनों की कमी—का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि यही संघर्ष भविष्य की सफलता की नींव रखते हैं।

“गहन विधि ज्ञान ही अधिवक्ता की पहचान” — हरि बोरकर
विशिष्ट अतिथि हरि बोरकर, संगठन सचिव, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद ने कहा कि न्याय और कानून की गहरी समझ ही सफल अधिवक्ता की असली पहचान है।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में विधि जानकारों की भूमिका का स्मरण कराते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे भविष्य के समाज-निर्माता बनें। उनके अनुसार, अधिवक्ता को कम शब्दों में सटीक और प्रभावी तर्क प्रस्तुत करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में विधि क्षेत्र में नई चुनौतियां सामने आएंगी, इसलिए विद्यार्थियों को विधिक अध्ययन के साथ तकनीकी समझ भी विकसित करनी होगी।

विश्वविद्यालय नेतृत्व का संदेश
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की मूट कोर्ट प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को न्यायालयीन प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव देती हैं और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करती हैं।
विधि महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. आनंद पालीवाल ने मूट कोर्ट को जीवन की प्रयोगशाला बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में बहस की कला, तार्किक सोच और न्यायिक प्रक्रिया की गहन समझ विकसित होती है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अधिकारी—डीन, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक तथा विधि संकाय के अनेक प्राध्यापक—उपस्थित रहे। अंत में सह-अधिष्ठाता डॉ. शिल्पा सेठ ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

विधि शिक्षा की दिशा
FIAT JUSTITIA जैसे आयोजनों का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि विधि विद्यार्थियों को संवैधानिक मूल्यों, नैतिकता और न्यायिक प्रतिबद्धता से जोड़ना है। मंच पर दिए गए संदेशों ने स्पष्ट किया कि सफल अधिवक्ता बनने की राह गहन अध्ययन, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व से होकर गुजरती है।

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